Agricultutre Tips I dholpur news I बारिश के बाद किसानों के लिए जरूरी सलाह, पानी निकासी और फसल निगरानी से बचाएं नुकसान

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बारिश के बाद फसल की ऐसे करें देखभाल, जलभराव से लेकर कीट-रोग तक बचाव के उपाय
Last Updated:August 12, 2026, 11:02 IST
Agricultutre Tips: धौलपुर में लगातार बारिश के बीच खेतों में जलभराव से फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है. कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों से 24 घंटे के भीतर अतिरिक्त पानी निकालें और फसल की नियमित निगरानी करें. जलभराव के बाद पोषक तत्वों की कमी, फंगस और कीटों के प्रकोप से बचाव के लिए जरूरी उपाय अपनाकर किसान फसल और उत्पादन को बड़े नुकसान से बचा सकते हैं.
धौलपुर. बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं कई बार तेज बारिश किसानों के लिए परेशानी भी खड़ी कर देती है. लगातार बारिश होने के कारण खेतों में कई दिनों तक पानी जमा रहने से फसलों की जड़ें सड़ने और गलने लगती हैं. इससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है और किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ जाता है. ऐसे में किसानों को घबराने के बजाय समय रहते कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए. कृषि अधिकारियों का कहना है जैसे ही खेत में बारिश का पानी जमा होने लगे, उसे बाहर निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए. खेत की ढलान वाली दिशा में छोटी-छोटी नालियां बनाकर पानी को बाहर निकाला जा सकता है. अगर पानी बहुत ज्यादा है और अपने आप बाहर नहीं निकल रहा है तो पंप या मोटर की मदद से पानी निकाल दें.
कोशिश करें कि खेत में पानी 24 घंटे से ज्यादा जमा न रहे, क्योंकि लंबे समय तक पानी भरा रहने से फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है जड़ सड जाती है. खेत से बारिश का पानी निकलने के बाद भी फसल को नुकसान हो सकता है. अधिक पानी के कारण मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व बह जाते हैं, इसलिए पानी निकलने और खेत की स्थिति सामान्य होने के बाद फसल की जरूरत के अनुसार हल्की मात्रा में यूरिया या एनपीके का घोल पत्तियों पर छिड़का जा सकता है. खाद की मात्रा फसल और स्थानीय कृषि अधिकारी के अनुसार ही रखें. बारिश के बाद खेत में नमी और उमस बढ़ जाती है, इससे फसलों में फंगस और कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है, पानी निकलने के बाद फसल की नियमित निगरानी करें.
बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उचित फफूंदनाशक या कीटनाशक का इस्तेमाल करें. पौधों के आसपास जमा अतिरिक्त कीचड़ और खरपतवार को भी हटा दें, ताकि हवा और धूप पौधों तक पहुंच सके. बरसात के मौसम में मक्का, कपास, सोयाबीन और सब्जियों जैसी फसलों की बुवाई मेड़ और नाली पद्धति से करना फायदेमंद रहता है, इससे अतिरिक्त पानी नालियों में चला जाता है. खेत को समतल रखने से भी किसी एक जगह पानी जमा नहीं होता. साथ ही गोबर की सड़ी खाद और केंचुआ खाद डालने से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और जल निकासी में भी मदद मिलती है बारिश के बाद समय पर पानी निकालना और फसल की सही देखभाल करना किसानों को बड़े नुकसान से बचा सकता है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
August 12, 2026, 11:02 IST



