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मानसून में ऐसे रखें अपनी त्वचा का ख्याल, आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताए ग्लोइंग स्किन के आसान टिप्स

Last Updated:August 06, 2026, 14:29 IST

Monsoon skin care tips: मानसून का सुहाना मौसम जहां गर्मी से राहत दिलाता है. वहीं नमी और चिपचिपाहट के कारण त्वचा संबंधी कई तरह की परेशानियां भी लेकर आता है. नमी और बैक्टीरिया स्किन में एलर्जी और एक्ने की परेशानी को बढ़ा देते हैं. ऐसे मौसम में अपनी त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए आप जरूरी टिप्स अपना सकते हैं. आइए जानते है कुछ ऐसे ही जरूरी टिप्स…

मानसून की रिमझिम बारिश भले ही मन को सुकून देती हो लेकिन इस मौसम की नमी और चिपचिपाहट हमारी त्वचा का संतुलन बिगाड़ देती है. बारिश के मौसम में हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे पसीना और ऑयल प्रोडक्शन ज्यादा होने लगता है. ऐसे में ऑयली प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल त्वचा पर चिपचिपाहट बढ़ा सकता है और मुहांसों का कारण बन सकता है. अपनी स्किन को इस मौसम में फ्रेश और हेल्दी बनाए रखने के लिए एक स्किन केयर रूटीन अपनाना जरूरी है.

देहरादून की आयुर्वेदिक चिकित्सक शालिनी बताती हैं कि मानसून में भी आपको गर्मी और सर्दी की तरह त्वचा की देखभाल करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मानसून सीजन में हवा में मौजूद नमी और प्रदूषण के चलते चेहरे पर धूल, पसीना और एक्स्ट्रा ऑयल आसानी से जमा हो जाते हैं जो स्किनपोर्स को बंद कर देते हैं. इनसे बचाव के लिए दिन में दो बार जेल-बेस्ड या फोमिंग क्लींजर का उपयोग करना चाहिए. जेल-बेस्ड क्लींजर त्वचा के नैचुरल मॉइस्चर को छीने बिना गहराई से सफाई करते हैं. अपने चेहरे को हल्के गुनगुने पानी से धोएं और गोल-गोल घुमाते हुए क्लींजर से मसाज करें. यह प्रोसेस स्किन में जमे एक्स्ट्रा ऑयल को बाहर निकालती है और मुहांसों की परेशानी को दूर रखती है. आपको हमेशा माइल्ड शॉप का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि हार्ड सॉप स्किन का पीएच बैलेंस बिगाड़ सकता है. आपको सुबह और रात को सोने से पहले क्लींजिंग जरूर करनी चाहिए.

क्लींजिंग के तुरंत बाद स्किन को टोन करना एक बेहद जरूरी स्टेप है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. मानसून में त्वचा का पीएच स्तर बिगड़ने का खतरा रहता है जिसे बैलेंस करने में ऑर्गेनिक गुलाब जल एक बेहतरीन टोनर का काम करता है. रोज वाटर एक नैचुरल एस्ट्रिजेंट की तरह काम करता है जो खुले हुए रोमछिद्रों को कसने और स्किन को तुरंत ठंडक प्रदान करने में मदद करता है.

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क्लींजिंग के बाद कॉटन पैड की मदद से या सीधे चेहरे पर गुलाब जल का स्प्रे करें और इसे स्किन में धीरे-धीरे थपथपाकर सोखने दें. इसमें मौजूद एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रॉपर्टी बारिश के मौसम में होने वाली रेडनेस और जलन को शांत करते हैं. रेगुलर रोज वाटर टोनर का इस्तेमाल करने से स्किन फ्रेश महसूस करती है.

