कभी टिकट के लिए लगती थीं लंबी लाइनें, आज वीरान इमारत सुनाती है बदलते दौर की कहानी

Last Updated:July 11, 2026, 18:47 IST
Alka Cinema Jaipur: कभी जयपुर के सीकर रोड की रौनक रहा अलका सिनेमा आज वीरान हो चुका है. 80 और 90 के दशक में यह सिंगल-स्क्रीन थिएटर मनोरंजन का सबसे बड़ा केंद्र था, जहाँ लोग घंटों लाइन में लगकर फिल्म देखते थे. मल्टीप्लेक्स संस्कृति, ओटीटी प्लेटफॉर्म और कोरोना काल की मार ने इस ऐतिहासिक थिएटर को बंद करने पर मजबूर कर दिया. आज भले ही यहां सन्नाटा है, लेकिन जयपुरवासियों की यादों में यह सिनेमा आज भी बसा हुआ है और लोग आज भी इस जगह को इसी नाम से पहचानते हैं.
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Alka Cinema, Jaipur: राजस्थान की राजधानी जयपुर के सिनेप्रेमियों के लिए अलका सिनेमा का नाम एक सुखद याद जैसा है. एक समय ऐसा था जब अलका सिनेमा में नई फिल्म का रिलीज होना शहर में किसी बड़े त्योहार से कम नहीं माना जाता था. उत्तर जयपुर के सीकर रोड स्थित फतेह सागर मार्केट में स्थित यह हॉल दर्शकों की भारी भीड़ से हमेशा गुलजार रहता था. उस दौर में टिकट खिड़की के बाहर लगने वाली लंबी कतारें, एडवांस बुकिंग के लिए लोगों का उत्साह और परिवार के साथ फिल्म देखने जाने का आनंद सबसे बड़ी खुशी माना जाता था. आज वही अलका सिनेमा हॉल अपनी पुरानी चमक खो चुका है और एक वीरान इमारत के रूप में बदलते दौर की कहानी बयां कर रहा है.
1980 और 1990 के दशक में अलका थिएटर उत्तर जयपुर का सबसे लोकप्रिय और पसंदीदा सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघर हुआ करता था. इसका आकर्षण केवल सीकर रोड तक ही सीमित नहीं था, बल्कि आसपास के कस्बों और ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग फिल्म देखने के लिए यहां पहुंचते थे. थिएटर के बाहर लगे हाथ से पेंट किए गए विशाल फिल्मी पोस्टर, नई फिल्मों के रंगीन होर्डिंग्स और टिकट के लिए उमड़ती बेतहाशा भीड़ उस दौर की पहचान हुआ करती थी. इंटरवल के दौरान समोसे, चाय और कोल्ड ड्रिंक की दुकानों पर होने वाली रौनक एक अलग ही अनुभव देती थी. उस समय सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि लोगों के बीच सामाजिक मेल-मिलाप का एक बड़ा माध्यम भी था.
बदलता दौर और सिनेमा संस्कृति का पतनजैसे-जैसे समय बदला, शहर की जीवनशैली और मनोरंजन के साधनों में बड़ा बदलाव आया. मल्टीप्लेक्स संस्कृति के आगमन ने सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघरों की लोकप्रियता पर गहरा असर डाला. आधुनिक मॉल, हाई-टेक साउंड सिस्टम, आरामदायक रिक्लाइनर सीटें और ऑनलाइन टिकट बुकिंग जैसी सुविधाओं ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करना शुरू कर दिया. इसके साथ ही ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने मनोरंजन को लोगों के घर के ड्राइंग रूम तक पहुंचा दिया. कोविड-19 महामारी के दौरान लंबे समय तक सिनेमाघरों के बंद रहने से सिंगल-स्क्रीन थिएटरों को सबसे घातक झटका लगा. कई थिएटर आर्थिक तंगी के कारण दोबारा पहले जैसी स्थिति में नहीं लौट सके और अलका सिनेमा हॉल भी उन्हीं कठिन परिस्थितियों का शिकार हो गया.
यादों में आज भी जीवित है अलकाआज भले ही अलका सिनेमा हॉल की इमारत खामोश हो और वहां सन्नाटा पसरा रहता हो, लेकिन स्थानीय निवासियों की यादों में यह थिएटर आज भी पूरी तरह जीवंत है. शहर के कई बुजुर्ग और युवा आज भी बताते हैं कि उनकी युवावस्था की पहली फिल्म, दोस्तों के साथ बिताए खुशनुमा पल और परिवार के साथ देखी गई यादगार फिल्में इसी थिएटर की देन हैं. अलका सिनेमा उनके लिए महज पत्थरों से बनी एक इमारत नहीं, बल्कि भावनाओं और बीते दौर की अनमोल यादों का एक अटूट हिस्सा है. इसका प्रमाण यह है कि आज भी स्थानीय लोग इस जगह के बस स्टॉप को ‘अलका सिनेमा’ के नाम से ही पुकारते हैं. जयपुर के सिनेमा इतिहास में अलका का नाम हमेशा उन प्रतिष्ठित थिएटरों में याद रखा जाएगा, जिन्होंने शहर की कई पीढ़ियों को बड़े पर्दे का जादू दिखाया और उन्हें अनगिनत यादें संजोने का मौका दिया.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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