NEET MBBS Admission: 2 PhD-1 एमबीए, 51 की उम्र में पास की नीट यूजी, 34 साल पहले छोड़ा था स्कूल

Last Updated:August 14, 2026, 12:35 IST
NEET MBBS Admission: तमिलनाडु के ए सुरेश कुमार ने 51 साल की उम्र में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया है. अब तक वह 2 बार पीएचडी कर चुके हैं और उनके पास एमबीए की डिग्री भी है. उन्होंने नीट यूजी में 192 अंक हासिल कर नागपट्टिनम सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट हासिल की है. ए सुरेश कुमार ने 34 साल पहले डॉक्टर बनने का जो सपना देखा था, उसे आखिरकार साकार कर ही लिया.NEET MBBS Admission: सुरेश कुमार ने सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट पक्की कर ली है
नई दिल्ली (NEET MBBS Admission). अगर किसी सपने को दिल से चाहो तो उम्र, जिम्मेदारी और वक्त की बंदिशें भी रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकतीं. तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले के रहने वाले 51 वर्षीय ए. सुरेश कुमार ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है. वह 2 पीएचडी और एक एमबीए जैसी बड़ी डिग्रियां हासिल कर चुके हैं. डायग्नोस्टिक्स सेक्टर में बड़ा पद संभालने के बावजूद उनके मन में डॉक्टर बनने की कसक हमेशा बनी रही.
ए सुरेश कुमार ने 1992 में 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी. इसके ठीक 34 साल बाद उन्होंने देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी पास कर ली है. उन्हें नागपट्टिनम के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट अलॉट हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने नीट में अपर एज लिमिट (ऊपरी आयु सीमा) हटाने का फैसला दिया था. इसी ने सुरेश कुमार के बचपन के सपने में नई जान फूंक दी. एमबीबीएस की डिग्री मिलते ही उनका बचपन का डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो जाएगा. पढ़िए मोटिवेशनल स्टोरी.
12वीं के बाद परिस्थितियों ने बदला था रास्ता
सुरेश कुमार ने साल 1992 में 12वीं पास कर ली थी. वे शुरू से ही मेडिकल फील्ड में जाना चाहते थे. हालांकि, पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से उस वक्त एमबीबीएस नहीं कर पाए और उन्होंने फार्मेसी का रास्ता चुन लिया. इसके बाद उन्होंने करियर में लगातार प्रोग्रेस की- डिप्लोमा इन फार्मेसी से शुरुआत करके बीबीए, एमबीए और दो-दो पीएचडी डिग्रियां हासिल कीं. वे एक नामी डायग्नोस्टिक कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट जैसे उच्च पद पर भी कार्यरत रहे.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दिया दोबारा मौका
साल 2020 में जब सुप्रीम कोर्ट ने नीट यूजी के लिए अधिकतम उम्र की सीमा खत्म कर दी तो सुरेश कुमार को लगा कि उनका पुराना सपना फिर से जिंदा हो सकता है. उन्होंने ठान लिया कि वे जीवन के इस मुकाम पर आकर पछतावे के साथ नहीं जीना चाहते. उन्होंने अपनी फुल टाइम नौकरी के साथ-साथ नीट यूजी परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी.
ऑफिस वर्क के साथ रात-रात भर की पढ़ाई
एक तरफ परिवार और नौकरी की जिम्मेदारियां थीं तो दूसरी तरफ नीट जैसी कठिन परीक्षा का सिलेबस. सुरेश कुमार दिनभर नौकरी करते और रात में 10 से 12 बजे तक किताबों के साथ बैठते थे. विषय से जुड़ाव बनाए रखने के लिए वे अपने बेटे को खुद बायोलॉजी (जीव विज्ञान) पढ़ाते थे. इस सफर में उनकी पत्नी ने उनका सबसे बड़ा सहारा बनते हुए सुबह 4 बजे उठाकर पढ़ाई का रूटीन बनाए रखने में मदद की.
192 अंक के साथ स्पेशल कोटा से मिली सीट
नीट यूजी में उन्होंने 720 में से 192 अंक हासिल किए. एक रोड एक्सीडेंट के कारण उन्हें शारीरिक सीमा (दिव्यांग/PWD श्रेणी) का सामना करना पड़ा था. इसके तहत स्पेशल कोटे में उन्हें नागपट्टिनम सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट अलॉट हुई. सुरेश कुमार का कहना है कि उम्र महज एक आंकड़ा है. वे अपने से आधी से भी कम उम्र के युवाओं के साथ मेडिकल कॉलेज जाने को लेकर उत्साहित हैं. उनका कहना है कि वे बिना सैलरी के भी देश के दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों में जाकर मरीजों का इलाज करने के लिए तैयार हैं.
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Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is kno…
August 14, 2026, 12:35 IST



