Health

Longevity: अगर कैंसर-हार्ट अटैक का इलाज मिल भी जाए, तो इंसान अधिकतम कितने साल जिएगा? जानिए लॉन्गिविटी डॉक्टर की राय

Last Updated:August 13, 2026, 16:41 IST

194 Years Life: इंसानों की अधिकतम आयु कितनी हो सकती है. वर्तमान में जो 100 साल तक जीवित रह जाते हैं उन्हें बेहद सौभाग्यशाली माना जाता है लेकिन क्या कोई 194 सालों तक जिंदा रह सकते हैं. मनुष्य की आयु बढ़ाने को लेकर कई रिसर्च दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हो रही है. अब एक गणितीय मॉडल के आधार पर दावा किया जा रहा है कि अगर इंसानों में आयु की क्षति करने वाले फेक्टर को हटा दिया जाय तो मनुष्य 194 सालों तक जिंदा रह सकता है. आखिर इस बात में कितनी सच्चाई है. इसे लेकर हमने देश के मशहूर जेरियाट्रिक मेडिसिन एंड लॉन्गिविटी साइंस के डॉक्टर प्रसून चटर्जी से बात की.Longevity: अगर कैंसर-हार्ट अटैक का इलाज मिल जाए, तो इंसान कितने साल जिएगाZoomइंसान की आयु कितनी होगी.

Maximum Life of Human: पीएनजे मेडिकल जर्नल में एक रिपोर्ट छपी है. इस रिपोर्ट में मनुष्य की अधिकतम आयु का आकलन किया गया है. गणितीय मॉडल पर वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला कि यदि मनुष्य की उम्र को प्रभावित करने वाले फेक्टर पर विजय प्राप्त कर ली जाए तो अधिकतम आयु 194 साल तक पहुंच सकती है. मतलब यह है कि अगर कैंसर, हार्ट अटैक जैसी बीमारियों के लिए जिम्मेदार चीजों को पहले ही शरीर से हटा लिया जाए या इनपर नकेल कस लिया जाए तो मनुष्य 194 साल तक जिंदा रह सकता है. पहले से भी वैज्ञानिक इस बात पर अध्ययन कर रहे हैं कि इन चीजों को शरीर से कैसे दूर किया जा सके. कुछ वैज्ञानिक तो इतने उत्साहित है कि उनका मानना है कि अगले कुछ सौ साल में हम इतने ज्यादा सक्षम हो जाएंगे कि इंसानों के जीवन को अनिश्चितकाल तक बढ़ा सकते हैं. हालांकि वैज्ञानिक जगत का यह विवाद नया नहीं है. हमारा मकसद यह है कि क्या सच में इंसान 100 साल से ज्यादा की उम्र तक जीवित रह सकता है. इस सवालों को जवाब ढूंढने के लिए हमने लॉन्गिविटी साइंस के मशहूर डॉ. प्रसून चटर्जी से बात की.

150 सालों की जिंदगी-कितना सच (150 Years of Life—How Much of It Is True?)

