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Face Mites Evolution | आपके चेहरे पर रेंगते हैं ये खौफनाक जीव, अब इंसानों के शरीर का बन रहे हैं परमानेंट हिस्सा | Science News In Hindi

नई दिल्ली: अगर आप कहीं अकेले में यह पढ़ रहे हैं तो जान लें कि आप बिल्कुल अकेले नहीं हैं. आपके चेहरे पर हर वक्त अनगिनत छोटे जीव रहते हैं. इन रहस्यमयी जीवों को माइट्स या डेमोडेक्स फोलिकुलोरम कहा जाता है. ये आपके हेयर फॉलिकल्स के अंदर उल्टे लटके रहते हैं. ये जीव हम इंसानों पर ही पैदा होते हैं और यहीं मर जाते हैं. इनका पूरा जीवन हमारी स्किन के डेड सेल्स खाने में ही निकल जाता है. ये जीव पूरी तरह से हम इंसानों पर निर्भर करते हैं. अब एक नई रिसर्च में बहुत ही हैरान करने वाली बात सामने आई है. मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एंड इवोल्यूशन की नई रिपोर्ट के मुताबिक ये माइट्स अब खुद को तेजी से बदल रहे हैं. ये जीव अब एक एक्टोपैरासाइट से इवॉल्व होकर पूरी तरह ऑब्लिगेट सिम्बायोंट बन रहे हैं. सरल शब्दों में, इसका मतलब यह है कि ये जीव धीरे-धीरे इंसानी शरीर के साथ मर्ज हो रहे हैं.

नई स्टडी में साइंटिस्ट्स ने इन जीवों के जीनोम की डीप सिक्वेंसिंग की है. इस रिसर्च के रिजल्ट्स देखकर दुनिया भर के साइंटिस्ट्स हैरान रह गए हैं. इंसानों पर पूरी तरह निर्भर होने के कारण इन जीवों में काफी भारी बदलाव हुए हैं. इवोल्यूशन के ऐसे हैरान करने वाले बदलाव किसी और माइट प्रजाति में आज तक नहीं देखे गए हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग की जानी-मानी रिसर्चर एलेजांद्रा पेरोटी ने कहा, ‘पोर्स के अंदर सुरक्षित जीवन बिताने के कारण इन जीवों के डीएनए में कई असामान्य बदलाव हुए हैं.’ चेहरे के पोर्स के अंदर सालों तक सुरक्षित जीवन बिताने के कारण इनके शरीर के अंगों का अरेंजमेंट भी पूरी तरह बदल गया है.

माइक्रोस्कोप से ली गई तस्वीर जिसमें इंसानी त्वचा पर डेमोडेक्स फोलिकुलोरम दिख रहा है. (Image : University of Reading)

रात में आपके चेहरे पर बाहर निकलकर ये छोटे जीव आखिर क्या करते हैं?

डेमोडेक्स फोलिकुलोरम बहुत ही ज्यादा दिलचस्प जीव है. इस जीव का एकमात्र खाना इंसान के चेहरे की डेड स्किन होती है. इस जीव का पूरा जीवन सिर्फ तीन हफ्ते का ही होता है. यह अपना पूरा समय अपना खाना खोजने और मेटिंग करने में लगा देता है. ये जीव दिन के उजाले में कभी बाहर नहीं आते हैं. ये सिर्फ रात के अंधेरे में ही आपके पोर्स से बाहर निकलते हैं. ये बहुत धीरे-धीरे आपके चेहरे पर रेंगते हैं और अपने लिए एक मेट तलाशते हैं. मेटिंग का काम पूरा होने के बाद ये वापस हेयर फॉलिकल के सुरक्षित अंधेरे में छिपने के लिए चले जाते हैं.

इन माइट्स के शरीर की बनावट कैसी होती है?

इन जीवों का आकार बहुत ही ज्यादा छोटा होता है. इनकी लंबाई एक मिलीमीटर के सिर्फ एक तिहाई हिस्से के बराबर होती है.
इनका शरीर एक छोटे सॉसेज की तरह काफी लंबा होता है. शरीर के एक सिरे पर बहुत सारे छोटे-छोटे पैर होते हैं और एक मुंह होता है.
यह खास बनावट इन्हें ह्यूमन हेयर फॉलिकल्स के अंदर आसानी से जाने में पूरी मदद करती है.

यूनिवर्सिटी ऑफ वियना के बायोलॉजिस्ट अलेजांद्रो मंजानो-मारिन और गिल्बर्ट स्मिथ ने इनके जेनेटिक्स पर गहरी स्टडी की है. उन्होंने अपनी रिसर्च में बताया कि इनका जीवन बहुत ही ज्यादा आसान होता है. इनके सामने कोई प्राकृतिक खतरा या किसी तरह का कोई कॉम्पिटिशन नहीं होता है.

