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धौलपुर में चरी बनी किसानों की कमाई का जरिया, गर्मी में पशुओं के लिए भी वरदान

Last Updated:July 10, 2026, 13:40 IST

Dhaulpur News: गर्मी और उमस के मौसम में पशुओं के लिए चरी हरे चारे का बेहतरीन विकल्प बन रही है. धौलपुर के किसान कम लागत में इसकी खेती कर न सिर्फ अपने पशुओं को पौष्टिक आहार दे रहे हैं, बल्कि अच्छी आमदनी भी कमा रहे हैं. दो महीने में तैयार होने वाली चरी की एक बार बुवाई के बाद कई बार कटाई की जा सकती है.

धौलपुर.  गर्मी और उमस के मौसम में पशुओं की सही देखभाल करना बेहद जरूरी होता है, ऐसे समय में चरी एक बेहतरीन हरा चारा माना जाता है. यह पशुओं के शरीर को ठंडक पहुंचाने, पाचन बेहतर रखने और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है. यही वजह है कि धौलपुर जिले के किसान वर्षों से इसकी खेती कर रहे हैं. चरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम समय में तैयार हो जाती है. इसकी बुवाई अप्रैल और मई में की जाती है, क्योंकि इस दौरान तापमान और नमी इसके अनुकूल रहती है. करीब दो महीने में यह पशुओं को खिलाने लायक हो जाती है, इसकी हरी पत्तियां और नरम तने आसानी से पच जाते हैं, जिससे पशु स्वस्थ रहते हैं. धौलपुर के किसान सुशील शर्मा बताते हैं कि बीज बोने के करीब 15 दिन बाद पहली सिंचाई की जाती है. इसके बाद हर 15 दिन के अंतराल पर पानी दिया जाता है. बरसात शुरू होने के बाद बारिश का पानी ही इसकी सिंचाई के लिए काफी होता है.

चरी की एक और खास बात यह है कि इसे एक बार बोने के बाद तीन से चार बार तक काटा जा सकता है. पहली कटाई के करीब 20 दिन बाद यह फिर से तैयार हो जाती है, इससे किसानों को बार-बार बुवाई करने की जरूरत नहीं पड़ती और कम खर्च में ज्यादा हरा चारा मिल जाता है. किसानों को चरी काटते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए, इसे जड़ से नहीं उखाड़ना चाहिए, बल्कि दराती से ऊपर का हिस्सा काटना चाहिए ताकि पौधा दोबारा जल्दी बढ़ सके. किसान सुशील शर्मा ने बताया चरी ऊर्जा, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है. इसे खिलाने से पशुओं की भूख बढ़ती है, उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है और दुधारू पशुओं का दूध उत्पादन भी बढ़ता है. गर्मी और उमस के मौसम में जब हरे चारे की कमी होती है, तब चरी सबसे अच्छा विकल्प बन जाती है.

आर्थिक रूप से भी इसकी खेती किसानों के लिए फायदेमंद है, एक बीघा में इसकी खेती पर करीब 4 हजार रुपये का खर्च आता है, जबकि तैयार चारा बेचने पर लगभग 25 से 30 हजार रुपये तक की आय हो जाती है. साथ ही किसानों को अपने पशुओं के लिए घर का शुद्ध और पौष्टिक चारा भी मिल जाता है. धौलपुर जिले में चरी की खेती अब एक परंपरा बन चुकी है, छोटे और सीमांत किसान भी कम लागत और अच्छे मुनाफे के कारण इसे बड़े पैमाने पर उगा रहे हैं. यही वजह है कि गर्मी और बरसात के मौसम में चरी किसानों और पशुपालकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं मानी जाती.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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