Rajasthan

हैदराबाद का यह रेलवे स्टेशन क्यों है देशभर में खास? 110 साल बाद भी इसकी शान नहीं हुई कम

Last Updated:July 04, 2026, 12:19 IST

Kachiguda Railway Station : काचीगुड़ा रेलवे स्टेशन ने 110 साल पूरे किए. 1916 में निज़ाम मीर उस्मान अली खान के शासनकाल में शुरू हुआ यह स्टेशन हैदराबाद का प्रमुख हेरिटेज लैंडमार्क है. काचीगुड़ा रेलवे स्टेशन केवल अपने इतिहास के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल आधुनिक बुनियादी ढांचे के लिए भी जाना जाता है. इस स्टेशन को ग्रीन प्लेटिनम रेटिंग, सोलर एनर्जी, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं.

हैदराबाद. हैदराबाद शहर के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक रेलवे लैंडमार्क में शामिल काचीगुड़ा रेलवे स्टेशन ने देश और जनता की सेवा के 110 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं. यह उपलब्धि हैदराबाद के परिवहन और सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जाती है. इस ऐतिहासिक स्टेशन की शुरुआत 10 जून 1916 को तत्कालीन निज़ाम मीर उस्मान अली खान के शासनकाल में हुई थी. शुरुआत में इसे निज़ाम गारंटीड स्टेट रेलवे के मुख्यालय के रूप में विकसित किया गया था. अपनी भव्य गोथिक शैली की वास्तुकला, आकर्षक गुंबदों और ऊंची मीनारों के कारण यह स्टेशन आज भी एक प्रमुख हेरिटेज संरचना के रूप में पहचाना जाता है.

समय के साथ यहां आधुनिक सुविधाओं का विस्तार हुआ, लेकिन दक्षिण मध्य रेलवे ने स्टेशन की मूल ऐतिहासिक पहचान और पारंपरिक स्वरूप को पूरी तरह सुरक्षित रखा है. काचीगुड़ा स्टेशन आज हैदराबाद के चार प्रमुख रेलवे टर्मिनलों में शामिल है. यह दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद डिवीजन का प्रशासनिक मुख्यालय भी है. यहां से दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, तिरुपति, मैसूरु, इंदौर, भोपाल, मदुरै, मंगलुरु और नांदेड़ समेत देश के कई प्रमुख शहरों के लिए ट्रेन सेवाएं संचालित होती हैं.

विरासत के साथ आधुनिक सुविधाओं का संगमकाचीगुड़ा रेलवे स्टेशन केवल अपने इतिहास के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल आधुनिक बुनियादी ढांचे के लिए भी जाना जाता है. इस स्टेशन को ग्रीन प्लेटिनम रेटिंग, सोलर एनर्जी, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं. विशाल सोलर पावर सिस्टम से लैस यह स्टेशन प्रतिदिन करीब 50 हजार यात्रियों को सेवाएं देता है और ऊर्जा की उल्लेखनीय बचत भी करता है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस स्टेशन से विभाग को प्रतिदिन लगभग 60 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है. पांच प्लेटफॉर्म और आधुनिक यात्री सुविधाओं से सुसज्जित यह स्टेशन विरासत और तकनीक का बेहतरीन उदाहरण बन चुका है.

रेल म्यूजियम भी बना आकर्षण का केंद्रस्टेशन परिसर में स्थित काचीगुड़ा रेल म्यूजियम बच्चों, पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र है. वर्ष 2015 में स्थापित इस संग्रहालय का 2024 में आधुनिक रूप से पुनर्विकास किया गया. यहां भारतीय रेलवे की समृद्ध विरासत से जुड़ी कई दुर्लभ वस्तुएं संरक्षित हैं. संग्रहालय में पुराने समय की तस्वीरें, विंटेज सिग्नलिंग उपकरण, पुराने टिकट, लोकोमोटिव मॉडल और औपनिवेशिक काल की कई ऐतिहासिक वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं.

1907 का स्टीम इंजन आज भी बना आकर्षणइस म्यूजियम का सबसे बड़ा आकर्षण वर्ष 1907 में निर्मित स्टीम लोकोमोटिव ‘सर एलेक’ है, जिसे शुरुआती रेलवे इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण माना जाता है. इसके अलावा यहां एयर-कंडीशंड ऑडियो-विजुअल गैलरी भी बनाई गई है, जहां रेलवे के इतिहास और सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी दी जाती है. परिसर में संरक्षित दो हेरिटेज मीटर गेज कोच भी पर्यटकों को रेलवे के पुराने दौर की याद दिलाते हैं और इस ऐतिहासिक अनुभव को और खास बना देते हैं.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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