पढ़ेंगे भी, पढ़ाएंगे भी: नागौर में 10वीं-11वीं के छात्रों ने पेश की अनोखी मिसाल, पिछड़ी बस्तियों के बच्चों की बदल रहे तकदीर

Last Updated:July 11, 2026, 18:21 IST
Nagaur Education: नागौर में सेवा भारती समिति ने शिक्षा के जरिए समाज में बड़ा बदलाव लाने का बीड़ा उठाया है. समिति द्वारा संचालित बाल संस्कार केंद्रों में गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जा रही है. इस अनूठी मुहिम में 10वीं-11वीं के विद्यार्थी छोटे बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जिससे उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित हो रही है. किताबी पढ़ाई के साथ-साथ यहां नैतिक शिक्षा और कला पर भी जोर दिया जा रहा है. इसके अलावा समिति महिलाओं के लिए बचत योजना, मुफ्त चिकित्सा और छात्राओं के लिए विशेष लाइब्रेरी भी चला रही है.
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Nagaur: नागौर में सेवा भारती समिति शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बनाकर पिछड़ी बस्तियों के बच्चों के जीवन में नई उम्मीद जगा रही है. आर्थिक रूप से कमजोर और संसाधन विहीन परिवारों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के उद्देश्य से समिति शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बाल संस्कार केंद्र संचालित कर रही है. इन केंद्रों पर बच्चों को पूरी तरह निशुल्क शिक्षा दी जा रही है. इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा केवल संसाधनों की कमी या आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई से वंचित न रह जाए.
समिति की ओर से नागौर शहर में कुल 17 बाल संस्कार केंद्र सफलता के साथ संचालित किए जा रहे हैं. शिक्षा का यह कारवां केवल शहर तक ही सीमित नहीं है. सेवा भारती ने मूंडवा, कुचेरा और चूंटीसरा जैसे दूरस्थ गांवों में भी ऐसे केंद्र खोले हैं. हाल ही में छोटी खाटू और सांजू में दो नए बाल संस्कार केंद्रों की शुरुआत की गई है. इससे पहले गोगेलाव की कच्ची बस्ती में श्री गोसाई बाल संस्कार केंद्र स्थापित किया गया था. इन सभी केंद्रों पर प्रतिदिन शाम 5 बजे से लेकर 7 बजे तक नियमित कक्षाएं आयोजित की जाती हैं. प्रत्येक केंद्र पर औसतन 20 से 25 बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं.
किताबी ज्ञान से परे सर्वांगीण विकास पर जोरइन बाल संस्कार केंद्रों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ शिक्षा का अर्थ केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है. बच्चों को गणित, हिंदी और विज्ञान जैसे विषयों के साथ-साथ नैतिक शिक्षा और व्यक्तित्व विकास की बारीकियां भी सिखाई जाती हैं. यहां कविता लेखन, चित्रकला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को जोड़ा जाता है. इन गतिविधियों से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उनमें छिपी प्रतिभा को एक नया मंच मिलता है. यह पहल बच्चों को बेहतर नागरिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
युवाओं के कंधों पर जिम्मेदारीइस अभियान की सबसे अनूठी पहल यह है कि शिक्षण कार्य की कमान बस्ती के ही उन होनहार विद्यार्थियों के हाथों में है, जो स्वयं 10वीं और 11वीं कक्षा में अध्ययनरत हैं. ये किशोर विद्यार्थी छोटे बच्चों को पढ़ाने के साथ उनकी शिक्षा पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देते हैं. समिति इन युवा शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के लिए हर महीने 2 हजार रुपए तक का मानदेय भी प्रदान करती है. इस व्यवस्था से दोहरे लाभ हो रहे हैं. एक ओर जहां बच्चों को अनुभवी मार्गदर्शन मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर किशोरों में नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना का भी विकास हो रहा है.
सामाजिक उत्थान की अन्य पहलशिक्षा के अलावा सेवा भारती समिति सामाजिक बदलाव की दिशा में भी सक्रिय है. वैभवश्री योजना के माध्यम से बस्तियों में महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं, जो आर्थिक स्वावलंबन के लिए हर माह 100 रुपए की बचत कर रही हैं. इसके साथ ही कोहली भगत क्षेत्र में जरूरतमंदों के लिए चिकित्सा सेवा और बालवा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाली छात्राओं के लिए विशेष लाइब्रेरी भी शुरू की गई है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Nagaur,Nagaur,Rajasthan



