Rajasthan

Jyoti Murder Case: तलाक की चाह बनी मौत की वजह! अजमेर के सनसनीखेज हत्याकांड में पति और पहली पत्नी को उम्रकैद

Last Updated:July 07, 2026, 18:27 IST

Jyoti Murder Case: अजमेर के चर्चित ज्योति हत्याकांड में एडीजे-3 न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पति राजन केसरी और उसकी पहली पत्नी शालू केसरी को हत्या का दोषी करार दिया है. दोनों को आजीवन कारावास की सजा के साथ 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. वर्ष 2017 में हुई इस सनसनीखेज हत्या में पुलिस जांच के दौरान साजिश, फरारी और कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे.

अजमेर के ज्योति हत्याकांड में पति- पत्नी को उम्रकैद, 9 साल बाद आया फैसलाZoom

अजमेर. बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड मामले में एडीजे-3 न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी पति राजन केसरी और उसकी पहली पत्नी शालू केसरी को हत्या का दोषी करार दिया है. न्यायालय ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. यह मामला वर्ष 2017 का है, जब 24 मई को कृष्णगंज थाना पुलिस को ईदगाह रोड स्थित एक किराए के मकान में महिला ज्योति की हत्या की सूचना मिली थी. आसपास के लोगों ने कमरे से तेज बदबू आने के बाद पुलिस को जानकारी दी थी. मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू की तो कमरे में ज्योति का शव बरामद हुआ.

पुलिस जांच में सामने आया कि उत्तर प्रदेश निवासी राजन केसरी अपनी दूसरी पत्नी ज्योति को अजमेर लेकर आया था. पुलिस के अनुसार राजन और उसकी पहली पत्नी शालू केसरी ने मिलकर ज्योति की हत्या की साजिश रची थी. आरोप था कि दोनों ने पहले ज्योति के सिर पर पत्थर से हमला किया और बाद में चाकू से गला रेतकर उसकी हत्या कर दी.

तलाक लेने की इच्छा बनी हत्या की वजह

जांच में पुलिस ने बताया कि ज्योति अपने पति राजन और शालू से अलग होकर तलाक लेना चाहती थी. इसी बात को लेकर दोनों आरोपियों ने उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई. हत्या के बाद राजन ज्योति से हुई बच्ची को अपने साथ लेकर फरार हो गया था. घटना के करीब तीन दिन बाद किराए के कमरे से बदबू आने पर स्थानीय लोगों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी. कृष्णगंज थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया.

अभियोजन ने पेश किए मजबूत साक्ष्य

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के सामने 37 गवाहों के बयान दर्ज करवाए. इसके अलावा 97 महत्वपूर्ण दस्तावेज भी पेश किए गए. अभियोजन ने इन साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला साबित करने का प्रयास किया. सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद एडीजे-3 न्यायालय ने राजन केसरी और शालू केसरी को हत्या का दोषी माना. न्यायालय ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. फैसले के बाद वर्ष 2017 के इस चर्चित हत्याकांड में करीब नौ साल बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी हुई.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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