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Didwana-Kuchaman: अच्छी बारिश से लहलहाए खेत, मूंग-बाजरे की रिकॉर्ड बुवाई; किसानों को बंपर पैदावार की आस

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अच्छी बारिश बनी किसानों की ताकत, डीडवाना-कुचामन में खरीफ फसलों ने पकड़ी रफ्तार

Last Updated:July 11, 2026, 19:22 IST

Didwana-Kuchaman Agriculture News: डीडवाना-कुचामन जिले में मानसून के अनुकूल रुख ने कृषि क्षेत्र में नई जान डाल दी है. समय पर हुई बारिश से मूंग, बाजरा और ग्वार की बुवाई का लक्ष्य पूरा हो गया है. कृषि विशेषज्ञ मान रहे हैं कि शुरुआती चरण में अच्छी नमी मिलने से फसलें मजबूत हुई हैं. इसके अलावा, किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ कम पानी वाली मूंगफली की खेती की ओर भी तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. यदि मानसून अगस्त तक ऐसे ही बना रहा, तो इस साल रिकॉर्ड पैदावार होने की प्रबल संभावना है, जिससे जिले की कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.

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Agriculture News: डीडवाना-कुचामन जिले में इस बार मानसून के समय पर आगमन ने किसानों की उम्मीदों को नई उड़ान दी है. जून में हुई प्री-मानसून बारिश और जुलाई में सक्रिय मानसून के कारण खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध रही, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई तय समय पर पूरी हो गई. जिले के ग्रामीण इलाकों में अब मूंग, बाजरा और ग्वार की फसलें लहलहाने लगी हैं. कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह के अनुसार, यदि आने वाले हफ्तों में बारिश का यही अनुकूल क्रम बना रहा, तो इस वर्ष जिले में खरीफ फसलों का उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर रहने की पूरी संभावना है.

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन 2026 के लिए मूंग की बुवाई का लक्ष्य 2.80 लाख हेक्टेयर और बाजरे का लक्ष्य 1.53 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया गया था. मानसून की अनुकूल परिस्थितियों के चलते दोनों प्रमुख फसलों की बुवाई का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया है. इसके साथ ही ग्वार की भी काफी बड़े रकबे में बुवाई की गई है. अधिकांश क्षेत्रों से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार फसलों की बढ़वार बहुत अच्छी है, जिससे खेतों में हरियाली छा गई है और किसानों का उत्साह भी दोगुना हो गया है.

फसलों की शुरुआती अवस्था और देखभालकृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि खरीफ फसलों के लिए शुरुआती 30 से 40 दिन का समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. इस दौरान पर्याप्त नमी मिलने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उनका विकास बेहतर होता है. वर्तमान में अधिकांश क्षेत्रों में फसल की स्थिति बहुत अच्छी है. किसान इस समय खरपतवार नियंत्रण, निराई-गुड़ाई और पौधों की देखभाल के लिए अन्य कृषि कार्यों में पूरी सक्रियता से जुटे हुए हैं, ताकि फसल की पैदावार को अधिकतम स्तर तक पहुँचाया जा सके.

बदलते फसल चक्र और मूंगफली का बढ़ता क्रेजइस बार जिले में फसल चक्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पिछले कुछ वर्षों में किसानों ने जल संरक्षण और कम पानी वाली फसलों की महत्ता को गहराई से समझा है. इसी का परिणाम है कि अब किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ वैकल्पिक फसलों पर भी ध्यान दे रहे हैं. मूंगफली की खेती इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है. अब पहले की अपेक्षा काफी अधिक किसान मूंगफली की खेती को अपना रहे हैं, जो सीमित पानी में बेहतर आर्थिक लाभ देने में सक्षम है.

क्षेत्रवार बुवाई का गणित और भविष्य की संभावनाएंकृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, कुचामन तहसील मूंगफली उत्पादन में जिले में अग्रणी बनी हुई है, जहाँ 1,611 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई है. वहीं, डीडवाना और छोटी खाटू तहसीलों में मूंगफली का रकबा अभी अपेक्षाकृत कम है. कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह का मानना है कि सीमित पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली ये फसलें भविष्य में किसानों की पहली पसंद साबित होंगी. फिलहाल, जिले के सभी किसानों की निगाहें अब अगले एक महीने की बारिश पर टिकी हैं. यदि जुलाई और अगस्त में मानसून का साथ बना रहा, तो कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलना निश्चित है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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