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पायलट की जिद्द, टॉयलेट में सिगरेट और एयर होस्‍टेस… जब एक झटके में खाक हुईं प्‍लेन में सवार 618 जिंदगियां

Last Updated:July 11, 2026, 17:07 IST

11 July Plane Crash: 11 जुलाई को एविएशन हिस्‍ट्री में मनहूसियत के साथ देखा जाता है. इसी तारीख में अलग अलग सालों में छह बड़े प्‍लेन क्रैश हुए हैं. इन हादसों में कहीं पायलट की गलती, कहीं टॉयलेट में फेंकी गई जलती सिगरेट और मेंटेनेंस में कमी ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली. कब-कहां और किन वजहों से हुए ये सभी प्‍लेन क्रैश, जानने के लिए पढ़ें आगे…पायलट की जिद्द और एयर होस्‍टेस... खाक हुईं प्‍लेन में सवार 618 जिंदगियांZoom11 जुलाई को हुए छह बड़े प्‍लेन क्रैश ने एविएशन इंडस्‍ट्री के कई नियमों को हमेशा के लिए बदल दिया.

11 July Plane Crash: साल बदले पर तारीख हर बार 11 जुलाई ही रही. 1946 से 2011 तक चले इस सिलसिले में कभी पायलट की जिद पैसेंजर्स की जिंदगी पर भारी पड़ी. कभी टॉयलेट में की गई पैसेंजर की एक हरकत ने पूरी फ्लाइट को स्‍वाहा कर दिया. तो कभी इ‍मरजेंसी में एयर होस्‍टेस के नजरअंदाज रवैए ने सैकड़ों पैसेंजर की जान ले ली. भले ही यह सभी बातें अलग-अलग प्‍लेन क्रैश से जुड़ी थी, लेकिन सभी का अंजाम लगभग एक सा ही था. 1946 से 2011 से बीच 11 जुलाई को हुए इन प्‍लेन क्रैश में कुल 618 लोगों की जान गई, जिसमें पैसेंजर, फ्लाइट क्रू के साथ जमीन में मौजूद कई लोग भी शामिल थे. आइए, आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं 11 जुलाई को कब-कहां प्‍लेन क्रैश हुआ और उस क्रैश की असल वजह क्‍या थी.

