पुरी में नहीं मिल रहा मृतकों को मोक्ष! स्वर्गद्वार की किल्लत लोगों को कर रही बेचैन, जानें पूरा मामला

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पुरी में नहीं मिल रहा मृतकों को मोक्ष! स्वर्गद्वार की किल्लत से लोग बेचैन
Last Updated:August 06, 2026, 21:17 IST
पुरी के स्वर्गद्वार से मृतकों को मोक्ष मिलने में देरी हो रही है. वजह है स्वर्गद्वारा में लकड़ी की कमी. इस कमी के चलते मृतकों के दाहसंस्कार के लिए परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. वहीं इस समस्या से निजात पाने के लिए 90 लाख रुपए की कीमत से नई दाह संस्कार भट्ठी लगाने पर विचार किया जा रहा है.पुरी के स्वर्गद्वार से मोक्ष के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है.
पुरी. भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी का स्वर्गद्वार देश के सबसे पवित्र श्मशान घाटों में गिना जाता है. मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार होने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है. हर साल बड़ी संख्या में लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए स्वर्गद्वार पहुंचते हैं. लेकिन इन दिनों यह पवित्र स्थल लकड़ी की कमी से जूझ रहा है, जिससे अंतिम संस्कार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है.
मंगलवार सुबह 5 बजे से 6 बजे के बीच छह शव स्वर्गद्वार पहुंचे, लेकिन लकड़ी उपलब्ध नहीं होने के कारण उनका अंतिम संस्कार सुबह 9 बजे के बाद ही शुरू हो सका. इस वजह से मृतकों के परिजनों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा. जानकारी के अनुसार, स्वर्गद्वार में हर दिन 100 से अधिक शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंचते हैं. एक शव के अंतिम संस्कार में करीब 1.5 से 2 क्विंटल जलाऊ लकड़ी की जरूरत होती है.
इस हिसाब से रोजाना 15 से 20 टन लकड़ी की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन मौजूदा स्टॉक मांग के मुकाबले काफी कम है.
स्वर्गद्वार के लिए बारिश बनी बड़ी आफतवन विभाग का कहना है कि लगातार हो रही बारिश की वजह से जलाऊ लकड़ी की सप्लाई नहीं हो पा रही है. स्वर्गद्वार के प्रबंधक सिद्धार्थ रॉय ने बताया कि फिलहाल ओडिशा फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की ओर से उपलब्ध कराई जा रही झाऊ की लकड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है. जरूरत पड़ने पर परिवार बाहर से भी लकड़ी की व्यवस्था कर रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए आधुनिक दाह संस्कार भट्ठी लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है.
सोमवार से शुरू हुई लकड़ी की किल्लतबताया जा रहा है कि लकड़ी की कमी सोमवार से शुरू हुई थी. इसके बाद स्वर्गद्वार सेवा समिति ने तुरंत ओएफडीसी को इसकी जानकारी दी. लोगों का कहना है कि हरिश्चंद्र योजना को बेहतर तरीके से लागू किया जाए और गांवों के श्मशान घाटों का अधिक उपयोग हो, तो स्वर्गद्वार पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सकता है. पांच साल पहले जहां रोज करीब 50 शवों का अंतिम संस्कार होता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 100 से अधिक हो गई है.
90 लाख रुपए की लागत से बनेगी दाह भट्ठीस्वर्गद्वार के पुनर्विकास के बाद करीब 90 लाख रुपये की लागत से आधुनिक दाह संस्कार भट्ठी लगाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया था. हालांकि प्रशासनिक देरी और फंड की कमी के कारण यह योजना अब तक शुरू नहीं हो सकी है. ऐसे में श्रद्धालु और सेवायत सरकार से नियमित लकड़ी की आपूर्ति और आधुनिक परियोजना को जल्द पूरा करने की मांग कर रहे हैं, ताकि किसी भी परिवार को अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार न करना पड़े.
About the AuthorAnoop Kumar MishraAssistant Editor
Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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August 06, 2026, 21:17 IST



