Rajasthan

200 साल पुरानी जोधपुरी मोजरी को मिला GI Tag, अब दुनिया में और बढ़ेगी राजस्थान की शाही पहचान

Last Updated:July 11, 2026, 09:54 IST

Jodhpur Mojari GI Tag : जोधपुरी मोजरी को जीआई टैग मिला, जिससे 200 साल पुरानी इस कला को नई पहचान मिलेगी. इससे कारीगरों को लाभ होगा और नकली उत्पादों पर रोक लगेगी. करीब 200 वर्ष पुराने इस उद्योग का घरेलू बाजार वर्तमान में लगभग 100 करोड़ रुपये का है, जबकि निर्यात करीब 10 करोड़ रुपये का है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि जीआई टैग मिलने के बाद विदेशी बाजारों में जोधपुरी मोजरी की मांग तेजी से बढ़ेगी और अगले दो वर्षों में कारोबार दोगुना हो सकता है.

जोधपुर. राजस्थान की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को एक और बड़ी पहचान मिल गई है. करीब 200 वर्षों से अपनी खास कारीगरी और शाही अंदाज के लिए मशहूर जोधपुरी मोजरी को अब भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग मिल गया है. इस उपलब्धि से न केवल जोधपुर के हजारों कारीगरों को नई पहचान मिलेगी, बल्कि देश-विदेश के बाजारों में भी जोधपुरी मोजरी की मांग बढ़ने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दो वर्षों में इस उद्योग का कारोबार दोगुना हो सकता है.

जोधपुर की पारंपरिक मोजरी को केंद्र सरकार की जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) रजिस्ट्री से आधिकारिक जीआई टैग मिल गया है. इसके लिए जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (जेएचईए) और ग्राम विकास सेवा संस्थान को प्रमाण पत्र सौंपा गया. दोनों संस्थानों ने वर्ष 2021 में केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय और विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के सहयोग से आवेदन किया था. वर्षों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिली यह मान्यता जोधपुर के हस्तशिल्प उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. अब जोधपुरी मोजरी को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान मिलेगी.

कारीगरों को मिलेगा सीधा लाभकरीब 200 वर्ष पुराने इस उद्योग का घरेलू बाजार वर्तमान में लगभग 100 करोड़ रुपये का है, जबकि निर्यात करीब 10 करोड़ रुपये का है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि जीआई टैग मिलने के बाद विदेशी बाजारों में जोधपुरी मोजरी की मांग तेजी से बढ़ेगी और अगले दो वर्षों में कारोबार दोगुना हो सकता है. जोधपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों परिवार पीढ़ियों से इस पारंपरिक शिल्प से जुड़े हुए हैं. इस उपलब्धि से स्थानीय कारीगरों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे.

नकली उत्पादों पर लगेगी रोकजीआई टैग केवल किसी उत्पाद की पहचान ही नहीं, बल्कि उसकी मौलिकता की भी गारंटी होता है. इससे जोधपुरी मोजरी के नाम पर बिकने वाले नकली और फर्जी उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. साथ ही इस पारंपरिक कला, स्थानीय शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण मिलेगा. इससे देश और विदेश के खरीदारों का भरोसा भी बढ़ेगा और जोधपुर की पारंपरिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी.

बंधेज के बाद अब मोजरी को मिली पहचानजोधपुरी बंधेज को पहले ही जीआई टैग मिल चुका है, जिसके बाद उसके कारोबार में लगभग 25 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई थी. अब जोधपुरी साफा, मथानिया की लाल मिर्च, वुडन एंड आयरन क्राफ्ट, मारवाड़ का जीरा, जोधपुरी पत्थर की छतरियां और लहरिया सहित कई उत्पादों के लिए भी जीआई टैग की प्रक्रिया जारी है. जेएचईए के अध्यक्ष डॉ. के अनुसार, अब मोजरी उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए कौशल विकास, आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता सुधार, ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी, निर्यात संवर्धन और विपणन सहायता जैसे व्यापक अभियान चलाए जाएंगे, ताकि जोधपुरी मोजरी वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सके.

जीआई टैग से उद्योग को मिलेगी नई रफ्तारकारीगर मोहनलाल ने कहा कि जोधपुरी मोजरी को जीआई टैग मिलना वर्षों की मेहनत का परिणाम है. इससे इस पारंपरिक शिल्प को देश और विदेश में नई पहचान मिलेगी तथा निर्यात और कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद है. उन्होंने बताया कि जोधपुरी मोजरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह हाथ से तैयार किया जाता है. यह असली चमड़े पर पारंपरिक कढ़ाई से बनाई जाती है और अपनी अनूठी बनावट व शिल्पकला के कारण अन्य राज्यों की जूतियों से अलग पहचान रखती है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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