जोधपुर के अस्पतालों में फिर दो महिलाओं की मौत, 15 दिन में आंकड़ा 6 पहुंचा, अब मेडिकल ऑडिट की तैयारी

जोधपुर. राजस्थान के जोधपुर स्थित डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं की मौत के मामलों ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. गुरुवार को उम्मेद अस्पताल और एमडीएम अस्पताल में दो महिलाओं की इलाज के दौरान मौत हो गई. इनमें एक प्रसूता और एक गर्भवती महिला शामिल हैं. इन दो मौतों के बाद पिछले 15 दिनों में एसएन मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में प्रसूता एवं गर्भवती महिलाओं की मौत का आंकड़ा बढ़कर छह हो गया है. मृतकों में चार प्रसूताएं और दो गर्भवती महिलाएं शामिल हैं. लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और मौत के कारणों की चिकित्सकीय जांच भी की जा रही है.
फलोदी और नागौर से रेफर होकर पहुंची थीं दोनों महिलाएं
फलोदी निवासी 32 वर्षीय कृष्णा को हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के चलते उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया था. उनकी हालत गंभीर होने के कारण एक्सपर्ट डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा था, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई. वहीं नागौर निवासी सरोज को गर्भ में भ्रूण की मौत होने और अधिक खून बहने के कारण एमडीएम अस्पताल रेफर किया गया था. डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन अधिक खून बहने के चलते उनकी भी जान नहीं बचाई जा सकी.
15 दिन में छह महिलाओं की मौत
एसएन मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में पिछले 15 दिनों के दौरान प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं की मौत के छह मामले सामने आ चुके हैं. इनमें चार प्रसूताओं और दो गर्भवती महिलाओं की मौत हुई है. लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता की लकीरें बढ़ा दी है. अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अधिकांश मरीज गंभीर अवस्था में दूसरे जिलों से रेफर होकर पहुंचे थे, जिससे उनका इलाज करना बेहद चुनौतीपूर्ण बना रहा.
पहले भी हो चुकी हैं कई मौतें
राजस्थान के कोटा, बीकानेर, जोधपुर सहित कई जिलों में इससे पहले भी रेफर होकर आई प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार अधिकांश मामलों में मरीज हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, अत्यधिक रक्तस्राव, गंभीर एनीमिया, संक्रमण या अन्य जटिल चिकित्सकीय स्थितियों से जूझ रही थीं. कई मरीजों को प्राथमिक स्तर पर उपचार मिलने के बाद गंभीर हालत में जोधपुर रेफर किया गया था.
जांच और मेडिकल ऑडिट की हो रही तैयारी
प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं की लगातार बढ़ रही मौत की घटनाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी मामलों का मेडिकल ऑडिट कराने की तैयारी शुरू कर दी है. प्रत्येक केस में यह जांच की जाएगी कि मरीज को कब भर्ती किया गया, रेफरल की स्थिति क्या थी, इलाज में क्या चुनौतियां रहीं और मौत की वास्तविक वजह क्या रही. अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधार के लिए कारगर कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.



