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डिस्लेक्सिया से जंग, पढ़ाई में कमजोर, आज सबसे चर्चित डायरेक्टर्स में शामिल, चौंकाएगी आदित्य धर की ये कहानी

Last Updated:July 10, 2026, 10:16 IST

Aditya Dhar Struggle Story: हर इंसान की जिंदगी में कुछ ऐसी चुनौतियां होती हैं, जो उसके सपनों का रास्ता रोकती नजर आती हैं. लेकिन कुछ लोग वही चुनौतियां अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लेते हैं. आदित्य धर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. बचपन में पढ़ाई उनके लिए किसी जंग से कम नहीं थी. शब्दों को समझना और किताबों से दोस्ती करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी अपनी कमजोरी को अपनी पहचान नहीं बनने दिया. उन्होंने दुनिया को यह साबित कर दिया कि सफलता सिर्फ अच्छे नंबरों या आसान रास्तों से नहीं मिलती, बल्कि अटूट हौसले, मेहनत और अपने हुनर पर भरोसा रखने से मिलती है. मुश्किलों के आगे हार मानने के बजाय आदित्य ने अपने सपनों को थामे रखा और उसी जुनून ने उनकी किस्मत बदल दी.

नई दिल्ली. कभी किताबों के जो धुंधले अक्षर एक मासूम बच्चे के लिए सबसे बड़ा डर और नाकामी का ठप्पा बन गए थे. आज उसी लड़के ने अपनी कल्पना की स्याही से भारतीय सिनेमा का सबसे सुनहरा इतिहास लिख दिया है. गंभीर ‘डिस्लेक्सिया’ के दर्द से जूझने वाले आदित्य धर के लिए बचपन में पढ़ाई एक रोज की जंग जैसी थी, जहां दुनिया उन्हें कमजोर मानकर दरकिनार कर चुकी थी. आज भी जिन्हें दो पन्ने पढ़ने में पूरा दिन लग जाता है, उन्होंने अपनी अटूट जिद के दम पर हार को कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया. फाइल फोटो. 

फिल्म इंडस्ट्री में जब भी किसी बड़ी ब्लॉकबस्टर या नए रिकॉर्ड की बात होती है तो अकसर बड़े-बड़े दिग्गजों के नाम सामने आते हैं. लेकिन आज भारतीय सिनेमा में निर्देशक आदित्य धर की चर्चा हर तरफ हो रही है. जिन्होंने न केवल बॉक्स ऑफिस के सारे समीकरण बदल दिए, बल्कि अपनी जिंदगी की एक ऐसी गंभीर कमजोरी को मात दी, जिसके बारे में सुनकर कोई भी घुटने टेक दे. यह कहानी है नेशनल फिल्म अवार्ड विजेता निर्देशक आदित्य धर की. जिन्होंने गंभीर ‘डिस्लेक्सिया’ जैसी बीमारी से जूझते हुए आज 3,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की ऐतिहासिक फ्रेंचाइजी खड़ी कर दी है. फाइल फोटो. 

आदित्य धर का बचपन आम बच्चों जैसा नहीं था. उन्हें स्कूल के दिनों में गंभीर एकेडमिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. वे ‘सीवियर डिस्लेक्सिया’ से पीड़ित थे, जिसके कारण उनके लिए पारंपरिक तरीके से पढ़ाई करना या किताबों के अक्षर समझना बेहद मुश्किल था. फाइल फोटो. 

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स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन के लिए रॉबिन भट्ट को दिए एक पुराने इंटरव्यू में आदित्य धर ने अपने इस दर्द को साझा करते हुए कहा था, ‘मेरा यहां होना किसी चमत्कार से कम नहीं है. मुझे यहां होना ही नहीं चाहिए था. मैं गंभीर रूप से डिस्लेक्सिया का शिकार था, मैं पढ़ नहीं सकता था. आज भी अगर मुझे पढ़ना हो, तो 2-3 पन्ने पढ़ने में मुझे लगभग पूरा दिन लग जाता है. मैं पढ़ाई में बहुत कमजोर था, लेकिन ड्रामा और नाटकों में मेरी दिलचस्पी बहुत गहरी थी.’ फाइल फोटो. 

<br />साल 2006 में आदित्य धर अपनी आंखों में ढेर सारे सपने लेकर मुंबई आए थे. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक असिस्टेंट निर्देशक के रूप में की. शुरुआत में उन्होंने ‘काबुल एक्सप्रेस’, ‘हाल-ए-दिल’ और ‘डैडी कूल’ जैसी फिल्मों के लिए गाने भी लिखे. इसके बाद उन्होंने अभिषेक पाठक और प्रियदर्शन जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया और ‘आक्रोश’ व ‘तेज’ जैसी फिल्मों के लिए डायलॉग भी लिखे. फाइल फोटो. 

संघर्ष के दिनों में उन्हें एक बड़ा झटका तब लगा, जब धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनने वाली उनकी पहली निर्देशित फिल्म ‘रात बाकी’ को किसी कारणवश बंद करना पड़ा. लेकिन आदित्य ने हार नहीं मानी. आदित्य धर की जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साल 2019 में आया, जब उन्होंने विक्की कौशल स्टारर सैन्य एक्शन ड्रामा फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ को डायरेक्ट किया. फाइल फोटो. 

फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई, बल्कि इसने आदित्य धर को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ भी दिलाया. ‘उरी’ की सफलता के बाद आदित्य धर भारतीय सिनेमा में बड़े पैमाने की एक्शन-ड्रामा फिल्मों और मजबूत स्क्रिप्ट के पर्याय बन गए. हाल ही में उन्होंने सुपरस्टार रणवीर सिंह के साथ ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी का निर्माण किया. ये दो पार्ट में बनी एक मेगा-बजट एक्शन फ्रेंचाइजी है, जिसने देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया है.  फाइल फोटो. 

<br />फिल्म ने उम्मीदों से कहीं आगे निकलते हुए इस फ्रेंचाइजी ने दुनिया भर में 3,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की ऐतिहासिक कमाई की है. इसके साथ ही यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली नंबर वन फ्रेंचाइजी बन गई है. फाइल फोटो. 

आदित्य धर ने जून 2021 में एक्ट्रेस यामी गौतम से शादी की. मई 2024 में उनके बेटे वेदविद का जन्म हुआ और वो पापा बने. आदित्य धर का यह सफर साबित करता है कि अगर आपके भीतर कुछ कर गुजरने का जुनून और अटूट रचनात्मकता हो तो पारंपरिक रास्ते या शारीरिक-एकेडमिक कमजोरियां कभी आपकी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं. फाइल फोटो. 

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