Gadi Eisenkot| benjamin netanyahu| israel| नेतन्याहू को इजरायल में चुनौती! खतरे में पीएम की गद्दी, कौन हैं ललकारने वाले गादी आइजनकोट?

Who is Gadi Eisenkot challenging Netanyahu: मिडिल ईस्ट में हाहाकार मचाने वाले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें अपने मुल्क में ही शुरू हो गई हैं. नेतन्याहू को अपने देश में ही कड़े सवालों का सामना करना पड़ रहा है और उनकी पीएम की गद्दी पर भी खतरा मंडरा रहा है. उनको ललकारने वाले कोई और नहीं बल्कि कभी नेतन्याहू की वॉर कैबिनेट में शामिल रहे इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में..
गाजा में अपने बेटे और दो भतीजों को खोने वाले गादी आइजनकोट प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सबसे बड़े विरोधी के रूप में उभर रहे हैं. 66 वर्षीय आइजनकोट सुरक्षा मामलों में सख्त रुख रखने वाले माने जाते हैं. इन्होंने हाल ही में अपनी नई सेंट्रिस्ट पार्टी ‘याशार’ (यानी ईमानदार) की औपचारिक शुरुआत की है और पार्टी लांच करते ही बेंजामिन नेतन्याहू पर हमला बोल दिया है.
गादी आइजनकोट ने 30 जून को पार्टी लॉन्च करते हुए कहा, “इस बार जिम्मेदारी हम पर है. क्या हम उस आपदा को नजरअंदाज करेंगे जो हमारे ऊपर आई है? क्या हम लगातार विभाजन स्वीकार करते हुए अगली आपदा की ओर बढ़ेंगे? या हम खुद को ठीक करेंगे और देश को फिर से बनाएंगे?”
बता दें कि अक्टूबर 2023 के हमास हमले और उसके बाद की जंग में आइजनकोट ने अपना 25 वर्षीय बेटा गल मेयर आइजनकोट खो दिया था. उनके दो भतीजे भी इस युद्ध में शहीद हो गए थे. इन व्यक्तिगत नुकसानों ने न केवल इजरायली जनता के बीच खासा लोकप्रिय बना दिया बल्कि लोगों की संवेदनाएं भी उनसे जुड़ गईं. लोग उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखते हैं, जो युद्ध की कीमत समझता है.
40 साल तक संभाली डिफेंस फोर्स की कमान आइजनकोट 40 साल तक इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) में रहे हैं और 2015 से 2019 तक सेना प्रमुख रहे हैं. वे एक कामकाजी परिवार से आते हैं और नेतन्याहू से बिल्कुल अलग छवि रखते हैं. विश्लेषकों का कहना है कि आइजनकोट पारंपरिक राजनेता जैसे नहीं लगते. वे न तो विभाजनकारी हैं और न ही पॉपुलिस्ट. वे देश को एकजुट करने की बात करते हैं. उन्होंने बहुत कुछ झेला है.
नेतन्याहू से हुआ था मतभेद आइजनकोट ने 2024 में नेतन्याहू की युद्ध कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री के पास गाजा के लिए कोई साफ रणनीति नहीं है. उन्होंने कहा कि युद्ध में मिली कुछ सफलताओं को गलती से हमास को खत्म करने का फैसला समझ लिया जा रहा है.
सुरक्षा के मामलों में स्पष्ट और सख्त आइजनकोट देश और देशवासियों की सुरक्षा के मामले में काफी सख्त हैं. उन्होंने फिलिस्तीनी राज्य की मांग को ‘अप्रासंगिक’ बताया है. वे लेबनान और ईरान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हैं. वे ‘दाहिया सिद्धांत’ के समर्थक हैं, जिसमें दुश्मन के इलाकों में भारी और विनाशकारी जवाबी कार्रवाई की जाती है. वे एक कट्टर सैनिक की छवि वाले नेता हैं.
उनकी पार्टी का एजेंडा क्या है? उनकी पार्टी ‘याशार’ मध्यमार्गी है. इसका एजेंडा एकदम साफ है. देश की सुरक्षा मजबूत करना, उत्तरी और दक्षिणी इलाकों का पुनर्निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर निवेश, और 7 अक्टूबर की असफलताओं की जांच के लिए राज्य आयोग का गठन. उन्होंने ‘सभी के लिए सेवा’ का नारा दिया है, जिसका मतलब अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों और अरब नागरिकों के लिए भी अनिवार्य सैन्य सेवा है.
चुनाव में कैसा रुझान चुनावी सर्वे और रुझानों में देखा जा रहा है कि आइजनकोट की पार्टी काफी मजबूत है और नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के बाद दूसरे नंबर पर दिख रही है. हालांकि दोनों को अकेले बहुमत मिलने की संभावना कुछ कम है. इजरायल की राजनीति में गठबंधन बहुत महत्वपूर्ण है. आइजनकोट विभिन्न दलों के साथ गठबंधन बनाकर सरकार बनाने की बेहतर स्थिति में हो सकते हैं.
तीसरी चुनौती भी सामने है भले ही आइजनकोट पूरी तरह नेतन्याहू को घेरने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनके सामने एक चुनौती पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के चुनावी दौड़ में शामिल होने से भी पैदा हुई है. इजरायल में चुनाव अभी घोषित नहीं हुए हैं, संभवतः अक्टूबर तक हो सकते हैं. नेतन्याहू अभी भी मजबूत हैं और उन्होंने भी आइजनकोट पर हमला बोलना शुरू कर दिया है.
ऐसे में देखना होगा कि गादी आइजनकोट नेतन्याहू की जमीन को कितना खिसका पाते हैं और अपनी जगह सत्ता में बना पाते हैं या नहीं.