1946 से 2011 से बीच 11 जुलाई को हुए छह बड़े हादसे

एक पैसेंजर ने जीती मौत से जंग, पर बाकी..: 11 जुलाई 1946 को ट्रांस वल्‍र्ड एयरलाइंस की फ्लाइट 513 एक ट्रेनिंग फ्लाइट थी. इस फ्लाइट में सिर्फ 6 क्रू मेंबर सवार थे और कोई पैसेंजर नहीं था. फ्लाइट के दौरान, अचानक कार्गो कंपार्टमेंट में इलेक्ट्रिकल वायरिंग में शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई. कुछ ही देर में धुआं और आग कॉकपिट तक पहुंच गई. धुएं की वजह से पायलट पूरी तरह से ब्‍लैंक हो गए और प्‍लेन से अपना कंट्रोल खो बैठे. इसके बाद, प्‍लेन पेंसिल्वेनिया के पास क्रैश हो गया. इस हादसे में 5 क्रू मेंबर की मौत हो गई, जबकि सिर्फ एक किस्‍मत से जिंदा बच सका.
क्रू बच गया लेकिन 123 पैसेंजर की चली गई जान: 11 जुलाई 1973 को वेरिग एयरलाइन की फ्लाइट 820 रियो डी जनेरियो से पेरिस जा रही थी. पेरिस-ऑर्ली एयरपोर्ट से करीब 5 किलोमीटर पहले प्लेन में अचानक आग लग गई. जांच में पता चला कि किसी पैसेंजर ने टॉयलेट में सिगरेट पी और जलती हुई सिगरेट को डस्‍टबिन में फेंक दी. डस्‍टबिन से शुरू हुई यह आग देखते ही देखते पूरे टॉयलेट में फैल गई. जहरीला धुआं फ्लाइट के पूरे केबिन में फैल गया. पायलट ने जान बचाने के लिए प्‍लेन की इमरजेंसी लैंडिंग खेत में ही करा दी. लेकिन, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. धुएं से दम घुटने की वजह से 134 में से 123 लोगों की जान चली गई. इस हादसे में सिर्फ 11 लोग जिंदा बच सके, जिनमें 10 क्रू मेंबर और एक पैसेंजर शामिल था. इस हादसे में एयर होस्‍टेस की लापरवाही को भी हादसे की अहम वजह माना गया था.
ज्‍वालामुखी में जा टकराया प्‍लेन: 11 जुलाई 1979 को गरुड़ इंडोनेशिया की फोकर एफ-28 फ्लाइट पालेंबांग से मेडन जा रही थी. लेकिन मेडन एयरपोर्ट पर लैंडिंग से ठीक पहले बड़ा हादसा हो गया. प्‍लेन 1,690 मीटर ऊंचे माउंट सिबायक ज्वालामुखी से टकरा गया. इस क्रैश में प्लेन में सवार सभी 61 लोगों की मौत हो गई. जान गंवाने वालों में 57 पैसेंजर और 4 क्रू मेंबर थे. जांच में पता चला कि जिस एनडीबी नेविगेशन बीकन के सहारे प्‍लेन को फ्लाइट पाथ मिलना था, वह पायलट को गलत इंफार्मेशन दे रहा था. नतीजतन, पायलट गलत ऊंचाई पर उड़ान भर रहा था. पायलट ने एटीसी को बताया था कि प्लेन 2,800 मीटर की ऊंचाई पर है, लेकिन असल में वह काफी नीचे उड़ रहा था. इसका नतीजा यह हुआ कि प्‍लेन सीधे पहाड़ से टकराकर क्रैश हो गया.
पायलट की जिद ने लील ली 119 जिंदग‍ियां: 11 जुलाई 1983 को टमे इक्वाडोर की फ्लाइट 173 क्विटो से कुएंका के लिए टेकऑफ हुई थी. लैंडिंग के समय प्‍लेन कुएंका एयरपोर्ट के पास एक पहाड़ी से टकराकर क्रैश हो गया. इस हादसे में प्लेन में सवार सभी 119 लोगों की मौत हो गई. हादसे के समय एयरपोर्ट के आसपास घना कोहरा था. एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने पायलट्स को इंस्ट्रूमेंट एप्रोच से लैंडिंग के लिए कहा. लेकिन, अपनी जिद में अड़े पायलट ने विजुअल एप्रोच से लैंडिंग करने का फैसला किया. इसी दौरान प्लेन का जमीन से विजुअल कॉन्टैक्ट टूट गया. प्‍लेन के अलार्म सिस्‍टम ने लगातार ‘टेरेन, टेरेन, पुल अप!’ की वार्निंग दी, लेकिन कॉकपिट क्रू ने उसे नजरअंदाज कर दिया. प्‍लेन करीब 1,500 फीट प्रति मिनट की रफ्तार से नीचे उतरता रहा और आखिरकार 8,548 फीट की ऊंचाई पर पहाड़ी से टकराकर राख में तब्‍दील हो गया.
टायरों का कम प्रेशर बना 261 लोगों के लिए जानलेवा: 11 जुलाई 1991 को नाइजीरिया एयरवेज की फ्लाइट 2120 ने सऊदी अरब के जेद्दा एयरपोर्ट से टेकऑफ किया था. टेकऑफ से कुछ ही मिनटों बाद प्लेन में भीषण आग लग गई. देखते ही देखते एयरक्राफ्ट कंट्रोल से बाहर हो कर क्रैश हो गया. इस हादसे में प्लेन में सवार सभी 261 लोगों की जान चली गई. जान गवाने वालों में 247 पैसेंजर और 14 क्रू मेंबर शामिल थे. जांच में पता चला कि एयरपोर्ट पर नाइट्रोजन उपलब्‍ध नहीं थी, जिसकी वजह से प्लेन के टायरों में हवा नहीं भरी जा सकी. टेकऑफ के दौरान टायर फट गए और उनमें आग लग गई. लैंडिंग गियर के अंदर जाते ही आग हाइड्रॉलिक और इलेक्ट्रिकल सिस्टम तक फैल गई. कुछ ही पलों में प्‍लेन आग के गोले में तब्‍दील हो गया.
नदी में कराई गई प्‍लेन की इमरजेंसी लैंडिंग: 11 जुलाई 2011 को रूस में अंगारा एयरलाइन की फ्लाइट 9007 में फ्लाइट के दौरान अचानक आग लग गई. हालात बिगड़ते देख पायलट ने बिना समय गंवाए इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला किया. पायलट ने कुछ ही दूर पर मौजूद ओब नदी में प्‍लेन की सेफ लैंडिंग कराने की कोशिश की. उस समय प्लेन में 37 लोग सवार थे. हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, लेकिन 30 यात्रियों की जान बच गई. एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर पायलट तुरंत फैसला नहीं लेते, तो नुकसान कहीं ज्यादा हो सकता था.

