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Last Updated:July 06, 2026, 17:03 IST

Khedapati Balaji Temple : राजस्थान के सीकर जिले के दांता स्थित श्री खेड़ापति बालाजी मंदिर को महाभारत काल से जुड़ा प्राचीन आस्था स्थल माना जाता है. मान्यता है कि वनवास के दौरान पांडवों ने यहां यज्ञ किया था और भीम ने स्वयं प्रकट हुई हनुमान जी की प्रतिमा को जमीन से निकालकर स्थापित किया. मंदिर की आरती में आज भी युधिष्ठिर और भीम का नाम लिया जाता है. यहां से जुड़ी चमत्कारिक घटनाएं और सदियों पुरानी परंपराएं इसे श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बनाती हैं.

सीकर. राजस्थान के सीकर जिले के दांता कस्बे में महाभारत कालीन भगवान हनुमान का हज़ारो साल पुराना एक प्राचीन मंदिर मौजूद है. इस मंदिर को ग्राम देवता के रूप में पूजा जाता है. इस प्राचीन मंदिर को श्री खेड़ापति बालाजी मंदिर के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर का इतिहास पांडवों से जुड़ा हुआ है. मंदिर के पुजारी ने बताया कि वनवास काल के दौरान पांडव पांडुपोल अलवर, लोहार्गल, पंचगिरी, दांता सहित कई स्थानों पर आए थे. उन्होंने बताया कि पांडवों ने वनवास काल में वर्तमान श्री खेड़ापति बालाजी मंदिर की जगह पर अपने गुरु द्रोणाचार्य के सानिध्य में यज्ञ किया था. उस समय ये मूर्ति जमीन से स्वयं प्रकट हुई थी, जिसे भीम ने 5 हाथ खोदकर निकाला था. बालाजी महाराज के आदेश से इसे यहीं स्थापित कर दिया गया. बताया जाता है कि वनवास से लेकर युद्ध तक हनुमानजी (खेड़ापति बालाजी) उनके साथ रहे. खास बात ये है कि भगवान हनुमान की इस मूर्ति के एक तरफ सूरज है और दूसरी तरफ चांद है, जो इसे अन्य प्रतिमाओं से अलग बनाती है.

मंदिर के पुजारी ने बताया कि श्री खेड़ापति बालाजी की होने वाली सुबह व शाम आरती में युधिष्ठिर व भीम का नाम लिया जाता है. यहां जात-जड़ले करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. यहां साधु-महात्माओं ने अपने तपोबल व यज्ञ से इस जगह को पवित्र बनाया है. दांतारामगढ़ क्षेत्र की महान संत परमहंस बाबा परमानंदजी के भी आराध्य देव श्री खेड़ापति बालाजी ही थे.  वे घंटों तक यहां परिक्रमा करते, मान्यता है कि बाबा परमानंद बालाजी महाराज से साक्षात वार्तालाप करते रहते थे. यहां सन 1930 से 93 वर्षों से आश्विन व चैत्र नवरात्रों में अखंड पारायण संघ दांता के तत्वावधान में अखंड पारायण के पाठ होते हैं. 31 दिसंबर 2017 से यहां प्रतिदिन अखंड पारायण पाठ शुरू किया गया था, जो लगाकार चल रहा है. प्रत्येक शनिवार व मंगलवार को बालाजी का विशेष श्रृंगार होता है.

ठाकुर गंगासिंह को दिखाया चमत्कार बताया जाता है कि जब मंदिर में परकोटे का निर्माण चल रहा था, तब पूर्व व दक्षिण दिशा का परकोटा कोने में पांच फीट कम रहने से आयताकार नहीं हो रहा था, इसलिए कोने में पांच फीट राज की जमीन पर नींव खोद दी गई. इसकी शिकायत चौबदार ने गढ़ में जाकर ठाकुर गंगासिंह से कर दी. ठाकुर ने पुजारी  मोहनलाल को बुलाया और नींव हटाने को कहा, उन्होंने दंड के रूप में 11 रुपए ले लिए. पुजारी घर नहीं गए. वे सीधे बालाजी के दरबार में अनुष्ठान में बैठ गए. रात को 12 बजे घोड़ों के अस्तबल में सात बरामदों की पट्टियां टूटकर गिर गई. चमत्कार यह हुआ कि जिनमें घोड़े बंधे थे, वे सही-सलामत रही. जिनमें घोड़े नहीं बंधे थे, उन सात बरामदों की पट्टियां टूटकर गिर गई. ठाकुर गंगासिंह ने सुबह पुजारी को गढ़ में बुलाया, उन्होंने अपनी गलती का पश्चाताप किया. उन्होंने दंड के 11 रुपए वापस किए और 11 रुपए प्रसाद चढ़ाने के लिए भी दिए. उन्होंने नींव खोदने के लिए जमीन की छूट दे दी. इसके बाद उन्होंने गेट के दोनों तरफ शेर बनवाए.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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