जसवंत सिंह खालरा पर बनी फिल्म ‘सतलज’ पर उनकी पत्नी परमजीत का बेबाक बयान- ‘फिल्म परिवार को जैसी दिखाई गई थी वैसी’

Last Updated:July 04, 2026, 16:20 IST
एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर बनी बायोपिक ‘सतलज’ लोगों को रुला रही है. सोशल मीडिया पर लोग इसे देखने की अपील कर रहे हैं. अब जसवत सिंह खालरा की पत्नी परमजीत कौर ने फिल्म पर अपना रिएक्शन दिया है. जसवंत सिंह खालरा को 1995 में उनके घर के बाहर से अगवा करके मार दिया गया था. उनकी पत्नी परमजीत कौर ने न्याय के खातिर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी. उन्होंने अदालतों के चक्कर काटे और मुद्दे को जिंदा रखा, जिसकी वजह से दोषी पुलिसवालों को सजा मिली. परमजीत कौर ने ‘सतलज’ को लेकर उम्मीद जताई है कि फिल्म उनके पति की विरासत को सम्मान देगी और उन्हें न्याय और इंसानियत की अहमियत समझाएगी.
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सेंसर बोर्ड ने पहले फिल्म ‘सतलज’ में 120 कट्स की मांग की थी.
नई दिल्ली: एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर बनी बायोपिक ‘सतलज’ ओटीटी पर रिलीज हो गई है. इसे आप जी5 पर देख सकते हैं. फिल्म के रिलीज होते ही जसवंत सिंह की पत्नी परमजीत कौर खालरा ने इसका खुलकर सपोर्ट किया. उन्होंने प्लेटफॉर्म एक्स पर साफ कहा कि फिल्म में कोई काट-छांट नहीं की गई है और इसकी असली आत्मा और सच्चाई पूरी तरह बयां हुई है. यह बयान उन सभी अटकलों पर विराम लगाता है जिनमें कहा जा रहा था कि सेंसर बोर्ड के दबाव में फिल्म के कई अहम सीन हटा दिए गए हैं.
परमजीत कौर ने बताया कि दबाव के बावजूद निर्देशक हनी त्रेहान ने फिल्म की सच्चाई से कोई समझौता नहीं किया. सेंसर बोर्ड ने पहले फिल्म में करीब 120 कट्स लगाने की मांग की थी, जिसमें पंजाब पुलिस, कस्टडी में हिंसा और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़े सीन शामिल थे. मेकर्स ने इन बदलावों को मानने से इनकार कर दिया था, यही वजह है कि फिल्म को सर्टिफिकेट मिलने में तीन साल लग गए. परमजीत कौर ने फिल्म के ऑरिजिनल वर्शन को मंजूरी देते हुए तसल्ली जताई कि फिल्म दर्शकों तक वैसी ही पहुंची है, जैसी परिवार को दिखाई गई थी.
(फोटो साभार: X)
सिर्फ फिल्म का नाम बदला फिल्म के अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने भी इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर साफ कहा कि अगर फिल्म में एक भी कट लगा होता, तो वह इसका प्रमोशन कभी नहीं करते. निर्देशक और अभिनेता दोनों ने साफ किया कि सिर्फ फिल्म का नाम बदला गया है, कहानी बिल्कुल वैसी ही है. फिल्म में दिखाया गया है कि जसवंत सिंह खालरा ने कैसे पंजाब में उग्रवाद के दौर में 25000 से ज्यादा लावारिस लाशों का मुद्दा उठाया था.
परमजीत कौर ने राजनीति में भी आजमाया हाथ एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा को 1995 में उनके घर के बाहर से अगवा कर मार दिया गया था, जिसके बाद उनकी पत्नी परमजीत कौर ने न्याय की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी. उन्होंने अदालतों के चक्कर काटे और ग्लोबल लेवल पर इस मुद्दे को जिंदा रखा, जिसकी वजह से दोषी पुलिसवालों को सजा मिली. अब 70 की उम्र पार कर चुकीं परमजीत कौर ने राजनीति में भी हाथ आजमाया और मानवाधिकारों की वकालत करती रहीं. उन्हें पूरी उम्मीद है कि यह फिल्म उनके पति की विरासत को सही सम्मान देगी और दुनिया को न्याय और इंसानियत की अहमियत समझाएगी.
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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें
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