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ट्यून बजाते ही गीतकार ने बिना रुके लिख डाला गाना, देखते रह गए दिग्गज संगीतकार, 46 साल बाद भी है तरोताजा

Last Updated:July 09, 2026, 16:13 IST

Song: बॉलीवुड हो या साउथ सिनेमा, कई ऐसे सदाबहार गाने हैं जो दशकों बाद भी लोगों की जुबान पर हैं. इन गीतों की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उनका संगीत नहीं, बल्कि ऐसे बोल हैं जो सीधे दिल में उतर जाते हैं. अकसर एक सुपरहिट गाने के पीछे घंटों, दिनों या महीनों की मेहनत छिपी होती है, लेकिन कभी-कभी कुछ रचनाएं पलभर में इतिहास बन जाती हैं. ऐसा ही एक किस्सा 46 साल पुराने एक क्लासिक गीत से जुड़ा है, जब एक दिग्गज संगीतकार ने धुन सुनाई और सामने बैठे मशहूर गीतकार ने बिना रुके उसी वक्त पूरा गाना लिखना शुरू कर दिया. कौन सी है ये फिल्म और कौन सा है ये गाना चलिए बताते हैं…

नई दिल्ली. ‘लग जा गले’, ‘एक प्यार का नगमा है’, ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा’, ‘कल हो ना हो’ और ‘तुझ में रब दिखता है’ जैसे गाने वक्त के साथ पुराने जरूर हुए, लेकिन उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है. ऐसे सदाबहार गीत सिर्फ मधुर धुनों की वजह से नहीं, बल्कि दिल छू लेने वाले बोलों के कारण भी पीढ़ियों तक याद रखे जाते हैं.हालांकि, हर सुपरहिट गाने के पीछे लंबी मेहनत की कहानी नहीं होती. 46 साल पहले एक ऐसा गीत भी बना था, जब दिग्गज संगीतकार ने सिर्फ धुन सुनाई और सामने बैठे मशहूर गीतकार ने बिना रुके शब्दों की ऐसी बारिश कर दी कि पलभर में एक अमर गीत जन्म ले गया. आज भी यह गाना संगीत प्रेमियों की पहली पसंद बना हुआ है.

दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा और महान गीतकार कन्नदासन की जोड़ी ने तमिल सिनेमा को कई यादगार गीत दिए हैं. इन्हीं में से एक हैं 1979 में रिलीज हुई फिल्म ‘निरमा मारुम पूक्कल’ का सुपरहिट गीत ‘आयिरम मलारगले मलरुंगल’, जिसे आज भी संगीत प्रेमी बेहद पसंद करते हैं. इस गीत के बनने से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा खुद इलैयाराजा ने एक कार्यक्रम के दौरान शेयर किया था.

<br />इलैयाराजा ने बताया कि उस समय उनके पास गीत तैयार करने के लिए ज्यादा समय नहीं था. क्योंकि उन्हें री-रिकॉर्डिंग भी करनी थी. निर्देशक भारतीराजा ने उन्हें सिर्फ गाने का सिचुएशन समझाया था. इसके बाद उन्होंने गीत लिखने के लिए कन्नदासन को बुलाया.

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संगीतकार के मुताबिक, जब कन्नदासन पहुंचे तो उन्होंने सबसे पहले पूछा कि धुन तैयार है या नहीं. इलैयाराजा ने जैसे ही धुन सुनाई, कन्नदासन ने बिना किसी लंबी सोच-विचार के तुरंत पहली पंक्ति ‘आयिरम मलरगले मलरुंगल’ लिख दी. इलैयाराजा ने बताया कि उन्हें पहले लगा कि यह शब्द धुन पर कैसे फिट होंगे, लेकिन जब उन्होंने गाकर देखा तो सब कुछ बिल्कुल सटीक बैठ गया.

उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद वह जैसे-जैसे धुन बजाते गए, कन्नदासन वैसे-वैसे बिना रुके गीत की पंक्तियां लिखते गए. इलैयाराजा ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि कन्नदासन गीत लिखने के लिए रुककर सोचते नहीं थे, बल्कि जिस सहजता से वह संगीत तैयार करते थे. उसी तरह कन्नदासन भी शब्दों की बारिश कर देते थे. यही उनकी सबसे बड़ी खूबी थी.

फिल्म ‘निरम मारुम पूक्कल’ का निर्देशन भारतीराजा ने किया था. इसमें सुधाकर, राधिका और विजयन मुख्य भूमिकाओं में थे. फिल्म का संगीत इलैयाराजा ने तैयार किया था, जबकि इस सदाबहार गीत को मलेशिया वासुदेवन, शैलजा और जेंसी ने अपनी आवाज दी थी. रिलीज के दशकों बाद भी यह गीत तमिल सिनेमा के सबसे लोकप्रिय क्लासिक गानों में गिना जाता है.

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