अपोलो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल में जेरियाट्रिक मेडिसिन एंड लॉन्गिविटी साइंस के कंट्री हेड डॉ. प्रसून चटर्जी ने बताया कि कोई व्यक्ति 140-150 साल तक तक जिंदा रह जाए, यह कहना तो मुश्किल है लेकिन जब हमारे पास साइंस नहीं था तो भी लोग 100 साल से ज्यादा दिनों तक जीवित रहते थे. इसलिए हमारा मानना यह है कि उम्र बढ़ने की क्रिया पूरी तरह से हमारी ऑवरऑल लाइफस्टाइल पर निर्भर है. आप अपने लाइफस्टाइल को जितना बेहतर बना सकते हैं, उतना ही अपनी एजिंग को स्लो कर सकते हैं. यानी स्पीड ऑफ एजिंग को कम कर सकते हैं. जहां तक इस गणितीय मॉडल की बात है तो यह जैविक रूप से प्रमाणित नहीं है. मतलब अब तक किसी ने नहीं देखा है कि कोई 150 या 200 साल तक जिंदा रह सकता है या नहीं. इस मॉडल में ही यह कहा गया है कि सोमेटिक म्यूटेशन से पैदा हुए कचरे को साफ करना चुनौती है. डॉ. प्रसून चटर्जी कहते हैं कि जर्म सेल के बाद शरीर में जो कोशिकाओं होती है वह विभाजित होती है. विभाजन के क्रम में नई कोशिका में पुरानी वाली कोशिका का डीएनए पहुंचता है. यह ऑरिजनल नहीं होता बल्कि यह कॉपी होती है. इस तरह जब पुरानी कोशिका का विभाजन होकर नई कोशिका बनती है तो डीएनए का कुछ हिस्सा बदल जाता है. इसे ही सोमेटिक म्यूटेशन कहते हैं. सोमेटिक म्यूटेशन के दौरान इसी डीएनए की टूट-फूट से कुछ कचरा निकलकर जमा होता जाता है. यह कचरा उम्र को सीमित करने के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार है.

उम्र बढ़ाने के लिए कई कारक जिम्मेदार

डॉ. प्रसून चटर्जी ने सोमाटिक म्यूटेशन का उदाहरण देते हुए बताया कि किसी को कैंसर होता है और किसी को नहीं. इसके पीछे कई मुख्य कारण होते हैं. इसमें प्रदूषण, सूर्य की किरणें और लाइफस्टाइल जैसे कारक शामिल हैं. जिन लोगों को कैंसर होता है, उनमें सोमेटिक म्यूटेशन होता है. यह म्यूटेशन क्यों होता है? इसका कारण लगातार सिगरेट पीना हो सकता है. इससे फेफड़ों की कोशिकाओं में म्यूटेशन हो जाता है. बाद में यह म्यूटेशन कैंसर ट्यूमर में बदल जाता है. वहीं दूसरे व्यक्ति में म्यूटेशन होता ही नहीं है. कुछ मामलों में यह म्यूटेशन माता-पिता से भी मिलता है. हालाँकि कुछ लोगों को यह अनुवांशिक रूप से नहीं मिलता. कुछ लोगों का शरीर कैंसर फैलाने वाले पर्यावरणीय कारकों को आसानी से झेल लेता है. वहीं कुछ लोगों का शरीर इसे झेल नहीं पाता. इसी वजह से जिस गणितीय मॉडल से वैज्ञानिकों ने अधिकतम उम्र निकाली है, वह हर शरीर पर फिट नहीं बैठता. इसलिए मैं अक्सर कहता हूँ कि जब मेडिकल साइंस काफी पीछे था, तब भी लोग 120 साल से अधिक जीवित रहते थे. इसलिए गणितीय मॉडल शरीर की वास्तविक क्षमता से अलग होता है. दूसरी बात यह है कि गणितीय मॉडल पर शोध मेडिकल साइंस के वैज्ञानिक नहीं करते. इसीलिए मेडिकल साइंस में 2+2 हमेशा चार नहीं होता.

उम्र को प्रभावित करने वाले 12 हॉलमार्क (The 12 Hallmarks That Influence Aging)

