Rajasthan

Sikar News: खाटूश्यामजी में वीआईपी के लिए फौरन इंतजाम, आम श्रद्धालु अब भी जाम और अव्यवस्था से परेशान

Last Updated:July 11, 2026, 16:10 IST

Khatushyam Ji: हर साल करीब तीन करोड़ श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन के लिए खाटूश्यामजी पहुंचते हैं, लेकिन उनके लिए आज भी अधिकांश व्यवस्थाएं अस्थायी ही हैं. ट्रैफिक, पार्किंग, सीवरेज, ड्रेनेज और मूलभूत सुविधाओं की समस्याएं लगातार बनी हुई हैं, जबकि तिरुपति मॉडल से प्रेरित दीर्घकालीन योजनाएं अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी हैं.

करीब तीन वर्ष पहले प्रशासन, पुलिस और श्री श्याम मंदिर कमेटी की संयुक्त टीम को तिरुपति बालाजी भेजा गया था, ताकि वहां की सफल व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उन्हें खाटूधाम में लागू किया जा सके. टीम ने विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार की थी, लेकिन वर्षों बाद भी उसके सुझाव धरातल पर प्रभावी रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं. श्रद्धालुओं को आज भी लंबी कतार, यातायात अव्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

श्रद्धालु सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए श्री श्याम मंदिर कमेटी ने वर्षों में विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं. नगरपालिका के साथ एमओयू के तहत करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से कचरा निस्तारण प्लांट बनाया जा रहा है. इसी तरह लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का नया भवन भी निर्माणाधीन है. पेयजल, सफाई और मेला व्यवस्थाओं पर भी लगातार खर्च हो रहा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर दीर्घकालीन आधारभूत ढांचे का विकास अब भी अधूरा माना जा रहा है.

वीआईपी दौरे के दौरान राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्यमंत्री या केंद्रीय मंत्रियों के लिए विशेष मार्ग, विशेष सुरक्षा और साफ-सफाई की व्यापक व्यवस्था कुछ ही समय में तैयार कर दी जाती है. वहीं आम श्रद्धालुओं को जाम, अव्यवस्थित पार्किंग, लंबी पैदल दूरी और भीड़भाड़ जैसी परेशानियों से जूझना पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसी व्यवस्थाएं विशेष अवसरों पर संभव हैं तो उन्हें स्थायी रूप से लागू करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए.

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यातायात व्यवस्था भी लगातार चुनौती बनी हुई है. आसपास के गांवों का अधिकांश ट्रैफिक शहर के बीच से गुजरता है, जिससे भारी वाहनों और श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है. वर्षों से प्रस्तावित रिंग रोड का सपना अब तक साकार नहीं हो पाया है. कई उच्चस्तरीय बैठकों में योजना पर चर्चा हुई, लेकिन परियोजना अभी तक जमीन पर नहीं उतर सकी है. रिंग रोड बनने से शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम हो सकता है.

लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं और वाहनों की संख्या के बावजूद खाटूश्यामजी में अलग ट्रैफिक थाना आज भी स्थापित नहीं हो सका है. अनियंत्रित पार्किंग, ओवरलोड वाहन और अव्यवस्थित यातायात दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा रहे हैं. वहीं नगरपालिका पिछले तीन वर्षों से वेंडिंग और नॉन वेंडिंग जोन भी घोषित नहीं कर पाई है. कई बैठकों और दस्तावेजी प्रक्रिया के बावजूद अंतिम निर्णय लंबित है. ऐसे में स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की मांग है कि बढ़ती आस्था को देखते हुए अब अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी और दीर्घकालीन व्यवस्थाएं विकसित की जाएं.

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