इनके शरीर में सिर्फ जरूरी जींस ही क्यों बचे हैं?

बाहरी खतरा कम होने के कारण इन जीवों का जीनोम बहुत ही ज्यादा छोटा हो गया है. इनके शरीर में केवल वही जींस बचे हैं जो इनके जिंदा रहने के लिए जरूरी हैं. यह संख्या इस प्रजाति के पूरे इतिहास में सबसे कम देखी गई है. इनका हर एक पैर सिर्फ तीन सिंगल-सेल मसल्स के सहारे चलता है. जीनोम छोटा होने के कारण इनके रोजमर्रा के स्वभाव में भी अजीब बदलाव आए हैं. इसी बड़े कारण से ये जीव सिर्फ रात में ही पोर्स से बाहर आते हैं. इन्होंने इवोल्यूशन के दौरान यूवी प्रोटेक्शन वाले जींस पूरी तरह से खो दिए हैं. अब इनके पास दिन की रोशनी में जगाने वाले जींस भी बिल्कुल नहीं बचे हैं.

ये जीव रिप्रोडक्शन कैसे करते हैं?

ये माइट्स अपने शरीर के अंदर मेलाटोनिन हार्मोन नहीं बना सकते हैं. इंसानों में यह हार्मोन रात में सोने का साइकिल अच्छे से सेट करता है. दूसरी तरफ छोटे जीवों में यह हार्मोन मूवमेंट और रिप्रोडक्शन के काम आता है.
इस हार्मोन के बिना भी इन जीवों को कोई खास परेशानी कभी नहीं होती है. रिसर्च के मुताबिक ये जीव शाम के समय इंसानी स्किन से निकलने वाले मेलाटोनिन का इस्तेमाल करते हैं.
बाकी जीवों से बिल्कुल अलग इनके रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स शरीर के अगले हिस्से में आ गए हैं. मेल माइट्स का प्राइवेट पार्ट उनकी पीठ से आगे और ऊपर की तरफ पॉइंट करता है. इस कारण इन्हें मेटिंग के दौरान बालों पर एक बहुत खास पोजिशन बनानी पड़ती है.
इन जीवों में अपनी प्रजाति बढ़ाने के लिए मेटिंग बहुत ज्यादा जरूरी है. लेकिन इनका जीन पूल बहुत ही ज्यादा छोटा होता जा रहा है. इसका मतलब है कि इनमें जेनेटिक डायवर्सिटी बढ़ने का कोई भी चांस नहीं है. रिसर्चर्स मानते हैं कि यह खतरनाक स्थिति इन्हें इवोल्यूशन के डेड एंड की तरफ ले जा सकती है.
नई रिसर्च में एक और बहुत दिलचस्प बात सामने आई है. इन जीवों की निम्फ स्टेज में इनके शरीर में सबसे ज्यादा सेल्स मौजूद होते हैं. निम्फ स्टेज लार्वा और एडल्ट के बीच का समय होता है. जब ये पूरी तरह से एडल्ट बन जाते हैं तो इनके शरीर से सेल्स कम होने लगते हैं. यह साबित करता है कि ये जीव एक सिम्बायोटिक लाइफस्टाइल की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.

क्या ये जीव इंसानों के लिए फायदेमंद हैं?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये अजीब जीव इंसानों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं. रिसर्चर्स को अपनी लंबी स्टडी में इसका कुछ हद तक सही जवाब मिल गया है. कई सालों से दुनिया भर के साइंटिस्ट्स मानते थे कि इन जीवों के पास मल त्यागने के लिए अंग नहीं होता है.

माना जाता था कि इनका मल शरीर में जमा होता है और मरने पर फट जाता है. इससे लोगों को स्किन की गंभीर बीमारियां होती हैं. लेकिन नई रिसर्च ने इस पुरानी थ्योरी को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है. असल में इन जीवों के पास मल त्यागने के लिए छोटे अंग मौजूद होते हैं. इसका मतलब है कि मरने के बाद आपके चेहरे पर इनका मल बिल्कुल नहीं फैलता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ बैंगोर के मशहूर जूलॉजिस्ट हेंक ब्रैग ने कहा, ‘माइट्स को बेवजह बहुत सी चीजों के लिए हमेशा जिम्मेदार ठहराया गया है.’ इनका हम इंसानों के साथ बहुत लंबा कनेक्शन रहा है. इससे पता चलता है कि ये जीव हमारे लिए कुछ फायदेमंद काम भी जरूर करते होंगे. हो सकता है कि ये जीव हमारे चेहरे के पोर्स को अंदर से साफ रखने में अहम रोल निभाते हों.

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