जहां इंसान नहीं पहुंच सकते, वहां ड्रोन बरसा रहे हैं बीज; भीलवाड़ा की सूखी पहाड़ियों पर उगेंगे नए जंगल

Last Updated:August 07, 2026, 08:46 IST
Bhilwara Drone Seeding Initiative: भीलवाड़ा वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण और जंगल का दायरा बढ़ाने के लिए दुर्गम पहाड़ियों पर ड्रोन से सीड बॉल गिराने की अनूठी पहल शुरू की है. इसकी शुरुआत फॉरेस्ट ब्लॉक पुर प्रथम की पथरीली पहाड़ियों से की गई. उपवन संरक्षक मारिया शाइन के अनुसार, इस साल 1.50 लाख हेक्टेयर में पौधारोपण का लक्ष्य है. इसके लिए पलाश, रोहिड़ा, नीम, बेर जैसी स्थानीय प्रजातियों की सीड बॉल बनाकर ड्रोन से गिराई जा रही हैं, जिससे कम समय में अधिक क्षेत्र में हरियाली बढ़ाई जा सकेगी.
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Bhilwara Drone Seeding Initiative: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में पर्यावरण संरक्षण और जंगल का दायरा बढ़ाने के लिए वन विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है. जिले के ऐसे दुर्गम और पथरीले पहाड़ी इलाके जहां वन कर्मियों का पैदल पहुंचना बेहद कठिन होता था, वहां अब ड्रोन तकनीक के जरिए ‘सीड बॉल’ (Seed Ball) गिराकर बीजारोपण किया जा रहा है. वन विभाग की इस अनूठी पहल से कम समय में विशाल क्षेत्र को कवर किया जा रहा है, जिससे आने वाले मानसून के दौर में इन सूखी पहाड़ियों पर घनी हरियाली छाने की उम्मीद जग गई है.
भीलवाड़ा वन विभाग ने ड्रोन से बीजारोपण के इस आधुनिक अभियान की शुरुआत ‘फॉरेस्ट ब्लॉक पुर प्रथम’ के पथरीले और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से की है. यह इलाका बेहद ऊबड़-खाबड़ और दुर्गम है, जहां पारंपरिक रूप से गड्ढे खोदकर पौधे लगाना लगभग नामुमकिन था. ड्रोन तकनीक ने इस कठिन कार्य को आसान बना दिया है. ड्रोन तय जीपीएस लोकेशन पर उड़ान भरकर सटीक स्थानों पर सीधे सीड बॉल गिराता है. यदि मौसम अनुकूल रहता है और पर्याप्त बारिश होती है, तो इन सीड बॉल्स से बड़े पैमाने पर नए पौधे अंकुरित होंगे, जिससे क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन को नया जीवन मिलेगा.
1.50 लाख हेक्टेयर में पौधारोपण का लक्ष्य, 17 नर्सरी संचालितभीलवाड़ा वनमंडल के उपवन संरक्षक (DCF) मारिया शाइन ने योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इस साल भीलवाड़ा वनमंडल को 1.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य मिला है. इस विशाल लक्ष्य को समय पर हासिल करने के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है. जिले में वर्तमान में 17 सरकारी नर्सरियां संचालित की जा रही हैं, जहां पौधे तैयार हो रहे हैं. उपवन संरक्षक ने बताया कि सीड बॉल को मिट्टी, देशी गाय के गोबर और प्राकृतिक पोषक तत्वों के मिश्रण से तैयार किया जाता है, जिसके भीतर बीज सुरक्षित रहते हैं. बारिश का पानी मिलते ही यह मिट्टी गल जाती है और बीज अंकुरित हो जाते हैं.
स्थानीय जलवायु के अनुकूल नीम, पलाश और रोहिड़ा के बीजों का चयनपर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल स्थानीय प्रजातियों के बीजों का ही चयन किया है. इनमें राजस्थान का राज्य पुष्प रोहिड़ा, पलाश, बेर, कुमठा, खैर, चुरैल, देशी बबूल और नीम जैसी मजबूत प्रजातियों के बीज शामिल हैं. इन पौधों के बड़े होने से न केवल जंगल का घनत्व बढ़ेगा, बल्कि वन्यजीवों को भी बेहतर प्राकृतिक आवास उपलब्ध हो सकेगा. विभाग की योजना इस सफल प्रयोग के बाद जिले के अन्य सभी दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में भी ड्रोन के माध्यम से सीड बॉल गिराने की है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan
First Published :
August 07, 2026, 08:46 IST



