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विराट को छोले-भटूरे तो वैभव सूर्यवंशी को मटन पसंद… राजभोग से मिलती है छक्के मारने की ताकत? जानिए बेबी बॉस का डाइट प्लान

Last Updated:August 06, 2026, 20:54 IST

Vaibhav Sooryavanshi diet Plan: वर्तामान में क्रिकेट में जहां सख्त डाइट और फिटनेस ही टीम में चयन का मुख्य पैमाना बन चुके हैं, वहीं 15 साल के वैभव सूर्यवंशी अपनी शर्तों पर खेल रहे हैं. विराट कोहली की शुरुआती दिनों की तरह ही वैभव भी खाने के बेहद शौकीन हैं. मटन, चिकन, मछली से लेकर ‘राजभोग’ और आइसक्रीम तक, वे बिना किसी परहेज के अपने पसंदीदा स्वादों का मजा लेते हैं.

मौजूदा समय में क्रिकेट सिर्फ मैदान पर बल्ले और गेंद के अनुशासन का खेल नहीं रह गया है. आज के दौर में टीम चयन से लेकर लंबी पारियों की क्षमता तक सब कुछ एथलीट की शारीरिक फिटनेस और डाइट से तय होता है. जिम में पसीना बहाना, कार्बोहाइड्रेट-प्रोटीन का बारीकी से हिसाब रखना और कड़े अनुशासन में बंद जाना आज के हर पेशेवर क्रिकेटर का रूटीन बन चुका है. लेकिन इन सब मानकों के बीच, समस्तीपुर के 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी की कहानी क्रिकेट जगत को एक अलग नजरिया देती है. विराट कोहली ने अपने करियर के शुरुआती दौर में दिल्ली के छोले-भटूरे और मिठाइयों को छोड़कर अपनी फिटनेस से विश्व क्रिकेट में नया मानक स्थापित किया.

आज के समय में एथलेटिसिज्म क्रिकेट का पहला पैमाना बन चुका है. यो-यो टेस्ट से लेकर बॉडी फैट परसेंटेज तक, हर पहलू पर खिलाड़ियों को परखा जाता है. ऐसे प्रतिस्पर्धी दौर में 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने जब बड़े मंच पर कदम रखा, तो उनके खान-पान और शारीरिक बनावट पर लोगों की नजर पड़ना स्वाभाविक था. जहां हर युवा एथलीट शुरुआत से ही सख्त डाइट चार्ट फॉलो करने की कोशिश करता है, वहीं वैभव ने अपने नैसर्गिक खान-पान और स्वाभाविक अंदाज से सबको चौंकाया.

फास्ट फूड और प्रोसेस्ड डाइट के इस दौर में वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) की प्राथमिकता बेहद पारंपरिक है. एक इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया था कि उन्हें अपनी मां के हाथ का बना घर का खाना ही सबसे ज्यादा पसंद है. चाहे सफर कितना भी लंबा हो या वे देश के किसी भी कोने में खेल रहे हों, देशी स्वादों का मोह उनके मन में हमेशा रहता है. घर का सादा और पौष्टिक खाना उनकी शारीरिक और मानसिक ऊर्जा का मुख्य आधार बना हुआ है.

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जहां आज के एथलीट चीनी और मिठाइयों से दूर भागते हैं, वहीं वैभव सूर्यवंशी मीठे के मामले में खुद को रोक नहीं पाते. वे मिठाइयों के बेहद शौकीन हैं और जब भी मौका मिलता है, ‘राजभोग’ खाना कभी नहीं भूलते. इसके अलावा मैच या अभ्यास के बाद आइसक्रीम का आनंद लेना भी उनके रूटीन का हिस्सा है. मीठे के प्रति यह लगाव दिखाता है कि वे खेल के दबाव के बीच भी जीवन के सहज स्वादों का पूरा आनंद लेते हैं.

फिलहाल वैभव अपनी डाइट में बहुत ज्यादा बंदिशें या परहेज नहीं रखते हैं. उनका मानना है कि इस उम्र में जो खाना पसंद आता है, उसे खुशी-खुशी खाना चाहिए. खाने को लेकर तनाव लेने के बजाय वे संतुलित मात्रा में अपने मनपसंद व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं. यह बेफिक्र रवैया उनके खेल में भी झलकता है, जहां वे बिना किसी हिचकिचाहट के निर्भीक होकर शॉट खेलते हैं.

