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Pomegranate Farming: अनार की फसल पर तितली का अटैक, समय रहते नहीं संभले तो होगा भारी नुकसान

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अनार की फसल पर तितली का अटैक, समय रहते नहीं संभले तो होगा भारी नुकसान

Last Updated:August 05, 2026, 10:57 IST

Pomegranate Fruit Borer Alert: बारिश के मौसम में अनार की फसल पर अनार तितली (फ्रूट बोरर) के प्रकोप का खतरा बढ़ गया है. मादा तितली द्वारा फलों पर दिए गए अंडों से निकलने वाली सूंडी अंदरूनी गूदे को खाकर फल को सड़ा देती है, जिससे फल गिर जाते हैं. कृषि विशेषज्ञ दिनेश जाखड़ ने समेकित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाने, संक्रमित फलों को नष्ट करने और क्यूनालफॉस 25% ई.सी. का छिड़काव करने की सलाह दी है. सही समय पर सुरक्षात्मक उपाय करके किसान अपनी फसल को भारी नुकसान से बचा सकते हैं.

Agriculture News: अनार की खेती किसानों के लिए प्रमुख नकदी फसलों में से एक मानी जाती है. बेहतर बाजार भाव और लंबे समय तक भंडारण की क्षमता के कारण इसे किसानों के लिए लाभदायक खेती माना जाता है. राजस्थान में बड़े पैमाने पर अनार की खेती की जाती है. इन दिनों अनार के पौधों पर फल बनने शुरू हो चुके हैं. ऐसे में बारिश और अधिक नमी के कारण फसल पर कीट एवं रोगों का खतरा बढ़ जाता है. विशेष रूप से इस मौसम में अनार तितली (फ्रूट बोरर) का प्रकोप तेजी से फैलता है, जो फलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है. इसलिए किसानों को इस समय नियमित निगरानी और समय पर प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए.

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ के अनुसार, यदि समय रहते अनार तितली (फ्रूट बोरर) का नियंत्रण नहीं किया जाए, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. उन्होंने बताया कि इस कीट का हमला सबसे पहले फूलों और छोटे फलों पर दिखाई देता है. मादा तितली फल की सतह पर अंडे देती है, जिनसे निकलने वाली सूंडियां सीधे फल के भीतर प्रवेश कर जाती हैं. इसके बाद वे फल के गूदे और दानों को अंदर ही अंदर खाना शुरू कर देती हैं. शुरुआत में फल बाहर से सामान्य दिखाई देता है, लेकिन कुछ ही दिनों में उसके अंदर सड़न शुरू हो जाती है, जिससे फल की गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों प्रभावित होते हैं.

अनार तितली से प्रभावित फल धीरे-धीरे काले पड़ने लगते हैं और उनमें सड़न के साथ बदबू आने लगती है. पूरी तरह खराब होने पर ऐसे फल स्वतः ही पेड़ से गिर जाते हैं. कई बार किसान इस समस्या की पहचान देर से कर पाते हैं, जिससे तब तक काफी आर्थिक नुकसान हो चुका होता है. इसलिए तितली के प्रकोप की समय रहते पहचान करना बेहद जरूरी है. यदि फलों पर छोटे-छोटे छेद दिखाई दें, उनमें से रस निकलता नजर आए या फल समय से पहले पीले होकर गिरने लगें, तो इसे अनार तितली (फ्रूट बोरर) के हमले का शुरुआती संकेत माना जा सकता है.

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एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि अनार तितली से प्रभावित फलों को तुरंत तोड़कर बगीचे से बाहर नष्ट कर देना चाहिए, ताकि सूंडियां अन्य स्वस्थ फलों तक न फैल सकें. उन्होंने बताया कि तितली के प्रभावी नियंत्रण के लिए फूल आने और फल बनने की शुरुआती अवस्था सबसे महत्वपूर्ण होती है. इस समय क्यूनालफॉस 25 ई.सी. का 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर पूरे बगीचे में समान रूप से छिड़काव करना चाहिए. आवश्यकता पड़ने पर कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार दोबारा छिड़काव भी किया जा सकता है. इसके साथ ही संक्रमित फलों को समय-समय पर हटाते रहें और बगीचे में खरपतवार पर भी नियंत्रण बनाए रखें, ताकि कीटों के पनपने की संभावना कम हो सके.

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि बारिश के मौसम में पौधों को संतुलित पोषण देना भी कीटों के प्रकोप को कम करने में मददगार साबित होता है. उन्होंने कहा कि अनार की सफल खेती के लिए खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था होना बेहद जरूरी है. साथ ही सिंचाई का संतुलित प्रबंधन और पौधों की नियमित छंटाई पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए. खेत में जलभराव होने से पौधे कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे कीट और रोगों का प्रकोप तेजी से बढ़ सकता है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि पौधों की रोपाई के समय पर्याप्त दूरी रखें, ताकि हवा का अच्छा आवागमन बना रहे और नमी कम हो. इससे रोग और कीटों के फैलने की संभावना भी घट जाती है. इसके अलावा समय-समय पर जैविक खाद और आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग करने से पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत बनी रहती है.

बाजार में अनार की मांग लगातार बढ़ रही है और अच्छी गुणवत्ता वाले फलों के किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं. ऐसे में यदि किसान कीट एवं रोग प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें, तो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अपनी आय में भी इजाफा कर सकते हैं. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने सलाह दी कि बारिश के मौसम में किसान अपने बगीचे का नियमित निरीक्षण करते रहें. यदि फलों या पौधों पर कीट प्रकोप के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज न करें और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तुरंत उचित दवा का छिड़काव करें. समय पर नियंत्रण करने से फसल सुरक्षित रहती है, अनावश्यक खर्च से बचाव होता है और बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि अनार तितली का प्रकोप शुरुआत में मामूली दिखाई देता है, लेकिन थोड़ी-सी लापरवाही पूरे बगीचे को प्रभावित कर सकती है. इसलिए किसानों को समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) अपनाते हुए बगीचे की नियमित निगरानी, साफ-सफाई और संक्रमित फलों का समय पर निस्तारण करना चाहिए. उन्होंने बताया कि सही समय पर अपनाए गए बचाव और नियंत्रण उपाय न केवल फलों की गुणवत्ता बनाए रखते हैं, बल्कि उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को बेहतर मुनाफा दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

First Published :

August 05, 2026, 10:57 IST

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