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तेलंगाना के इस मजार पर नारियल चढ़ाने की है परंपरा… बस एक काम से पूरी होती हैं मन्नतें

Last Updated:July 03, 2026, 21:37 IST

Hyderabad News: तेलंगाना के मल्लन्नगूडम में एक प्राचीन सूफी संत की मजार सांप्रदायिक सद्भाव का केंद्र है. यहां हिंदू-मुस्लिम दोनों नारियल चढ़ाते हैं, जो पीढ़ियों से आस्था का प्रतीक है. इस दरगाह की सबसे बड़ी विशेषता यहां निभाई जाने वाली अनूठी सांस्कृतिक परंपरा है. मज़ार के पास बड़ी संख्या में टूटे हुए नारियल दिखाई देते हैं. आमतौर पर हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाला नारियल यहां सूफ़ी संत के दरबार में मन्नत पूरी होने की खुशी में श्रद्धा के साथ चढ़ाया जाता है.

तेलंगाना. भारत की सदियों पुरानी गंगा-जमुनी तहज़ीब और धार्मिक सद्भाव की झलक आज भी ग्रामीण इलाकों में जीवंत रूप से देखने को मिलती है. ऐसा ही एक अनोखा और आस्था से जुड़ा दृश्य तेलंगाना के ग्रामीण क्षेत्र मल्लन्नगूडम से सामने आया है, जहां एक बेहद प्राचीन सूफ़ी संत की मज़ार आज भी विभिन्न समुदायों के लोगों के बीच अटूट विश्वास का केंद्र बनी हुई है.

हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के माध्यम से इस ऐतिहासिक स्थान की खूबसूरती और यहां की अनूठी परंपराएं लोगों के सामने आई हैं. एक विशाल और पुराने पेड़ की छांव में स्थित इस दरगाह की दीवारें पूरी तरह सफेद रंग से पुती हुई हैं, जो सादगी और शांति का प्रतीक मानी जाती हैं. मज़ार के चारों ओर बिछी हरे और सुनहरे रंग की पारंपरिक चादरें इसकी पवित्रता को और भी खास बना देती हैं.

नारियल चढ़ाने की अनोखी परंपराइस दरगाह की सबसे बड़ी विशेषता यहां निभाई जाने वाली अनूठी सांस्कृतिक परंपरा है. मज़ार के पास बड़ी संख्या में टूटे हुए नारियल दिखाई देते हैं. आमतौर पर हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाला नारियल यहां सूफ़ी संत के दरबार में मन्नत पूरी होने की खुशी में श्रद्धा के साथ चढ़ाया जाता है. यह परंपरा इस बात का जीवंत उदाहरण है कि ग्रामीण भारत में आस्था की कोई सीमा या दीवार नहीं होती. यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग समान श्रद्धा के साथ माथा टेकते हैं.

पीढ़ियों से आस्था का केंद्र बनी हुई है दरगाहस्थानीय निवासियों और दरगाह की देखरेख करने वाले बुजुर्गों के अनुसार, यह मज़ार कई पीढ़ियों पुरानी है. उनका कहना है कि यह दरगाह उनके दादा-परदादा के समय से भी पहले की है. उनके मुताबिक यह स्थान केवल इबादत की जगह नहीं, बल्कि पूरे गांव की सुख-समृद्धि, एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक है.

सांप्रदायिक सौहार्द की मिसालसच्ची आस्था, आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करती तेलंगाना की यह छोटी-सी दरगाह आज भी लोगों को एक खूबसूरत संदेश देती है. यहां आने वाले श्रद्धालु अलग-अलग धर्मों से जरूर होते हैं, लेकिन उनकी आस्था एक ही स्थान पर आकर जुड़ जाती है. यह दरगाह बताती है कि जब दिलों में मोहब्बत और सम्मान हो, तो इबादत के तरीके अलग होने के बावजूद इंसान एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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