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सरकारी नौकरी वाली दुल्हन, बेरोजगार दूल्हा… खाटूश्यामजी के भक्त ने पेश की मिसाल, दहेज में लिया सिर्फ 1 रुपया

Last Updated:July 08, 2026, 14:43 IST

Sikar News: खाटूश्यामजी के मदनी गांव के बुरानिया परिवार ने दहेज मुक्त विवाह कर समाज में नई मिसाल कायम की है. अर्जुनराम बुरानिया ने अपने बेटे सुभाष की शादी महज एक रुपये और एक नारियल के शगुन में की. वधू सरोज राजस्थान पुलिस में कार्यरत हैं. परिवार पहले भी अपनी बेटियों की शादी सादगी से कर चुका है. उनका मानना है कि दहेज नहीं, बल्कि शिक्षा और संस्कार ही असली धन है. यह शादी सामाजिक कुरीतियों को मिटाने की दिशा में एक प्रेरक कदम बनी है. (494 characters)

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दुल्हन सरकारी नौकरी में, दूल्हा बेरोजगार.. खाटूश्यामजी के भक्त ने पेश की मिसालZoomदहेज मुक्त शादी: खाटूश्यामजी में पुलिस अफसर बहू और बेरोजगार दूल्हे की अनोखी पहल

Sikar News: खाटूश्यामजी के मदनी गांव से एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने विवाह के नाम पर होने वाली फिजूलखर्ची और दहेज जैसी कुरीतियों के विरुद्ध एक नया मार्ग प्रशस्त किया है. राजस्थान पुलिस में कार्यरत बहू सरोज और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे दूल्हे सुभाष बुरानिया का विवाह समाज के लिए एक आदर्श बन गया है. इस विवाह में न तो दहेज की भारी मांग थी और न ही दिखावे का कोई आडंबर. यह विवाह इस बात का प्रमाण है कि वैवाहिक रिश्ते पैसों के लेन-देन से नहीं, बल्कि आपसी समझ और संस्कारों की नींव पर टिके होते हैं.

इस विवाह समारोह की सबसे बड़ी विशेषता इसका सादगी भरा स्वरूप था. जहां आजकल शादियों में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं और दहेज की लंबी-चौड़ी लिस्ट तैयार की जाती है, वहीं बुरानिया परिवार ने केवल एक रुपये का सिक्का और एक नारियल भेंट स्वरूप स्वीकार किया. दुल्हन सरोज जो स्वयं एक सरकारी नौकरी में है, ने एक बेरोजगार दूल्हे के साथ विवाह कर यह संदेश दिया कि पद या आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर एक-दूसरे का सम्मान करना और जीवन के सफर में साथ देना ही विवाह का मूल उद्देश्य है.

संस्कार और शिक्षा: असली पूंजीबुरानिया परिवार ने दहेज को पूरी तरह से नकार कर समाज को एक कड़ा संदेश दिया है. दूल्हे के भाई डॉ. युद्धवीर सिंह बुरानिया ने बताया कि उनका परिवार बाबा श्याम का अनन्य भक्त है और उनका मानना है कि बाबा की कृपा से उनके पास सब कुछ है. यह इस परिवार की परंपरा रही है, इससे पूर्व परिवार की बेटियों डॉ. सुमन और डॉ. प्रियंका के विवाह भी बिना किसी दहेज के संपन्न हुए थे. परिवार का स्पष्ट मानना है कि दहेज की मांग करना कमजोरी की निशानी है, जबकि उच्च शिक्षा और अच्छे संस्कार ही असली धन हैं. यह पहल उन परिवारों के लिए एक सबक है जो अपनी प्रतिष्ठा को धन से तौलते हैं. खाटूश्यामजी जैसे आस्था के केंद्र के समीप हुई यह शादी साबित करती है कि यदि इरादे नेक हों, तो समाज की पुरानी कुरीतियों को आसानी से मिटाया जा सकता है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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