जहां हर मन्नत पर चढ़ती है घंटी! भरतपुर के इस माता मंदिर में डकैत भी टेकते थे माथा

Last Updated:July 09, 2026, 13:03 IST
Ambika Mata temple history and facts in Bharatpur: भरतपुर के कोट गांव (प्राचीन नाम कुंडलपुर) की पहाड़ी पर स्थित प्राचीन अंबिका माता मंदिर भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है. यहाँ मन्नत पूरी होने पर घंटी चढ़ाने की अनोखी परंपरा है, जिसके कारण परिसर में हजारों घंटियां मौजूद हैं. स्थानीय निवासी जयप्रकाश शर्मा के अनुसार, यह मंदिर सदियों पुराना है और किसी समय डकैत भी यहाँ आकर माता की पूजा करते थे. नवरात्र के समय यहाँ माता के दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ती है.
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Bharatpur: भरतपुर जिले के कोट गांव की पहाड़ी पर स्थित अंबिका माता मंदिर क्षेत्र के लोगों के लिए अगाध आस्था और अटूट विश्वास का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है. ऊंचाई पर विराजमान यह मंदिर न सिर्फ अपने धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, बल्कि इससे जुड़ी सदियों पुरानी मान्यताएं और अनोखा इतिहास इसे और भी खास बनाते हैं. दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ माता के दरबार में मत्था टेकने और अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं.
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, अंबिका माता के इस मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद अवश्य पूरी होती है. यहाँ की एक विशेष परंपरा है कि जब भी किसी भक्त की कोई इच्छा पूर्ण होती है, तो वह माता के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए दरबार में घंटी चढ़ाता है. इसी अनूठी परंपरा के चलते आज मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में छोटी-बड़ी घंटियां बंधी हुई नजर आती हैं. इन घंटियों की गूंज से पूरा पहाड़ी वातावरण हर समय भक्तिमय बना रहता है और यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु को एक अद्भुत आध्यात्मिक शांति का अहसास होता है.
कुंडलपुर था कोट गांव का पुराना नामइतिहास की बात करें तो कोट गांव का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व लंबे समय से बना हुआ है. स्थानीय बुजुर्गों और इतिहास के जानकारों के अनुसार, कोट गांव का प्राचीन नाम कुंडलपुर हुआ करता था. गांव के स्थानीय निवासी जयप्रकाश शर्मा बताते हैं कि यह मंदिर बेहद प्राचीन है और पीढ़ियों से लोग यहाँ अपनी कुलदेवी और आराध्य के रूप में आस्था व्यक्त करते आ रहे हैं. पहाड़ी पर स्थित होने के कारण इस मंदिर तक पहुंचना अपने आप में एक ट्रैकिंग और प्रकृति के बीच से गुजरने जैसा विशेष अनुभव प्रदान करता है.
जब यह क्षेत्र था डकैतों का गढ़, माता के आगे झुकते थे बागीइस मंदिर के इतिहास से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प और अनोखी कहानी भी काफी प्रचलित है. स्थानीय लोगों के अनुसार, एक समय यह पूरा पहाड़ी और बीहड़ क्षेत्र डकैतों का मुख्य गढ़ हुआ करता था. दुर्गम पहाड़ी इलाका होने की वजह से डकैत अक्सर पुलिस से बचने के लिए यहाँ शरण लेते थे. लेकिन सबसे खास बात यह रही कि समाज और कानून से भागे ये डकैत भी अंबिका माता के प्रति गहरी आस्था रखते थे. बताया जाता है कि कोई भी बड़ा कदम उठाने या अपने किसी कार्य पर जाने से पहले डकैत यहाँ आकर माता की विशेष पूजा-अर्चन करते थे और उनका आशीर्वाद लिया करते थे.
नवरात्र में उमड़ता है आस्था का सैलाबआज के समय में यह मंदिर न केवल कोट गांव के ग्रामीणों बल्कि आसपास के कई जिलों के लोगों के लिए भी श्रद्धा का बड़ा केंद्र है. सामान्य दिनों के अलावा विशेष रूप से चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यहाँ पैर रखने की भी जगह नहीं होती है. भक्तजन माता के जयकारों के साथ ऊंची पहाड़ी की सीढ़ियां चढ़कर मंदिर पहुंचते हैं और अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं. अंबिका माता मंदिर आस्था, इतिहास, प्राकृतिक सुंदरता और लोक परंपराओं का एक अद्भुत संगम है, जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Location :
Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan



