Rajasthan

राजस्थान का अनोखा धार्मिक स्थल, यहां 400 साल पुरानी है जीवित समाधि, लकवा मरीज मांगते हैं मन्नत

होमफोटोधर्म

राजस्थान का अनोखा धार्मिक स्थल, लकवा ग्रस्त मरीज यहां आकर मांगते हैं मन्नत

Last Updated:August 10, 2026, 09:28 IST

Didwana-Kuchaman Religious Sites: डीडवाना-कुचामन जिले की डीडवाना तहसील का पीड़वा गांव करीब 400 साल पुरानी संत गरीबदास महाराज की जीवित समाधि के कारण खास धार्मिक पहचान रखता है. ग्रामीणों के अनुसार यह स्थान पीढ़ियों से आस्था का केंद्र रहा है और आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. खास तौर पर लकवा पीड़ित लोग संत की समाधि पर दर्शन और प्रार्थना करने आते हैं. बारिश नहीं होने पर ग्रामीण यहां जागरण और हवन कर अच्छी बारिश की कामना करते हैं. कृषि और पशुपालन पर निर्भर गांव में यह परंपरा किसानों की उम्मीदों से भी जुड़ी है. संत गरीबदास महाराज की प्रेरणा से गांव में गौशाला भी संचालित है, जहां करीब 200 से 300 निराश्रित गोवंश की सेवा की जाती है.Amazon Prime DayTop Deals Inside

डीडवाना-कुचामन जिले की डीडवाना तहसील में स्थित पीड़वा ग्राम पंचायत अपनी धार्मिक आस्था और ग्रामीण संस्कृतिके कारण पूरे मारवाड़ में खास पहचान रखता है. कभी नागौर जिले का हिस्सा रहा यह गांव अब नवगठित डीडवाना-कुचामन जिले में शामिल है. डीडवाना पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली पीड़वा ग्राम पंचायत आज विकास की राह पर आगे बढ़ रही है, लेकिन यहां की करीब 400 साल पुरानी संत गरीबदास महाराज की जीवित समाधि आज भी लोगों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है.

गांव के सरपंच प्रतिनिधि पूर्णाराम मुंड के अनुसार संत गरीबदास महाराज की करीब 400 वर्ष पुरानी जीवित समाधि यहां स्थित है. पीढ़ियों से ग्रामीण इस स्थान को श्रद्धा और विश्वास से जोड़कर देखते आए हैं. आसपास के गांवों के लोग भी यहां दर्शन करने पहुंचते हैं. खास तौर पर लकवा यानी पक्षाघात से पीड़ित लोग संत की समाधि पर आकर दर्शन और प्रार्थना करते हैं. ग्रामीणों की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना से लकवाग्रस्त मरीज ठीक हो जाते हैं.

पीड़वा में संत गरीबदास महाराज का स्थान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण जीवन और लोकविश्वास से भी गहराई से जुड़ा हुआ है. जब क्षेत्र में बारिश नहीं होती और खेतों में सूखे जैसे हालात बनने लगते हैं, तब ग्रामीण संत गरीबदास महाराज के स्थान पर जागरण और हवन का आयोजन करते हैं. इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र होकर पूजा-अर्चना करते हैं और अच्छी बारिश के लिए प्रार्थना करते हैं. यह परंपरा आज भी ग्रामीणों की आस्था का हिस्सा बनी हुई है.

Add as Preferred Source on Google

कृषि प्रधान पीड़वा में बारिश का सीधा संबंध किसानों की आजीविका से है. गांव के अधिकांश परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं. खेतों में फसल और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता काफी हद तक बारिश पर निर्भर रहती है. यही वजह है कि बारिश के लिए होने वाला हवन और जागरण केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीदों और सामूहिक भावना से भी जुड़ा हुआ दिखाई देता है.

पीड़वा में संत गरीबदास महाराज की प्रेरणा से गौसेवा का काम भी किया जा रहा है. गांव में संचालित गौशाला में करीब 200 से 300 निराश्रित गोवंश की देखभाल की जाती है. ग्रामीणों के अनुसार गौशाला में गोवंश को चारा-पानी उपलब्ध कराने और उनकी सेवा में स्थानीय लोग भी सहयोग करते हैं. धार्मिक आस्था के साथ जुड़ी यह गौसेवा गांव में सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा भावना की मिसाल पेश करती है.

पीड़वा की पहचान केवल संत की समाधि और गौशाला तक सीमित नहीं है. यहां कृषि और पशुपालन गांव की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और बदलते समय के साथ गांव विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है. ग्रामीण जीवन में परंपरा और आधुनिक विकास का यह मेल पीड़वा को अलग पहचान देता है. एक तरफ सदियों पुरानी आस्था लोगों को जोड़ती है, तो दूसरी तरफ खेती, पशुपालन और पंचायत स्तर के विकास कार्य गांव के भविष्य की तस्वीर तैयार कर रहे हैं.

करीब चार सदियों पुरानी संत गरीबदास महाराज की जीवित समाधि आज भी पीड़वा की सबसे खास पहचान है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान आस्था और उम्मीद का केंद्र है, वहीं ग्रामीणों के लिए यह उनकी परंपरा और सामूहिक विश्वास से जुड़ा हुआ है. बीमारी से राहत की प्रार्थना हो या बारिश के लिए हवन-जागरण, संत गरीबदास महाराज का यह स्थान पीड़वा के सामाजिक और धार्मिक जीवन में आज भी उतना ही खास है.

First Published :

August 10, 2026, 09:28 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj