ये है देश का सबसे खुशहाल गांव, स्वर्ग जैसा सुंदर, देश-विदेश से सुकून की तलाश में आते हैं लोग

Last Updated:July 09, 2026, 14:57 IST
Devmali Village Rajasthan : शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से जब मन ऊब जाता है तो लोग सुकून की तलाश में गांव जाते हैं. यह अलग बात है कि दूर-दराज क्षेत्र में कुछ ही गांव ऐसे बचे हैं जहां पर सुख-सुविधा की चीजें ना पहुंची हों. गांवों का तेजी से हो रहे शहरीकरण के बीच एक गांव ऐसा भी जिसकी गिनती देश के सबसे खूबसूरत गांव में होती है. केंद्र सरकार इस गांव को बेस्ट विलेज के खिताब से नवाज चुकी है. इसे देश का सबसे खुशहाल गांव भी कहा जाता है. इस गांव में 500-700 पुराने मकान हैं. देश-विदेश से टूरिस्ट इस गांव की संस्कृति-परंपराओं को देखने के लिए आते हैं.
शहरों की भागदौड़ भरी जिंदगी सुख-सुविधा तो देती है लेकिन सुकून नहीं दे पाती. ऐसे में सुकून की तलाश में लोग अक्सर गांव घूमने जाते हैं. देश में एक गांव ऐसा भी है जिसे ‘सबसे खुशहाल’ कहा जाता है. यह गांव अपनी अनूठी मान्यताओं और सदियों पुरानी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है. केंद्र सरकार से इसे ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज’ का खिताब भी मिल चुका है. इस गांव का नाम देवमाली है जो कि राजस्थान के ब्यावर जिले में स्थित है. पहले ब्यावर अजमेर जिले में आता था, अब जिला बना दिया गया है. गांव अजमेर जिले के बिजयनगर कस्बे के पास में बसा हुआ है. बॉलीवुड सुपर स्टार अक्षय कुमार की फिल्म जॉली एलएलबी 3 की शूटिंग भी इस गांव में हो चुकी है. इस गांव की परंपराएं बहुत खास हैं. आइये जानते हैं इन बारे में…..
राजस्थान का देवमाली गांव पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर चुका है. यह गांव कलयुग में सतयुग का अहसास कराता है. यह गांव अजमेर से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. पूरे गांव में एक भी पक्का मकान नहीं है यानी पूरा गांव में सिर्फ कच्चे मकान है. गरीब हो या करोड़पति सभी कच्चे मकान में रहते हैं. गांव में मांस-शराब का प्रयोग भी नहीं होता है. प्राचीन रहन-सहन के लिए गांव जाना जाता है. गांव के अंदर की कुछ सड़कें जरूर पक्की बन गई हैं. गांव में पंचायत भी है जिसमें 9 अन्य गांव शामिल हैं. गांव में पोस्ट ऑफिस है, वो भी कच्चे घर में है. गांव में 500-700 साल से भी ज्यादा पुराने मकान हैं.
पोस्टमैन के मुताबिक, ‘हमारे पूर्वजों और देवनारायण भगवान के बीच एक समझौता हुआ. देवनारायण भगवान ने कहा कि या तो आप पक्के में रह लें या फिर मैं रह लेता हूं. ऐसे में हमारे पूर्वजों ने कच्चे घर में रहने का वचन दिया. पूरा गांव एक ही गोत्र-वंश का है. गुर्जर समुदाय लावड़ा गोत्र के लोग यहां रहते हैं. 4000 बीघा जमीन है गांव के इस परिवार की है लेकिन बंटवारा नहीं हुआ है. यानी एक ही खाता है. वो खाता भगवान देवनारायण मंदिर के नाम पर है. गांव के लोगों के नाम जमीन नहीं है इसलिए ग्रामीणों को कई सरकारी सुविधाएं नहीं मिल पातीं.’
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गांव में देवनारायण भगवान का मंदिर है. देवनारायण भगवान को विष्णु का अवतार माना जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि देवनारायण भगवान इस गांव में 11वीं सदी के आसपास आए. गांव का नाम भगवान देवनारायण के नाम पर देवमाली रखा गया. मंदिर के पास स्थित तालाब का नाम भी देवसागर रखा गया. पूरे गांव की चट्टाने भगवान देवनारायण की ओर झुकी हुई हैं. एक खास दिशा में. सिर्फ एक चट्टान नहीं झुकी जिसे गांव के लोग उपड़िया महाराज कहते हैं. साल में एक बार गांव के लोग इनकी पूजा करते हैं. यह चट्टान गांव के दूसरे ओर है.
गांव में शराब-केरोसिन (मिट्टी का तेल) पर प्रतिबंध है. महिलाएं चूल्हे पर खाना बनाना पसंद करती हैं. गैस चूल्हे का प्रयोग करने से यहां के लोग कतराते हैं. गांव में शादी-विवाह, उत्सव में लोग गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं लेकिन गांव के बाहर ऐसी चीजों को रखते हैं. एक और खास बात यह है कि गांव की लकड़ी और पहाड़ (पत्थर) किसी दूसरे गांव नहीं ले जा सकते. गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय पशुपालन-दुग्ध उत्पादन है. गांव के लोग जमीन को नहीं बेच सकते. वैसे भी पूरी जमीन भगवान देवनारायण के नाम पर है.
पुरानी संस्कृति को करीब से देखने के लिए देश-विदेश से टूरिस्ट इस गांव में आते हैं. पूरे गांव में सिर्फ एकमात्र कुआं है. पूरा गांव एक ही परिवार से संबंध रखता है. गांव की महिलाएं खेती-बाड़ी में सहयोग करती हैं. गांव की आधी जमीन देवनारायण भगवान के नाम है. आधी जमीन पर पूरा गांव खेती करता है. गांव को लेकर एक और अनोखी बात यह है कि पड़ोस गांव की लड़कियां यहां शादी के लिए इनकार नहीं कर पातीं.
गांव में सौहार्द्र-भाईचारे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के रहवासियों में कभी कोई विवाद नहीं हुआ. थाने में इस गांव की कोई एफआईआर नहीं है. गांव के लोग मिलकर बैठकर फैसले लेते हैं. गांव के कई परिवारों ने अपने घरों के कमरों का रंग-रोगन कर लिया है. देश-विदेश से आने वाले टूरिस्ट के लिए यहां पर कमरे, रहना-खाने की सुविधा मिल जाती है. यहां पर एक रात का किराया 200 रुपये (खान-रहना) के करीब है.
इसी गांव में जॉली एलएलबी 3 की शूटिंग भी हुई थी. अक्षय कुमार ने अपने एक इंटरव्यू में देवमाली गांव के बारे में कहा था, ‘देवमाली में एक किसान के घर पर मैं गया. चाय पी. मैंने देखा कि उनका मकान बहुत छोटा है. छोटे-छोटे कमरे हैं लेकिन उनके चेहरों पर इतनी खुशी थी कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.’ कई ग्रामीणों का कहना है कि अक्षय कुमार की टीम ने पूरे गांव की लड़कियों के बैंक अकाउंट खुलवाए थे. हर अकाउंट में 1000 रुपये जमा कराए थे.
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