अक्सर लोग मानसून में चिपचिपाहट के डर से मॉइस्चराइजर लगाना छोड़ देते हैं जो सबसे बड़ी गलती है. स्किन में नमी की कमी होने पर स्किन ग्रंथियां और एक्स्ट्रा ऑयल बनाने लगती हैं जिससे चेहरा और चिपचिपा दिखने लगता है. इसलिए इस मौसम में भारी या ऑयली क्रीम की जगह लाइट हाइड्रेटिंग क्रीम और वॉटर-बेस्ड या जेल-बेस्ड मॉइस्चराइजर का ही यूज करें. हयालूरोनिक एसिड या एलोवेरा बेस्ड मॉइस्चराइजर एक्सट्रा ऑयली बनाए बिना स्किन की गहरी परतों तक नमी पहुंचाते हैं. यह स्किन के बैरियर को मजबूत करता है और उसे हाइड्रेटेड रखता है. नहाने या टोनिंग के तुरंत बाद जब त्वचा थोड़ी नम हो, तब इस हल्के मॉइस्चराइजर को चेहरे और गर्दन पर अच्छी तरह लगाएं. यह आपकी स्किन को दिनभर सॉफ्ट, प्लम्प और ग्लोइंग बनाए रखने में बेहद मददगार साबित होता है.

मानसून के दिनों में आसमान में बादल छाए रहते हैं जिससे लोग सोचते हैं कि सनस्क्रीन की जरूरत नहीं है. लेकिन, सूरज की यूवी किरणें बादलों को पार करके भी हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं. जिससे समय से पहले झुर्रियां और टैनिंग होती है. इस मौसम में कम से कम 30 एसपीएफ या उससे ज्यादा का ब्रॉड स्पेक्ट्रम और वॉटर रेजिस्टेंट सनस्क्रीन लगाना बहुत जरूरी होता है. पसीने और बारिश के पानी में बह जाने वाले सनस्क्रीन काम नहीं आते इसलिए वाटर-रेसिस्टेंट फॉर्मूला ही चुनें. घर से बाहर निकलने से लगभग 20 मिनट पहले आप चेहरे, गर्दन और हाथों पर सनस्क्रीन अच्छी तरह लगाएं. अगर आप लंबे समय तक बाहर हैं तो हर 3-4 घंटे में इसे दोबारा लगाएं.

मानसून में नमी के चलते स्किन पर डेड स्किन सेल्स बहुत जल्दी जमा होने लगती हैं जिससे चेहरा बेजान और बेरंग नजर आने लगता है. बंद रोमछिद्रों को खोलने और बेजान स्किन को हटाने के लिए हफ्ते में कम से कम 1 से 2 बार एक्सफोलिएशन या स्क्रबिंग करना बहुत जरूरी होता है. इसलिए इस मौसम में बहुत कठोर स्क्रब का इस्तेमाल करने से बचें क्योंकि इससे त्वचा पर छोटे-छोटे कट्स या रैशेज आ सकते हैं. हमेशा माइल्ड और जेंटल स्क्रब का ही यूज करें. अगर आप मानसून में टैनिंग, डार्क स्पॉट्स और पिगमेंटेशन से परेशान हैं तो हल्दी, बेसन और मुलहठी से बना नैचुरल स्क्रब त्वचा की गहराई से सफाई कर डेड सेल्स हटाता है. हल्दी में मौजूद एंटी-सेप्टिक गुण दाग-धब्बों को कम करते हैं और यह पिगमेंटेशन को हल्का करता है. इस पेस्ट से चेहरे पर गोल-गोल घुमाते हुए 3-4 मिनट तक स्क्रब करें और फिर 5 मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद साफ पानी से धो लें. हफ्ते में इसका दो बार यूज करें.

बारिश के मौसम में चेहरे पर होने वाली चिपचिपाहट और ऑयल कंट्रोल करने के लिए मुल्तानी मिट्टी का फेस पैक सबसे बेस्ट माना जाता है. मुल्तानी मिट्टी एक नैचुरल क्ले है जो त्वचा के अंदर जमा एक्स्ट्रा ऑयल, गंदगी और टॉक्सिन्स को सोखने की ताकत रखती है. फेस पैक बनाने के लिए दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी में एक चम्मच गुलाब जल और चुटकी भर नीम पाउडर या चंदन पाउडर मिलाएं. इस पैक की एक पतली परत अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं और लगभग 10 से 15 मिनट तक इसे सूखने दें. ऐसा करने के बाद आप फेस वॉश कर लीजिए. ये टिप्स ऑयली स्किन वाले लोगों के लिए हैं ड्राई स्किन वाले लोग मुल्तानी मिट्टी की जगह बेसन और मलाई का फ़ैसपेक यूज कर सकते हैं और वॉटर बेस्ट की जगह शिया बटर वाले मॉइश्चराइजर का उपयोग कर सकते हैं

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August 06, 2026, 14:29 IST

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