NEET परीक्षा घोटाले में बड़ा खुलासा संभव! 7 घंटे से चल रही पूछताछ, DIG ने साधी चुप्पी

Last Updated:July 10, 2026, 20:37 IST
Lakhisarai NEET Re-examination Scam Update: नीट-यूजी 2026 परीक्षा फर्जीवाड़े में आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने जांच तेज कर दी है. लखीसराय के तेतरहाट थाने में डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो के नेतृत्व में साल्वर गैंग और बायोमैट्रिक कर्मियों सहित 30 आरोपियों से 7 घंटे तक मैराथन पूछताछ हुई. वहीं इसी मामले में स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर PMCH प्रशासन ने आरोपी MBBS छात्र अश्विनी कुमार का नामांकन निलंबित कर हॉस्टल कमरा रद्द कर दिया है. जानिए पूरा अपडेट. NEET exam latest news, NEET UG Exam Scam, NEET UG 2026 Scam: नीट यूजी एग्जाम में पकड़े गए फर्जी परीक्षार्थी.
लखीसराय: नीट (NEET-UG) पुनर्परीक्षा में सामने आए बड़े फर्जीवाड़ा मामले में बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने अपनी जांच के दायरे को बेहद आक्रामक कर दिया है. लखीसराय के तेतरहाट थाने में ईओयू के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो के नेतृत्व में गिरफ्तार किए गए 30 आरोपियों से लगातार 7 घंटों से मैराथन पूछताछ चल रही है. इस हाई-प्रोफाइल जांच के दौरान मौके पर लखीसराय की एसपी प्रेरणा कुमार समेत ईओयू की पूरी टीम मौजूद है. मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए डीआईजी ने फिलहाल मीडिया ब्रीफिंग करने और कोई भी जानकारी साझा करने से साफ इनकार कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक बंद कमरे में हो रही इस पूछताछ से इस पूरे सॉल्वर सिंडिकेट के असली मास्टरमाइंड्स का पर्दाफाश हो सकता है.
जानिए क्या है पूरा मामला?बता दें कि यह पूरी कार्रवाई बीते 21 जून 2026 को आयोजित हुई NEET (UG) पुनर्परीक्षा के दौरान हुए बड़े खुलासे से जुड़ी है. लखीसराय के परीक्षा केंद्रों से पुलिस ने 9 फर्जी स्कॉलर्स को रंगे हाथों दूसरे के बदले परीक्षा देते हुए दबोचा था. जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए अधिकांश स्कॉलर्स खुद मेडिकल फर्स्ट और सेकेंड ईयर के छात्र हैं. जिन्हें असली अभ्यर्थियों की जगह बैठाया गया था. इस नेटवर्क में कुछ बड़े डॉक्टरों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है.
एडवांस और रिजल्ट के बाद लाखों की डीलउस समय जांच में खुलासा हुआ था कि यह एक बेहद संगठित गिरोह है. जो असली अभ्यर्थियों को पास कराने के लिए लाखों रुपये की डील करता था. सौदे की आधी रकम एडवांस में ली जाती थी. बाकी की रकम रिजल्ट आने के बाद वसूली जाती थी.
बायोमैट्रिक कर्मियों की मिलीभगत और बढ़ा दायराअब तक चल रही इस जांच में अब आर्थिक अपराध इकाई की सीधी एंट्री हो चुकी है. 9 स्कॉलर्स से शुरू हुई इस कड़ी के बाद अब साल्वर गैंग, बायोमैट्रिक कर्मियों और उनके करीब 30 मददगारों को शिकंजे में लिया गया है. जांच टीम इस बात को खंगाल रही है कि फिंगरप्रिंट और बायोमैट्रिक मिलान के दौरान इन फर्जी स्कॉलर्स को अंदर एंट्री दिलाने में परीक्षा केंद्र के किन-किन कर्मियों की मिलीभगत थी.
अश्विनी कुमार का नामांकन तत्काल प्रभाव से निलंबितबता दें कि 9 जुलाई 2026 को नीट-यूजी 2026 परीक्षा फर्जीवाड़े में पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की. लखीसराय के किऊल थाने में दर्ज प्राथमिकी और स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए पीएमसीएच ने एमबीबीएस छात्र अश्विनी कुमार का नामांकन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. इसके साथ ही उसका हॉस्टल आवंटन भी रद्द कर दिया गया. प्राचार्या डॉ. गीता सिन्हा ने बताया कि समाचार पत्रों में छपी तस्वीरों, नामांकन रजिस्टर और मोबाइल नंबर के मिलान के बाद यह कदम उठाया गया है. जांच में सामने आया कि घटना के दिन आरोपी छात्र कॉलेज की विशेष कक्षा से भी गायब था. अश्विनी पर आरोप है कि उसने परीक्षा केंद्र में बायोमेट्रिक कर्मचारी से सांठगांठ कर पहचान प्रक्रिया को प्रभावित किया. किसी दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा दी. कॉलेज प्रशासन का कहना है कि ईओयू की जांच पूरी होने और आरोप साबित होने पर छात्र का नामांकन स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाएगा.
About the AuthorAmit ranjan
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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