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‘मेरी तबीयत ठीक नहीं है’, बहन आशा भोसले से जब मिलने पहुंचीं उषा मंगेशकर, सुनाया यादगार किस्सा

नई दिल्ली: भारतीय संगीत की अनमोल रत्न और सुरों की मलिका आशा भोंसले ने जब भी माइक संभाला, जादू बिखर गया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्टेज पर सादगी से साड़ी पहने दिखने वाली हमारी प्यारी ‘आशा ताई’ बचपन में कैसी थीं? हाल ही में उनकी बहन उषा मंगेशकर ने आशा भोंसले से जुड़ी कुछ ऐसी अनसुनी यादें साझा की हैं, जिन्हें सुनकर हर कोई हैरान है. उषा मंगेशकर ने बताया कि शादी से पहले आशा जी बिल्कुल एक ‘टॉमब्वॉय’ थीं, जो पैंट-शर्ट पहनती थीं और बात-बात पर लोगों से भिड़ जाती थीं.

आइए जानते हैं आशा भोंसले की जिंदगी का वो दौर जब वे घर से भाग गई थीं और सालों बाद जब अपनी बहन से मिलीं, तो नजारा कैसा था.

बात-बात पर हो जाती थी लड़ाई

उषा मंगेशकर ने फिल्मफेयर में उन दिनों को याद किया जब वे और आशा भोंसले साथ रहा करती थीं. उन्होंने बताया, “शादी से पहले मुझे आशा की जो छवि याद थी, वो एक छोटे टॉमब्वॉय जैसी थी. वो सात-आठ साल की उम्र में पैंट, शर्ट और वेस्टकोट पहनती थीं, साइकिल पर घूमती रहती थीं और हमेशा किसी न किसी से लड़ाई करने के लिए तैयार रहती थीं. वो बेहद चुलबुली थीं, सबको चिढ़ाती थीं, हंसती-मजाक करती थीं और लोगों को मारने के लिए उनके पीछे दौड़ती थीं.” उषा को लगा था कि बड़ी होने के बाद भी आशा वैसी ही होंगी, लेकिन वक्त ने सब कुछ बदल दिया था.

14 साल की उम्र में घर से भागकर की थी शादी

आशा भोंसले की निजी जिंदगी बेहद उतार-चढ़ाव भरी रही. उन्होंने महज 14-15 साल की उम्र में अपने से करीब 20 साल बड़े गणपतराव भोंसले के साथ घर से भागकर शादी कर ली थी. इस फैसले से उनका परिवार, खासकर उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर बेहद नाराज हो गई थीं. लता दीदी ने इस शादी को मंजूरी नहीं दी थी और उन्होंने लंबे समय तक आशा जी से बात भी नहीं की थी. घर छोड़ने के बाद लगभग एक दशक तक आशा भोंसले का अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं रहा.

फटी रह गईं बहन की आंखें

उषा मंगेशकर ने बताया कि जब आशा जी ने घर छोड़ा, उसके करीब 10 साल बाद दोनों बहनों की पहली मुलाकात एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में हुई, जहां उन्हें एक साथ युगल गीत गाना था. उषा ने बताया, “शादी के बाद मैं उन्हें पहली बार देख रही थी. वे हाल ही में बेटे हेमंत की मां बनी थीं. जब मैंने उन्हें देखा, तो मैं बस देखती ही रह गई. कहाँ वो पैंट-शर्ट पहनने वाली चुलबुली लड़की और कहाँ सामने खड़ी एक संस्कारी महिला! उनके माथे पर एक बड़ा सा टिक्का था, बाल बंधे हुए थे, उन्होंने एक सादी सफेद साड़ी पहनी हुई थी, हाथों में सोने की चूड़ियाँ और कलाई पर घड़ी थी. वे पूरी तरह बदल चुकी थीं.”

मुलाकात होते ही लगाई थी डांट

उषा मंगेशकर ने हंसते हुए उस पल को याद किया जब आशा जी ने उन्हें देखते ही सबसे पहले डांट लगाई थी. उषा ने बताया, “उन्होंने मुझे देखा और तुरंत टोकते हुए कहा- तुम्हारे बाल इतने बिखरे हुए क्यों हैं? क्या तुम्हारे पास हेयरपिन नहीं है? मेरे पास कोई पिन नहीं थी, तो उन्होंने खुद अपनी एक हेयरपिन निकाली, मुझे दी और कहा- इसे लगाओ और अपने बालों को ठीक से पिन करके आया करो. उनके बात करने का तरीका, उनका लहजा सब कुछ पूरी तरह बदल चुका था.”

पोते के जन्म के बाद पिघला था मां का दिल

घर से भागने की वजह से भले ही परिवार में दूरियां आ गई थीं, लेकिन आशा जी के पहले बेटे हेमंत के जन्म के बाद चीजें बदलने लगीं. उषा ने बताया कि जब उनकी मां को पता चला कि उनका पहला पोता हुआ है, तो वे बेहद खुश हुईं. कुछ दिनों बाद आशा जी ने खुद अपनी मां को फोन किया और कहा, “मेरी तबीयत ठीक नहीं है, प्लीज आ जाओ.” इसके बाद मां के साथ उषा भी उनसे मिलने गईं और धीरे-धीरे परिवार के बीच का मनमुटाव खत्म हो गया और सबका साथ में आना-जाना फिर से शुरू हो गया.

बता दें कि गणपतराव भोंसले से आशा जी का रिश्ता लंबा नहीं चला और 1960 में दोनों अलग हो गए. इसके बाद 1980 में उन्होंने मशहूर संगीतकार आरडी बर्मन से शादी की थी. आशा भोंसले की जिंदगी की ये कहानियां बयां करती हैं कि एक चुलबुली और बागी लड़की ने किस तरह हालातों का सामना करते हुए खुद को ढाला और संगीत की दुनिया में एक ऐसा मुकाम हासिल किया जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता.

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