पिछले साल नहीं बच पाए थे बच्चे, इस बार 22 नन्हे घड़ियालों के लिए बनाया गया खास सुरक्षा कवच

Last Updated:July 03, 2026, 20:06 IST
Sajjangarh Biological Park News : सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में 22 नन्हे घड़ियालों का जन्म हुआ. वन विभाग ने उनकी सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं. वन विभाग ने नन्हे घड़ियालों को चील, कौवों और अन्य शिकारी पक्षियों से बचाने के लिए उनके एनक्लोजर को विशेष सुरक्षा मैट से पूरी तरह ढक दिया है. इसके साथ ही कर्मचारियों की ओर से चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है.
उदयपुर. सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए इस बार अच्छी खबर सामने आई है. मानसून की दस्तक से पहले पार्क में घड़ियालों की सफल ब्रीडिंग हुई है, जिससे घड़ियाल परिवार में 22 नन्हे मेहमानों का आगमन हुआ है. तीन से चार दिन पहले अंडों से बाहर निकले अंगूठे के आकार के ये नन्हे घड़ियाल फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित वातावरण में रखे गए हैं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.
बायोलॉजिकल पार्क में लगातार तीसरे वर्ष घड़ियालों की सफल ब्रीडिंग हुई है. हालांकि पिछले दो वर्षों में जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चों को अधिक मृत्यु दर के कारण बचाया नहीं जा सका था. इस बार वन विभाग ने पुराने अनुभवों से सीख लेते हुए सुरक्षा और देखभाल के विशेष इंतजाम किए हैं, जिससे बच्चों के जीवित रहने की संभावना पहले की तुलना में काफी अधिक मानी जा रही है.
विशेष सुरक्षा मैट ने पूरी तरह ढक लियावन विभाग ने नन्हे घड़ियालों को चील, कौवों और अन्य शिकारी पक्षियों से बचाने के लिए उनके एनक्लोजर को विशेष सुरक्षा मैट से पूरी तरह ढक दिया है. इसके साथ ही कर्मचारियों की ओर से चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह का खतरा पैदा न हो. फिलहाल इन बच्चों को डिस्प्ले एरिया में सुरक्षित रखा गया है, जहां पर्यटक भी इन्हें देख सकते हैं.
विशेष एक्शन प्लान किया तैयारसज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के डीएफओ यादवेंद्र सिंह चुंडावत ने बताया कि नन्हे घड़ियालों के बेहतर संरक्षण और विकास के लिए विभाग ने विशेष एक्शन प्लान तैयार किया है. जन्म के लगभग 15 दिन बाद सभी बच्चों को अलग-अलग सुरक्षित टबों में शिफ्ट किया जाएगा, जिससे उनकी व्यक्तिगत निगरानी और देखभाल आसान हो सके. उन्होंने बताया कि शुरुआती विकास के लिए इन्हें विशेष आहार के रूप में ‘गंगूजा’ नामक छोटी मछलियां खिलाई जाएंगी. इसके अलावा इनकी परवरिश के लिए पार्क परिसर में एक अलग छोटा तालाब भी तैयार किया जा रहा है, जहां नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण में इनका पालन-पोषण किया जाएगा.
सुरक्षा और निगरानी पर विशेष जोरबायोलॉजिकल पार्क में दो मादा और एक नर घड़ियाल मौजूद हैं, जो पिछले करीब 10 वर्षों से पार्क की शान बने हुए हैं. पिछले वर्ष भी इनसे सफल ब्रीडिंग करवाई गई थी, लेकिन अधिक मृत्यु दर के कारण अधिकांश बच्चे जीवित नहीं रह सके थे. इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा, निगरानी और पोषण पर विशेष जोर दिया गया है. वन विभाग को उम्मीद है कि इस बार अपनाई गई अतिरिक्त सावधानियां और वैज्ञानिक तरीके न केवल इन 22 नन्हे घड़ियालों को सुरक्षित रखने में सफल होंगे, बल्कि भविष्य में घड़ियाल संरक्षण के लिए भी यह प्रयास एक महत्वपूर्ण उदाहरण साबित होगा.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
न्यूजलेटर
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें
Location :
Udaipur,Rajasthan



