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बारिश के मौसम में सर्दी जुकाम से बचना है? तुलसी, अदरक, हल्दी और आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से बनाएं ये 5 असरदार काढ़े

Ayurvedic Kadha Recipe: बारिश का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं, नमी और मौसम में लगातार बदलाव लेकर आता है. ऐसे समय में कई लोगों को गले में खराश, हल्की सर्दी, खांसी, पाचन की परेशानी या शरीर में सुस्ती महसूस होने लगती है. यही वजह है कि हमारे घरों में पीढ़ियों से काढ़ा बनाने की परंपरा चली आ रही है. तुलसी, अदरक, काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, हल्दी और दूसरी आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को पानी में धीमी आंच पर पकाकर तैयार किया गया काढ़ा स्वाद के साथ गर्माहट भी देता है. इन चीजों में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और कई पौधों से मिलने वाले तत्व पाए जाते हैं, जो सामान्य स्वास्थ्य को सहारा देने में मदद कर सकते हैं. हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि काढ़ा किसी बीमारी का इलाज नहीं है और गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.

तुलसी और अदरक का काढ़ातुलसी और अदरक का काढ़ा सबसे ज्यादा लोकप्रिय माना जाता है. इसे बनाने के लिए 10 से 12 तुलसी की पत्तियां, एक इंच कुटा हुआ अदरक, चार काली मिर्च, एक छोटा टुकड़ा दालचीनी, दो लौंग और दो कप पानी लें. सबसे पहले पानी को उबालें. अब इसमें सभी सामग्री डालकर 10 से 15 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं. इसके बाद काढ़े को छान लें. अगर चाहें तो थोड़ा ठंडा होने के बाद एक चम्मच शहद मिला सकते हैं. यह काढ़ा बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है.

हल्दी और काली मिर्च वाला काढ़ाहल्दी और काली मिर्च का काढ़ा भी बदलते मौसम में काफी लोकप्रिय है. इसे बनाने के लिए आधा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच कुटी हुई काली मिर्च, एक इंच अदरक, एक छोटा टुकड़ा दालचीनी और दो कप पानी लें. सभी चीजों को पानी में डालकर करीब 12 से 15 मिनट तक उबालें. फिर छानकर गर्मागर्म पिएं. चाहें तो थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं.

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लौंग और दालचीनी का हर्बल काढ़ाअगर आपको मसालों की खुशबू पसंद है, तो लौंग और दालचीनी का काढ़ा अच्छा विकल्प हो सकता है. इसके लिए चार लौंग, एक छोटा टुकड़ा दालचीनी, दो हरी इलायची, एक इंच अदरक और दो कप पानी लें. पहले साबुत मसालों को हल्का कूट लें. फिर इन्हें पानी में डालकर करीब 15 मिनट तक पकाएं. छानने के बाद इसे गर्म ही पिएं. इसकी खुशबू और स्वाद दोनों काफी अच्छे लगते हैं.

मुलेठी और तुलसी का काढ़ामुलेठी का इस्तेमाल लंबे समय से पारंपरिक घरेलू नुस्खों में किया जाता रहा है. इस काढ़े के लिए एक चम्मच मुलेठी के टुकड़े, 10 तुलसी की पत्तियां, एक इंच अदरक, पांच काली मिर्च और दो कप पानी लें. सभी चीजों को पानी में डालकर लगभग 15 मिनट तक उबालें. इसके बाद छानकर तुरंत पी लें. अगर आपको पहले से कोई बीमारी है या दवा चल रही है, तो मुलेठी का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा.

नीम और हल्दी का काढ़ानीम का स्वाद कड़वा जरूर होता है, लेकिन कई लोग इसे पारंपरिक आयुर्वेदिक पेय के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इसके लिए पांच से छह साफ नीम की पत्तियां, आधा चम्मच हल्दी, एक इंच अदरक, चार काली मिर्च और दो कप पानी लें. सभी सामग्री को 12 से 15 मिनट तक उबालें. फिर छानकर गर्म ही पिएं. यह काढ़ा हल्का कड़वा होता है, इसलिए हर किसी को इसका स्वाद पसंद आए, यह जरूरी नहीं है.

काढ़ा बनाते समय इन बातों का रखें ध्यानकाढ़ा हमेशा ताजा बनाकर ही पीना बेहतर माना जाता है. जरूरत से ज्यादा मसाले डालने से स्वाद खराब हो सकता है और कुछ लोगों को पेट में जलन भी हो सकती है. अगर आप शहद मिलाना चाहते हैं, तो काढ़ा थोड़ा ठंडा होने के बाद ही मिलाएं. बहुत गर्म काढ़े में शहद नहीं डालना चाहिए. गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों या पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को नियमित रूप से काढ़ा पीने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

संतुलित मात्रा में ही करें सेवनआयुर्वेदिक काढ़ा बदलते मौसम में शरीर को गर्माहट देने और सामान्य स्वास्थ्य को सहारा देने वाला पारंपरिक पेय है. लेकिन इसका ज्यादा मात्रा में सेवन करना सही नहीं माना जाता. इसे संतुलित मात्रा में और जरूरत के अनुसार ही पीना चाहिए. साथ ही अच्छी नींद, संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और साफ सफाई जैसी आदतें भी मौसमी बीमारियों से बचाव में उतनी ही जरूरी हैं. अगर सर्दी, खांसी, बुखार या कोई दूसरी परेशानी लंबे समय तक बनी रहे, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

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