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पशुपालक रहें सतर्क, बारिश के मौसम में भेड़-बकरियों पर मंडरा रहा ‘मुफला रोग’ का खतरा, समय पर बचाव है सबसे जरूरी

Last Updated:July 11, 2026, 08:59 IST

Mufla Rog In Animal: मानसून का मौसम जहां खेती के लिए लाभदायक माना जाता है, वहीं पशुपालकों के लिए यह अतिरिक्त सतर्कता का समय होता है. बारिश और अधिक नमी के कारण भेड़-बकरियों में कई संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलती हैं. इनमें ‘मुफला रोग’ सबसे प्रमुख है. यह एक वायरल संक्रामक बीमारी है, जो झुंड के एक-दो पशुओं से शुरू होकर बहुत कम समय में पूरे रेवड़ में फैल सकती है.

मानसून का मौसम जहां खेती के लिए लाभदायक माना जाता है, वहीं पशुपालकों के लिए यह अतिरिक्त सतर्कता का समय होता है. बारिश और अधिक नमी के कारण भेड़-बकरियों में कई संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलती हैं. इनमें ‘मुफला रोग’ सबसे प्रमुख है. यह एक वायरल संक्रामक बीमारी है, जो झुंड के एक-दो पशुओं से शुरू होकर बहुत कम समय में पूरे रेवड़ में फैल सकती है. समय पर पहचान और सावधानी नहीं बरतने पर पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

पशु चिकित्सकों ने बताया इस बीमारी में पशु के मुंह, होंठ, मसूड़ों, नथुनों और थनों के आसपास लाल रंग की फुंसियां या फफोले निकल आते हैं. कुछ समय बाद इनमें मवाद भर जाता है और फिर ये मोटी, सख्त पपड़ी में बदल जाते हैं. संक्रमित पशु को तेज बुखार, नाक से पानी बहना, मुंह में सूजन और घाव होने के कारण खाने-पीने में काफी दर्द होता है. भोजन कम करने से पशु का वजन घटने लगता है, दूध देने वाले पशुओं का दूध कम हो जाता है और छोटे मेमने दूध पीना भी छोड़ सकते हैं, जिससे उनकी वृद्धि प्रभावित होती है.

रोग फैलने से रोकने के लिए संक्रमित पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए. बीमार पशु के मुंह के घावों को पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार ‘लाल दवा’ से साफ करें और उसके बाद सरसों का तेल लगाएं, जिससे घाव जल्दी भरने में मदद मिलती है. यदि घावों में बैक्टीरिया का संक्रमण हो जाए तो तुरंत पशु चिकित्सक से उपचार कराना जरूरी है.

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पशु चिकित्सकों का कहना है कि स्वस्थ भेड़-बकरियों को सार्वजनिक तालाबों, पानी की खेलियों या अन्य साझा जल स्रोतों पर पानी नहीं पिलाना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है. पशुओं को संतुलित और पौष्टिक आहार के साथ नियमित रूप से मिनरल मिक्सचर देना चाहिए, ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे.

बीमार पशुओं को नरम और सुपाच्य चारा दें. यदि मेमने दूध नहीं पी रहे हों तो उन्हें कृत्रिम रूप से दूध पिलाने की व्यवस्था करें. संक्रमित पशुओं की देखभाल करते समय मास्क और दस्ताने अवश्य पहनें तथा उपचार हमेशा पशु चिकित्सक की सलाह से ही कराएं. समय पर सावधानी और सही देखभाल से ‘मुफला रोग’ को फैलने से रोका जा सकता है और पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है.

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