Defamatory Videos Against Bachchan Families: ‘पूरे बच्चन परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर’… वकील की दलील पर कोर्ट ने पूछा- कितनी पीढ़ियों तक चलेगा नाम?

नई दिल्ली. अमिताभ बच्चन की पोती आराध्या बच्चन से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कई अहम कानूनी सवाल तय किए. हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि किसी चर्चित परिवार के नाम से जुड़ी प्रतिष्ठा और गुडविल आखिर कितनी पीढ़ियों तक आगे बढ़ सकती है. हाईकोर्ट ने यह भी विचार का विषय बनाया कि किसी व्यक्ति के बारे में इंटरनेट पर फैलाई गई फर्जी खबरें क्या बौद्धिक संपदा यानी आईपी अधिकारों का उल्लंघन मानी जा सकती हैं.
बार एंड बेंच की खबर के अनुसार, जस्टिस अनुप जयराम भंभानी की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान बच्चन परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रवीण आनंद ने दलील दी कि इस मामले में सिर्फ आराध्या की नहीं बल्कि पूरे बच्चन परिवार के नाम और प्रतिष्ठा का सवाल है. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है.
जस्टिस ने पूछा, क्या परिवार के नाम की प्रतिष्ठा पीढ़ियों तक चल सकती है?हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस भंभानी ने ट्रेडमार्क और किसी व्यक्ति या परिवार के नाम से जुड़ी प्रतिष्ठा के बीच अंतर को लेकर सवाल उठाय. उन्होंने कहा कि ट्रेडमार्क की वैल्यू और उससे जुड़ी प्रतिष्ठा आम तौर पर किसी उत्पाद या सेवा से जुड़ी होती है जबकि किसी व्यक्ति के उपनाम की प्रतिष्ठा उसकी उपलब्धियों और किसी खास क्षेत्र में उसकी पहचान से बनती है. कोर्ट ने सवाल किया कि अगर किसी प्रसिद्ध उपनाम की प्रतिष्ठा को ट्रेडमार्क जैसी गुडविल माना जाए तो क्या यह प्रतिष्ठा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जाती है और अगर जाती है तो इसकी सीमा क्या होगी? यही सवाल इस मामले की सुनवाई का एक अहम कानूनी पहलू बन गया है.
कोर्ट ने तीन बड़े कानूनी सवाल किए तयदिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में विचार के लिए मुख्य तौर पर तीन सवाल तैयार किए हैं. – पहला, अगर किसी पारिवारिक नाम की प्रतिष्ठा ट्रेडमार्क से जुड़ी गुडविल जैसी है तो वह कितनी पीढ़ियों तक कायम रह सकती है?
– दूसरा, अगर इंटरनेट पर फैलाई गई फर्जी खबर बेहद आपत्तिजनक या नुकसान पहुंचाने वाली हो तो क्या वह बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन मानी जा सकती है? अगर हां, तो किस तरह के IP अधिकार का उल्लंघन होगा?
– तीसरा, क्या मानहानि या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कानूनी अवधारणा को बौद्धिक संपदा अधिकारों की स्थापित अवधारणा के साथ जोड़ा जा सकता है? कोर्ट ने साफ किया कि ये उसके मन में उठने वाले सामान्य सवाल हैं और यह सूची पूरी नहीं है.
आराध्या ने 2023 में दाखिल किया था मुकदमाआराध्या बच्चन ने अपने पिता अभिषेक बच्चन के माध्यम से वर्ष 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था. इस मामले में कई यूट्यूब चैनलों और अनजान लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी. याचिका में आरोप लगाया गया था कि इंटरनेट पर ऐसी सामग्री प्रसारित की जा रही है जिससे बच्चन परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है और आराध्या की निजता प्रभावित होती है और उनके बारे में मानहानिकारक दावे किए जाते हैं. मामले में कुछ यूट्यूब वीडियो का भी उल्लेख किया गया था, जिनमें आराध्या के गंभीर रूप से बीमार होने और अस्पताल में भर्ती होने जैसे दावे किए गए थे. एक वीडियो में तो उनकी मौत तक का दावा किया गया था.
2023 में कोर्ट ने आराध्या के पक्ष में दिया था अंतरिम आदेशअप्रैल 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट ने आराध्या के पक्ष में अंतरिम राहत देते हुए संबंधित पक्षों को उनके स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रामक सामग्री प्रकाशित करने से रोक दिया था. उस समय अदालत ने बच्चों की गरिमा और सम्मान के अधिकार पर भी जोर दिया था. खास तौर पर किसी बच्चे के शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गलत जानकारी फैलाने को गंभीर विषय माना गया था. इस मामले की मौजूदा सुनवाई में हालांकि बहस सिर्फ कथित फर्जी खबरों तक सीमित नहीं रही बल्कि व्यक्तित्व अधिकार, प्रतिष्ठा, ट्रेडमार्क और बौद्धिक संपदा कानून के बीच संबंध तक पहुंच गई.
‘व्यक्तित्व अधिकारों की अवधारणा अमीबा की तरह बढ़ रही है’सुनवाई के दौरान जस्टिस भंभानी ने व्यक्तित्व अधिकारों के बढ़ते दायरे पर भी टिप्पणी की. उन्होंने सवाल किया कि आखिर किस तरह की चीजों को व्यक्तित्व अधिकार के दायरे में लाया जा सकता है. कोर्ट ने टिप्पणी की कि ‘व्यक्तित्व अधिकारों की अवधारणा अमीबा के समान आकार लेती जा रही है’ और सवाल उठाया कि अगर हर चीज को व्यक्तित्व अधिकार कहा जा रहा है तो आखिर यह अधिकार किस व्यक्ति के संदर्भ में लागू होगा. यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि अदालत इस मामले में व्यक्तित्व अधिकारों की कानूनी सीमा को भी स्पष्ट रूप से परखना चाहती है.
वकील बोले- सिर्फ ट्रेडमार्क तक सीमित नहीं है प्रतिष्ठाबच्चन परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता प्रवीण आनंद ने दलील दी कि प्रतिष्ठा की कानूनी सुरक्षा को केवल ट्रेडमार्क तक सीमित नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि पासिंग ऑफ लॉ का दायरा ट्रेडमार्क से व्यापक हो सकता है और गलत तरीके से किसी नाम या पहचान का इस्तेमाल करके प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने से भी सुरक्षा मिलनी चाहिए. वकील ने अदालत के सामने कहा कि इस मामले में बच्चन परिवार की तस्वीरों और नाम का इस्तेमाल ऐसी सामग्री के साथ किया गया, जिसमें आराध्या के बारे में गंभीर और कथित तौर पर झूठे दावे किए गए. उनके मुताबिक इससे पूरे परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और अभिषेक बच्चन भी इस मामले में पक्षकार हैं. अब 15 सितंबर को अगली सुनवाई होगी.



