करियर की दौड़ में तनाव से कैसे बचें? बीके सरिता ने बताए सफलता के आसान मंत्र

Last Updated:August 06, 2026, 08:18 IST
BK Sarita Stress Management Session: कोटा में ब्रह्माकुमारी संस्था की समाज सेवा प्रभाग कोऑर्डिनेटर बीके सरिता ने युवाओं को मानसिक तनाव से दूर रहने और सकारात्मक माइंडसेट अपनाने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि असली सफलता केवल नौकरी या पद से नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और नैतिक मूल्यों से मिलती है. उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने, राजयोग अपनाने, ईमानदारी से कार्य करने और जीवन में कृतज्ञता का भाव रखने की अपील की.
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Kota News: देश की कोचिंग कैपिटल कहे जाने वाले कोटा शहर में भविष्य और करियर को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आज की युवा पीढ़ी मानसिक तनाव से जूझ रही है. इस पृष्ठभूमि में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की समाज सेवा प्रभाग की कोऑर्डिनेटर बीके सरिता ने युवाओं को तनाव से उबरकर संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने का मार्ग दिखाया. उन्होंने कहा कि आज के दौर में युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल करियर बनाना या बड़ा पद हासिल करना नहीं है, बल्कि अपनी मानसिक शांति को बनाए रखना है. यदि पढ़ाई, नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच मन शांत और स्थिर रहे, तो किसी भी लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जा सकता है.
बीके सरिता ने स्पष्ट किया कि राजयोग का अर्थ जिम्मेदारियों से भागना नहीं, बल्कि हर कठिन परिस्थिति में स्वयं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना है. उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति ऊंचे पद पर होकर भी भीतर से असंतुष्ट और तनावग्रस्त है, तो उसे वास्तविक अर्थों में सफल नहीं माना जा सकता. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं और आत्मविश्वास, धैर्य तथा अनुशासन को अपनाएं. इसके साथ ही उन्होंने कार्यस्थल और व्यवसाय में ईमानदारी व नैतिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा के दौर में शार्टकट के बजाय सत्य, ईमानदारी और पारदर्शिता से ही स्थायी सफलता मिलती है.
नशे से दूर रहें, कृतज्ञता का भाव लाएगा जीवन में बदलाववर्तमान समय में असफलता और तनाव से बचने के लिए गलत आदतों व नशे की ओर कदम बढ़ाने वाले युवाओं को सचेत करते हुए बीके सरिता ने कहा कि व्यसन समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि नई मुसीबतों की शुरुआत हैं. युवाओं को नशे से दूर रहकर समाज सेवा, सकारात्मक सोच और आत्मिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. उन्होंने जीवन में कृतज्ञता (आभार) के भाव को बेहद जरूरी बताते हुए कहा कि ईश्वर, प्रकृति, माता-पिता और सहयोगियों के प्रति धन्यवाद का भाव रखने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है.
“जो ईश्वर का ध्यान करते हैं, उनका ध्यान ईश्वर रखता है”युवाओं को प्रेरित करते हुए बीके सरिता ने कहा, “जो ईश्वर का ध्यान करते हैं, उनका ध्यान ईश्वर रखता है.” नियमित ध्यान, आध्यात्मिक चिंतन और निस्वार्थ सेवा से न केवल तनाव कम होता है, बल्कि व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में प्रदर्शन भी बेहतर होता है. उन्होंने विश्वास जताया कि यदि युवा इन मानवीय और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाएंगे, तो वे न केवल एक सफल नागरिक बनेंगे बल्कि एक स्वस्थ, खुशहाल और तनावमुक्त समाज का निर्माण करेंगे.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Kota,Kota,Rajasthan
First Published :
August 06, 2026, 08:18 IST