वैभव के भारी शरीर और खान-पान को लेकर कुछ आलोचकों ने उनकी फिटनेस पर सवाल भी उठाए. शुरुआती दौर में कुछ लोगों का मानना था कि शीर्ष स्तर के क्रिकेट के लिए उन्हें तुरंत अपनी जीवनशैली बदलनी चाहिए. लेकिन जब वैभव क्रीज पर उतरते हैं, तो ये तमाम सवाल धरे के धरे रह जाते हैं. गेंद को टाइम करने की उनकी क्षमता, हाथ और आंखों का तालमेल (Hand-Eye Coordination) और उनकी टाइमिंग इतनी सटीक है कि उनकी फिटनेस कभी उनके खेल में बाधा नहीं बनी.

दिखने में भले ही वैभव एक थोड़े हेल्दी नजर न आते हों, लेकिन जब उनका बल्ला घूमता है, तो गेंद सीधा स्टेडियम की छतों पर जाकर गिरती है. उनकी बॉडी में जो नैचुरल स्ट्रेंथ है, वह उनके खान-पान से ही आती है. उनके छक्कों की दूरी और शॉट्स में मौजूद पावर यह साबित करती है कि हर खिलाड़ी के शरीर की जरूरतें अलग होती हैं और वैभव की देशी डाइट उन्हें मैदान पर पूरी ताकत देती है.

कई अनुभवी क्रिकेट एक्सपर्ट्स और पूर्व खिलाड़ियों ने वैभव को सलाह दी है कि इस उम्र में उन्हें अपने स्वाभाविक खान-पान के साथ बहुत ज्यादा प्रयोग नहीं करना चाहिए. विशेषज्ञों का मानना है कि 15 साल की उम्र में शरीर बढ़ रहा होता है और नैचुरल डेवलपमेंट के लिए भरपूर पोषण बेहद जरूरी है. डाइट में अचानक बहुत सख्त बदलाव करने से उनकी नैचुरल स्ट्रेंथ और पावर हिटिंग पर असर पड़ सकता है, इसलिए फिलहाल उन्हें अपने सहज अंदाज में ही खेलने देना चाहिए.

आईपीएल 2026 के दौरान जब मीडिया ने वैभव से उनकी फिटनेस और भविष्य के प्लान के बारे में पूछा, तो उन्होंने एक परिपक्व खिलाड़ी की तरह जवाब दिया. वैभव ने माना कि वे धीरे-धीरे अपने डाइट प्लान में अनुशासन लाएंगे. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की कठिन चुनौतियों, लंबे सीज़न और रिकवरी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे समझते हैं कि अपनी फिटनेस को अगले स्तर पर ले जाना जरूरी होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सही समय आने पर अपनी डाइट में पेशेवर बदलाव करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

जैसे विराट कोहली ने अपने करियर के एक मोड़ पर अपनी फिटनेस को पूरी तरह री-इन्वेंट किया और दुनिया के सबसे फिट एथलीट बने, वैसे ही वैभव सूर्यवंशी भी अपने करियर के उस मोड़ की ओर बढ़ रहे हैं. अभी वे अपनी स्वाभाविक प्रतिभा और ताकत के दम पर क्रिकेट जगत पर राज कर रहे हैं, लेकिन भविष्य में जब यह देशी ताकत सख्त एथलेटिक अनुशासन से मिलेगी, तो वैभव और भी ज्यादा खतरनाक और निरंतर प्रदर्शन करने वाले बल्लेबाज बनकर उभरेंगे.

वैभव सूर्यवंशी की कहानी यह साबित करती है कि क्रिकेट में सफलता का कोई एक तय फॉर्मूला नहीं होता. अनुशासन जरूरी है, लेकिन अपनी जड़ों, अपनी स्वाभाविक ताकत और खुशमिजाज जीवनशैली को बनाए रखना भी उतना ही अहम है. जब तक उनके बल्ले से रॉकेट जैसे छक्के निकलते रहेंगे, फैंस उनके खेल और उनके इस बेफिक्र अंदाज दोनों का जश्न मनाते रहेंगे.

First Published :

August 06, 2026, 20:54 IST

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