उम्र को घटाने के लिए वैज्ञानिकों ने 12 तरह के हॉलमार्क को चिह्नित किया है. यानी ये कारक उम्र बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं. इनमें जीनोमिक इंस्टेबिलिटी एकदम प्राइमरी हॉलमार्क है. इसमें समय के साथ कोशिकाओं के डीएनए में नुकसान और उत्परिवर्तन जमा होता रहता है जो बिना किसी बीमारी के भी उम्र को घटाता रहता है. इसके साथ ही टेलोमियर शॉर्टनिंग है. यह डीएनए का एक सुरक्षात्मक सिरा होता है जो उम्र बढ़ने के साथ ही छोटा होता जाता है. एक महत्वपूर्ण हॉलमार्क है एपिजेनेटिक अल्टरेशंस. डॉ. प्रसून चटर्जी कहते हैं कि एपी जेनेटिक में डीएनए अगर AC है तो एपी जेनेटिक उसके AC का रिमोट है. इसके साथ माइटोकॉन्ड्रियल डिसफंक्शन भी प्रमुख हॉलमार्क है. इसमें कोशिका के माइटोकॉन्ड्रिया में एनर्जी बनाने की क्षमता कमतर होती जाती है और उसमें फ्री रेडिकल्स की संख्या बढ़ते जाते हैं. गट डिस्बायोसिस, स्टेम सेल एग्जॉर्शन, सेलुलर सेनेसेंस जैसे हॉलमार्क भी जीवन प्रत्याशा के प्रमुख कारक है. पर इनमें से अधिकांश पर पर्यावरण का कंट्रोल है. क्या हम इस पर्यावरण को अपने हिसाब से अनुकूल बना सकते हैं. क्या सूर्य की किरणों से जो अल्ट्रावायलेट रेज निकलता है उसे अपने शरीर में जाने से रोक सकते हैं? क्या प्रदूषण के कण जो हमारे शरीर के अंदर जा रहा उसे हम रोक सकते हैं? अब सवाल यह उठता है कि इन सारी चीजों से हमारे शरीर के अंदर गंदगी जमा होगी और इसे निकालना होगा. दोनों महत्वपूर्ण है. गंदगी शरीर में तो जमेगा ही जमेगा. पुराने सेल का डेथ होगा ही होगा. एक सीमा तक तक हमारा शरीर खुद ही इन गंदगियों को निकाल देता है लेकिन सीमा से अधिक गंदगी को निकालना मुश्किल है. दूसरा हमारी कोशिकाएं लगातार विभाजित होती है लेकिन एक सीमा के बाद ये विभाजित भी नहीं हो सकती है. उस स्थिति में इस विभाजन को स्लो करना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी.

तो फिर लाइफ कैसे बढ़ाई जाए (How Can You Actually Live Longer?)

डॉ. प्रसून चटर्जी कहते हैं कि वैज्ञानिक पद्धतियों के द्वारा उम्र बढ़ाने वाले कारकों को चाहे हम जितना दबा दे लेकिन हमारा आज भी यही मानना है कि हम लाइफस्टाइल को उपयुक्त बनाकर अपनी उम्र को बढ़ा सकते हैं. हमारे ऋषि मुनि आज भी ज्यादा दिनों तक जीवित रहते हैं लेकिन दिल्ली में रहकर हम उतने दिनों तक नहीं जीवित रह सकेंगे. क्योंकि जो पर्यावरण अनुकूलता हिमालय में मिलेगी वह दिल्ली के पॉल्यूशन में नहीं मिलेगी. डॉ. प्रसून चटर्जी ने बताया कि आज भी हेल्दी और ज्यादा दिनों तक जिंदा रहने का सबसे बड़ा तरीका यही है कि आप कम खाइए लेकिन पौष्टिक खाइए. स्वाद के चक्कर में गंदी चीजें मत खाइए. जितना बाहर की चीजों से बचेंगे और घर के अंदर हेल्दी तरीके से कुक कर चीजों को खाएंगे उतना इसका फायदा मिलेगा. इसके साथ ही सुकून भरी नींद और तनाव रहित जिंदगी को अपनाना होगा. दूसरा खाने की टाइमिंग को भी अपनाना होगा. हमेशा कोशिश कीजिए कि रात को 7-8 बजे से पहले खा लें. एक्सरसाइज सबसे ज्यादा जरूरी है. इन सारी लाइफस्टाइल की चीजों से आप अपनी जिंदगी को बढ़ा सकते हैं.

About the AuthorLakshmi Narayan

लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता जगत का ऐसा नाम हैं, जो भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांप लेते हैं. मीडिया में 20 साल का अनुभव है और वर्तमान में न्यूज 18 …

और पढ़ेंLocation :

New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

August 13, 2026, 16:41 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj