बंजर जमीन पर ‘लाल सोना’! पाली के रोहट में खारे पानी के बीच होगी ड्रैगन फ्रूट की खेती, KVK का बड़ा नवाचार!

Last Updated:July 04, 2026, 11:55 IST
Pali Dragon Fruit Farming: पाली जिले के रोहट क्षेत्र में खारे पानी और अधिक लवणीय मिट्टी के बीच अब किसानों के लिए नई उम्मीद जगी है. कृषि विज्ञान केंद्र पाली ने एक विशेष प्रोजेक्ट के तहत ड्रैगन फ्रूट की खेती के सफल परिणाम सामने रखे हैं. कृषि विशेषज्ञ डॉ. अरविंद सिंह तेतरवाल के अनुसार, ड्रैगन फ्रूट कम पानी और अधिक सेलिनिटी वाले क्षेत्रों में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखता है. यह परियोजना किसानों को उनकी जमीन और पानी के अनुसार उपयुक्त फल चुनने में वैज्ञानिक मदद देगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ ड्रैगन फ्रूट जैसे उच्च मूल्य वाले फलों को अपनाते हैं, तो उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है. इस पहल से रोहट और आसपास के क्षेत्रों में बागवानी को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है.
ख़बरें फटाफट
पाली. कहते हैं कि अगर हौसला बुलंद हो और साथ में आधुनिक तकनीक का साथ मिल जाए, तो मरुस्थल की छाती को चीरकर भी सोना उगाया जा सकता है. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है पाली के कृषि विज्ञान केंद्र और रोहट के प्रगतिशील किसानों ने. पाली का रोहट क्षेत्र… जहां की जमीन कड़ी और पानी खारा है. अमूमन ऐसी जगहों पर किसान पारंपरिक खेती करने से भी कतराते हैं, लेकिन अब इसी खारे पानी और पथरीली जमीन पर विदेशी ‘ड्रैगन फ्रूट’ की मिठास घुलेगी. कृषि विज्ञान केंद्र पाली ने एक ऐसा शानदार नवाचार किया है, जिसने मुश्किल हालातों को भी अवसर में बदल दिया है.
अब यह कहा जा सकता है कि ड्रैगन फ्रूट आने वाले समय में रोहट के किसानों की तकदीर और तस्वीर को बदलने का काम करेगा. पाली जिले के रोहट और आस-पास के क्षेत्रों में किसानों के लिए खारा पानी और जमीन में सेलिनिटी हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है. इस प्रतिकूल परिस्थिति में कौन सा फल उगाया जाए, यह किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल था. किसानों की इसी गंभीर समस्या को दूर करने और उन्हें सही फल के चयन में मदद करने के लिए कृषि विशेषज्ञ डॉ. अरविंद सिंह तेतरवाल ने एक विशेष प्रोजेक्ट तैयार किया है, जो आने वाले समय में क्षेत्र के किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है.
खारे पानी और सेलिनिटी के बीच ‘ड्रैगन फ्रूट’ का शानदार रिजल्ट
डॉ. अरविंद सिंह तेतरवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि रोहट और पाली के जिन इलाकों में पानी में खारापन और मिट्टी में भारी सेलिनिटी है, वहां ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit) के बेहद शानदार और सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं. ड्रैगन फ्रूट कम पानी और लवणीय वातावरण को सहन करने की अद्भुत क्षमता रखता है. रोहट जैसे अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों के लिए यह एक बेहतरीन ‘इमर्जिंग फ्रूट’ (उभरते हुए फल) के रूप में सामने आएगा.
पारंपरिक खेती छोड़ नए फलों का करें समायोजन
डॉ. तेतरवाल ने क्षेत्र के किसानों को एक विशेष संदेश देते हुए कहा कि जो किसान भाई लंबे समय से सिर्फ पारंपरिक फसलें या फल ले रहे हैं, उन्हें अब अपनी सोच और तकनीक में थोड़ा बदलाव करना होगा. अगर किसान अपनी खेती में ड्रैगन फ्रूट जैसे नए और उच्च मूल्य वाले फलों का समायोजन करेंगे, तो उनकी आय में भारी बढ़ोतरी होगी और इसे दोगुनी करने के चांस काफी बढ़ जाएंगे. ड्रैगन फ्रूट एक ऐसा चमत्कारी फल है, जो आने वाले समय में रोहट और पाली क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर उनकी किस्मत बदलने की पूरी क्षमता रखता है.
प्रोजेक्ट से किसानों को मिलेगी फल चयन में आसानी
आमतौर पर किसान खारे पानी की वजह से नया बाग लगाने से डरते हैं. डॉ. तेतरवाल के इस नए प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य यही है कि किसानों को वैज्ञानिक डेटा के आधार पर यह समझने में आसानी हो कि उनकी जमीन और पानी के हिसाब से कौन सा फल सबसे बेस्ट रहेगा. इस प्रोजेक्ट के जरिए किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे क्षेत्र में कृषि की एक नई क्रांति की शुरुआत होगी.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
न्यूजलेटर
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें



