Agriculture Tips: खाने ही नहीं, मिट्टी की हेल्थ भी सुधारेंगे गुड़-बेसन, घर पर ऐसे बनाएं देसी फर्टिलाइजर

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खाने ही नहीं, मिट्टी की हेल्थ भी सुधारेंगे गुड़-बेसन, घर पर ऐसे बनाएं देसी खाद
Last Updated:August 07, 2026, 09:02 IST
Organic Fertilizer Tips: अगर किसान कम खर्च में फसलों की अच्छी बढ़वार चाहते हैं, तो गुड़ और बेसन से बनने वाला देसी फर्टिलाइजर उनके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यह पूरी तरह ऑर्गेनिक घोल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और पौधों की जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करता है. इसे तैयार करने के लिए केवल गुड़, बेसन और पानी की जरूरत होती है. पांच से सात दिन के फर्मेंटेशन के बाद तैयार घोल का उपयोग हर 15 से 20 दिन में किया जा सकता है. यह मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाकर पोषक तत्वों के अवशोषण में सुधार करता है. बढ़ती रासायनिक खाद की कीमतों के बीच यह घरेलू फर्टिलाइजर छोटे और सीमांत किसानों के लिए कम लागत में बेहतर खेती का प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहा है.
आमतौर पर हर घर की रसोई में गुड़ और बेसन आसानी से मिल जाते हैं. ज्यादातर लोग इनका इस्तेमाल टेस्टी खाना बनाने या मिठाइयों में करते हैं जबकि कई लोग इन्हें घरेलू ब्यूटी टिप्स में भी काम लेते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यही दोनों चीजें खेती में भी काफी काम की साबित हो सकती है. बढ़ती महंगी रासायनिक खाद के बीच अब किसान ऐसे देसी फर्टिलाइजर की तरफ रुख कर रहे हैं, जिन्हें घर पर ही आसानी से रेडी किया जा सकता है.
गुड़ और बेसन से तैयार होने वाला यह देसी फर्टिलाइजर बनाना भी बेहद आसान है. इसके लिए करीब 200 ग्राम गुड़ और 200 ग्राम बेसन को 20 लीटर साफ पानी में अच्छी तरह मिक्स कर लिया जाता है. इसके बाद इस घोल को किसी प्लास्टिक की बाल्टी या ड्रम में भरकर ऊपर से ढक दिया जाता है. रोजाना सुबह और शाम लकड़ी की मदद से इसे कुछ मिनट तक चलाना जरूरी होता है ताकि फर्मेंटेशन का प्रोसेस सही तरीके से चलता रहे. करीब पांच से सात दिन बाद यह घोल इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाता है.
इस देसी फर्टिलाइजर का सबसे बड़ा फायदा मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में देखने को मिलता है. लगातार रासायनिक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की प्राकृतिक ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है और उसमें मौजूद लाभदायक सूक्ष्म जीव भी खत्म होने लगते हैं. ऐसे में गुड़ और बेसन से तैयार यह ऑर्गेनिक सॉल्यूशन मिट्टी में फिर से अच्छे माइक्रोब्स की संख्या बढ़ाने में मदद करता है. इससे पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होता है और वे जमीन से पानी व न्यूट्रिएंट्स आसानी से ले पाते हैं.
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इस देसी फर्टिलाइजर का इस्तेमाल खेत में सिंचाई के पानी के साथ या फिर ड्रिप इरिगेशन सिस्टम के जरिए भी किया जा सकता है. किसान चाहें तो इसे पौधों की जड़ों के आसपास भी डाल सकते हैं। हर 15 से 20 दिन के अंतराल पर इसका उपयोग करने से अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं. खास बात यह है कि यह पूरी तरह ऑर्गेनिक होने के कारण मिट्टी, पौधों और पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता. इसके लगातार इस्तेमाल से मिट्टी की संरचना बेहतर होती है नमी लंबे समय तक बनी रहती है.
आज के समय में जब रासायनिक खाद और कीटनाशकों की कीमत लगातार बढ़ रही है तब ऐसे घरेलू और कम लागत वाले ऑप्शन किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं. गुड़ और बेसन से बनने वाला यह देसी फर्टिलाइजर बहुत कम खर्च में तैयार हो जाता है और इसके लिए किसी महंगे उपकरण या ज्यादा मेहनत की जरूरत भी नहीं होती. छोटे और सीमांत किसान भी इसे अपने घर या खेत पर आसानी से तैयार कर सकते हैं. इससे बाजार पर निर्भरता कम होती है और खेती का खर्च भी काफी हद तक घटाया जा सकता है.
अगर किसान रासायनिक खाद के साथ-साथ जैविक तरीकों को भी अपनाएं तो मिट्टी की हेल्थ लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती है और फसल का प्रोडक्शन भी बेहतर हो सकता है. गुड़ और बेसन जैसी साधारण चीजों से तैयार होने वाला यह देसी फर्टिलाइजर किसानों के लिए एक सस्ता, आसान और असरदार विकल्प बनकर सामने आया है. इससे न केवल खेत की उर्वरता बढ़ाने में मदद मिलती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित खेती को भी बढ़ावा मिलता है.
First Published :
August 07, 2026, 09:02 IST



