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मुंबई की सड़क से हुई थी कास्टिंग, नेशनल अवॉर्ड भी नहीं बदल सका एक्टर की किस्मत, फिल्में छोड़ चलाना पड़ा ऑटो

Last Updated:July 11, 2026, 12:22 IST

Bollywood Lost Gem: बॉलीवुड का वो कलाकार जिसे सड़क से पहचान मिली, लेकिन किस्मत ऐसी की वो वापस सड़कों पर पहुंच गया. मीरा नायर की ऑस्कर नॉमिनेटेड फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ में लीड रोल में दिखने वाले इस एक्टर ने कम उम्र में नेशनल अवॉर्ड जीता था, लेकिन जब इंडस्ट्री में सिक्का नहीं चला तो वो वापस ऑटो चलाने लगा.
मुंबई की सड़क से हुई थी कास्टिंग, नेशनल अवॉर्ड भी नहीं बदल सका एक्टर की किस्मतZoomएक्टर को बॉलीवुड में मुकाम नहीं मिल सका.

नई दिल्ली.  कहते हैं कि फिल्मी दुनिया की चकाचौंध हर किसी को रास नहीं आती है. आज एक ऐसे एक्टर के बारे में बात करने जा रहे हैं, जो नेशनल अवॉर्ड जीतकर भी गुमनामी के रास्ते में कहीं गुम हो गया. सड़क से उठकर ऑस्कर की दहलीज तक पहुंचने वाले इस कलाकार की किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. चकाचौंध भरी इस दुनिया में वो ज्यादा दिन टिक नहीं पाए और वो मुंबई की उन्हीं अंधेरी सड़कों में वापस पहुंच गए जहां से उन्होंने अपनी शुरुआत की थी.

ये कलाकार जिसकी बात कर रहे हैं वो शफीक सईद हैं जिन्हें आपने मीरा नायर की सलाम बॉम्बे में देखा था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एक्टर कुछ कर दिखाने का सपना लिए अपने घर से निकल पड़े थे. जब उन्होंने अपना घर छोड़ा था तो न उनके पास कोई दिशा और न ही जेब में फूटी कौड़ी. आंखों में सपने लिए वो सपनों की नगरी पहुंचे थे. 1980 के दौर की बात है जब एक्टर अपने घर से भागकर मुंबई पहुंचे थे.

सड़कों पर बिताता था दिन-रात

शफीक सईद मुंबई पहुंचकर सड़कों पर गुजारा करते थे. वो चर्चगेट के सामने सड़क पर रहते थे औऱ एक दिन उनकी मुलाकात एक ऐसी महिला से हुई जो आर्ट वर्कशॉप का हिस्सा बनने के लिए सड़क पर से बच्चों को चुन रही थी. बाकी बच्चों को जहां महिला पर विश्वास नहीं हुआ, वहीं शफीक को 20 रुपये की लालच आर्ट वर्क शॉप तक खींच ले गई.

आर्ट वर्क शॉप ने बदली किस्मत

ये ऑर्ट वर्क शॉप उनकी जिंदगी बदलने वाला सुनहरा पल साबित हुई. कई बच्चों में से कास्टिंग डायरेक्टर ने शफीक सईद का चयन किया. वो मीरा नायर की ‘सलाम बॉम्बे’ में लीड रोल में दिखे थे. ये फिल्म भारत के लिए बेहद खास है. सलाम बॉम्बे ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुई तीन फिल्मों में से एक है. बेस्ट फॉरेंन लैग्वेंज में फिल्म नॉमिनेट हुई थी, लेकिन दुर्भाग्यवश जीत नहीं दर्ज कर पाई.

नेशनल अवॉर्ड भी नहीं बदल पाया किस्मत

पहली फिल्म में एक्टर के अभिनय को काफी सराहा गया था. उन्हें भारत के राष्ट्रपति के हाथों नेशनल अवॉर्ड मिला था, लेकिन ये अवॉर्ड उनकी जिंदगी नहीं बदल पाया. उन्हें उम्मीद थी कि वो धीरे-धीरे फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पकड़ बना लेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. एक्टर को फिल्म इंडस्ट्री में काम मिलना बंद हो गया.

ऑटो चलाकर गुजारा करता है एक्टर

साल 2010 में ओपन मैगजीन में शफीक सईद ने कहा था कि कैमरा के सामने वो इतना सहज महसूस करते थे कि उन्हें एक पल के लिए ऐसा नहीं लगा कि वो एक्टिंग कर रहे हैं. लोगों ने ‘सलाम बॉम्बे’ को आर्ट फिल्म कहा था लेकिन उन्हें लगता था कि वो उनकी अपनी कहानी थी. आखिरकार जब इंडस्ट्री ने उन्हें दर किनार कर दिया तो एक्टर अपनी रोजी-रोटी के तलाश में अपने घर वापस चले गए. वो बैंगलुरू लौटकर ऑटो चलाने लगे.

About the AuthorPranjul SinghSub-Editor

From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें

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