Flesh Eating Bacteria Alert: बीच पर घूम रहा अदृश्य दानव छूते ही खींचता है मौत के मुंह में अमेरिका में जारी अलर्ट पर भारत में कैसे बचें?

Last Updated:August 10, 2026, 17:46 IST
Flesh Eating Bacteria on Beaches: बारिश के मौसम में बाहर घूमना कितना अच्छा लगता है. अगर बरसते पानी में बीच के किनारे चहलकदमी की जाए, तो ये और मजेदार है. हालांकि उतना ही रिस्क भी है क्योंकि बीच पर एक ऐसा अदृश्य दानव घूम रहा है, जो इंसानी मांस खाता है. अमेरिका में तो इससे जुड़ा अलर्ट भी जारी कर दिया गया है. बीच पर घूम रहा है मांस खाने वाला बैक्टीरिया. (रॉयटर्स)
Flesh Eating bacteria Risk in India: अमेरिका में इस वक्त समंदर के किनारे बारिश में घूमने वालों की जिंदगी में ऐसा विलेन आ चुका है कि बाकायदा वॉर्निंग दी जा रही है कि बीच से दूर रहें. ये एक खास किस्म का लगभग न दिखाई देने वाला दुश्मन है, जो इंसान को मौत के मुंह में पहुंचा देता है. पूरे देश में से गंभीरता से लिया जाता है. खास तौर पर लुइसियाना राज्य में समुद्र तटों पर जाने वालों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी भी जारी कर दी है. इस पूरे बवाल की वजह है – वायब्रियो वल्निफिकस नाम का बैक्टीरिया, जो किसी को अपनी चपेट में ले ले, तो तड़पा-तड़पाकर मारता है.
हाल के दिनों में इससे संक्रमण के मामले बढ़े हैं. इस साल अब तक नौ लोग संक्रमित हुए, सभी को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा और 5 की मौत हो गई. इस बैक्टीरिया को फ्लेश -ईटिंग बैक्टीरिया यानि मांस खाने वाला बैक्टीरिया कहा जाता है. कुछ गंभीर मामलों में यह टिश्यू को नुकसान पहुंचा सकता है. हालांकि गनीमत ये है कि हर संक्रमण में ऐसा नहीं होता, बावजूद इसके बचकर न रहने पर ये आराम से टहलते हुए लोगों को अस्पताल के बिस्तर पर सुलाने की ताकत रखता है.
आखिर क्या है ये बैक्टीरिया?
वायब्रियो वल्निफिकस एक प्राकृतिक बैक्टीरिया है जो गर्म समुद्री पानी और खारे-मीठे पानी में पनपता है. यह पानी में आम तौर पर मौजूद रहता है.
इसका संक्रमण दो मुख्य तरीकों से होता है. पहला- शरीर में कट, घाव या त्वचा के किसी घाव के जरिए जब व्यक्ति दूषित समुद्री पानी में जाता है और दूसरा- कच्चा या अधपका समुद्री भोजन, खासकर ऑयस्टर खाने से.
हल्के संक्रमण तो आम हैं, लेकिन वायब्रियो वल्निफिकस गंभीर घाव संक्रमण या खून में संक्रमण पैदा कर सकता है. ऐसे गंभीर मामलों में यह तेजी से फैलकर जानलेवा बन जाता है.
बैक्टीरिया लगने के लक्षण क्या-क्या ?
समुद्री पानी के संपर्क में आने के बाद घाव के आसपास लालिमा, सूजन, गर्मी, तेज दर्द या रंग बदलना जैसे लक्षण नजर आएं तो सतर्क रहें. बुखार और ठंड लगना भी लक्षण हो सकता है और गंभीर स्थिति में त्वचा पर छाले पड़ सकते हैं या टिश्यू काले पड़ सकते हैं. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
क्या भारत में भी है बैक्टीरिया का खतरा?
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि भारत की लंबी कोस्टल लाइन है और लाखों लोग तटीय इलाकों में रहते या काम करते हैं. मछुआरे, समुद्री भोजन संभालने वाले और जो लोग अक्सर समुद्र में जाते हैं, वे इस बैक्टीरिया के संपर्क में आ सकते हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि भारत में लुइसियाना जैसा प्रकोप चल रहा है. अमेरिकी मामलों को भारतीय समुद्र तटों पर वैसी ही स्थिति का सबूत नहीं मानना चाहिए.
तो क्या समुद्री तटों पर न जाएं?
ऐसा नहीं है कि घबराकर समुद्र तट जाना बंद कर दें. संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम है, बस सावधानी बरतने की जरूरत है. खुले कट या घाव होने पर समुद्री या खारे पानी में न जाएं. अगर पानी के संपर्क में कट आ जाए, तो साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धो लें. समुद्री भोजन, खासकर शेलफिश, को अच्छी तरह पकाकर ही खाएं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म पानी में यह बैक्टीरिया ज्यादा सक्रिय होता है, इसलिए गर्मी के मौसम में तटीय इलाकों में ज्यादा सावधान रहें. भारत में फिलहाल कोई बड़ा केस रिपोर्ट नहीं हुआ है, लेकिन जागरूक रहना ही चाहिए.
About the AuthorPrateeti Pandey
में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…
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August 10, 2026, 17:46 IST