सभी हादसों से 11 जुलाई को हुआ सबसे खतरनाक प्‍लेन क्रैश कौन सा था?11 जुलाई को हुए प्‍लेन क्रैश में सबसे खतरनाक हादसा 1911 में नाइजीरिया एयरवेज की फ्लाइट 2120 का था. रिपोर्ट्स के अनुसार, टायरों का प्रेशर कम होने की वजह से टेकऑफ के दौरान आग लग गई. यह आग लैंडिंग गियर के साथ पूरे प्‍लेन में फैल गई. प्‍लेन के व्हील वेल में आग या गर्मी का पता लगाने वाला कोई सेंसर नहीं था. लिहाजा पायलट्स को आग के बारे में पता नहीं चला. कुछ ही देर में आग ने केबिन के फर्श को जला दिया और पैसेंजर सीट्स को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया. तब जाकर क्रू और पायलट को आग के बारे में पता चला. इस हादसे में 261 लोगों ने अपनी जान गवाई थी.

1946 की ट्रांस वर्ल्‍ड एयरलाइंस की फ्लाइट 513 के क्रैश के बाद किस तरह के बदलाव किए गए थे?रिपोर्ट्स के अनुसार, 11 जुलाई 1946 को हुए इस एयरक्रैश के बाद लॉकहीड कॉन्स्टेलेशन कंपनी के सभी प्‍लेन्‍स को ग्राउंड कर दिया गया था. कार्गो में फायर सेंसर लगने के बाद ही इन प्‍लेन्‍स को उड़ान भरने की इजाजत दी गई. साथ ही, इस हादसे के बाद एविएशन रेगुलेटर्स ने सभी कॉमर्शियल फ्लाइट्स में कार्गो फायर डिटेक्शन सेंसर लगाना अनिवार्य कर दिया.

वेरिग की फ्लाइट 820 की दुर्घटना के बाद क्या नियम बनाए गए थे?वेरिग एयरलाइंस की फ्लाइट 820 में मौजूद एक पैसेंजर ने जलती हुई सिगरने टॉयलेट के डस्‍टबिन में फेंक दी थी. डस्‍टबिन से भड़की फ्लाइट ने कुछ ही पलों में पूरी फ्लाइट को अपनी चपेट में ले लिया था. इस हादसे में 123 पैसेंजर्स की जान चली गई थी. इस हादसे के बाद फेडरल एविएशन एडमिनिस्‍ट्रेशन (एफएए) ने एयरवर्दीनेस डायरेक्टिव जारी किया था. इस डायरेक्टिव में फ्लाइट के दौरान धूम्रपान करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई.

About the AuthorAnoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें

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