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क्या Privacy Apps इस्तेमाल करना भी बन सकता है शक की वजह? जानिए GrapheneOS विवाद की पूरी कहानी

फोन का डेटा सुरक्षित रखने के लिए आज कई लोग खास सिक्योरिटी फीचर्स और प्राइवेसी वाले सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अमेरिका में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. यहां एक शख्स पर सिर्फ इसलिए सवाल उठ रहे हैं क्योंकि उसके फोन में ऐसा सॉफ्टवेयर था, जो डेटा को ज्यादा सुरक्षित रखता है.

यह मामला अमेरिका के अटलांटा शहर के रहने वाले सैमुअल ट्यूनिक (Samuel Tunick) से जुड़ा है. उन पर आरोप है कि उन्होंने अपना फोन जानबूझकर इस तरह रीसेट कर दिया ताकि जांच एजेंसियां उसका डेटा न देख सकें.

रिपोर्ट के मुताबिक, 24 जनवरी को सैमुअल ट्यूनिक डोमिनिकन रिपब्लिक से अमेरिका लौट रहे थे. अटलांटा एयरपोर्ट पर अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया और उनका फोन चेक करने को कहा.

अधिकारियों ने कई बार फोन अनलॉक करने के लिए कहा. जब उन्होंने आखिर में एक पासकोड डाला, तो फोन की स्क्रीन बंद हुई, कुछ बार फ्लैश हुई और फिर फोन रीस्टार्ट हो गया. इसके बाद फोन का पूरा डेटा मिट गया.

सरकारी एजेंसियों का कहना है कि यह सबूत मिटाने की कोशिश थी. वहीं ट्यूनिक के वकीलों का कहना है कि फोन की जांच ही कानून के खिलाफ थी.

GrapheneOS क्या है?GrapheneOS एक खास तरह का एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो सामान्य एंड्रॉयड से ज्यादा प्राइवेसी और सिक्योरिटी देता है. इसे खास तौर पर गूगल पिक्सल स्मार्टफोन के लिए बनाया गया है.

इसमें कई ऐसे सिक्योरिटी फीचर्स मिलते हैं जो यूजर के डेटा को सुरक्षित रखते हैं. इनमें एक फीचर ऐसा भी है, जिसमें अगर एक खास पासकोड डाला जाए तो फोन का डेटा अपने आप मिट सकता है.

यूरोप में भी उठे सवालरिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि स्पेन के कैटालोनिया इलाके में भी GrapheneOS को लेकर विवाद हुआ है. बताया गया है कि वहां कुछ पुलिस अधिकारी Google Pixel फोन रखने वाले लोगों को शक की नजर से देखते हैं. उन्हें लगता है कि ऐसे लोग GrapheneOS इस्तेमाल करते हैं और उनका संबंध अपराध या गैंग से हो सकता है. हालांकि, इसका कोई सामान्य नियम या कानून नहीं है.

GrapheneOS ने क्या कहा?इस मामले के सामने आने के बाद GrapheneOS की टीम ने साफ कहा कि उनका सॉफ्टवेयर पूरी तरह कानूनी है. कंपनी का कहना है कि GrapheneOS का मकसद लोगों के डेटा को हैकिंग, चोरी और बिना अनुमति एक्सेस होने से बचाना है. उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत एन्क्रिप्शन की वजह से किसी का निजी डेटा आसानी से नहीं देखा जा सकता.

अदालत में चल रहा है मामलासाइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ GrapheneOS इस्तेमाल करने की वजह से किसी को अपराधी मानना सही नहीं है. फिलहाल यह मामला अमेरिकी अदालत में चल रहा है. अब कोर्ट तय करेगा कि इस मामले में कानून क्या कहता है और क्या सिर्फ प्राइवेसी वाले सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किसी के खिलाफ सबूत माना जा सकता है.

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