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Cotton Crop Care Tips: खेत में जमा पानी कपास को कर सकता है बर्बाद, गलन से बचाने के लिए किसान तुरंत करें ये काम

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Cotton Crop: कपास को सड़ने से बचाना है तो बारिश रुकते ही करें ये जरूरी काम

Last Updated:August 19, 2026, 06:33 IST

Cotton Crop Care Tips: भीलवाड़ा में लगातार बारिश और जलभराव के कारण कपास की फसल में जड़ गलन, तना गलन, पत्ती धब्बा और फ्यूजेरियम विल्ट जैसे रोगों का खतरा बढ़ गया है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेत से अतिरिक्त पानी निकालने, नियमित फसल निरीक्षण करने और बीमार पौधों को हटाने की सलाह दी है. फसल में रोग के लक्षण दिखने पर बिना वैज्ञानिक सलाह के दवाओं का इस्तेमाल न करें. सही जल प्रबंधन और निगरानी से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है.

भीलवाड़ा. बारिश के मौसम में कपास की फसल के लिए किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है. लगातार बारिश और खेत में जलभराव से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और कई रोग तेजी से फैल सकते हैं. कपास में जड़ गलन, तना गलन, पत्ती धब्बा, जीवाणु झुलसा और फ्यूजेरियम विल्ट जैसे रोग फसल की बढ़वार और उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी, नियमित फसल निरीक्षण और रोगग्रस्त पौधों की समय पर पहचान बेहद जरूरी है.

खेत में जलभराव होने पर सबसे पहले अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए. खेत में लंबे समय तक पानी भरा रहने से पौधों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं और फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. इसलिए बारिश के बाद खेत का निरीक्षण जरूर करें और जहां पानी जमा हो, वहां निकासी की उचित व्यवस्था करें.

कपास की फसल में जड़ गलन और तना गलन जैसे रोग अधिक नमी के कारण तेजी से फैल सकते हैं. इसके अलावा पत्ती धब्बा, जीवाणु झुलसा और फ्यूजेरियम विल्ट जैसे रोग भी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इन रोगों के कारण पौधों की बढ़वार प्रभावित होने के साथ उत्पादन में भी कमी आ सकती है.

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किसानों को फसल में रोग के लक्षण दिखाई देने से पहले ही खेत की नियमित निगरानी शुरू कर देनी चाहिए. पौधों की पत्तियों, तने और जड़ों को ध्यान से जांचते रहें. किसी पौधे में असामान्य लक्षण नजर आए, तो उसे बाकी पौधों से अलग करने से रोग के फैलाव को कम करने में मदद मिल सकती है.

बारिश के दौरान खेत में अनावश्यक नमी बनाए रखने से बचना जरूरी है. खेत की मेड़ों और पानी निकासी की नालियों को साफ रखें, ताकि बारिश का पानी आसानी से बाहर निकल सके. इससे पौधों की जड़ों में पानी जमा होने की समस्या कम होगी और फसल को जलभराव से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी.

अगर फसल में किसी रोग के लक्षण दिखाई दें, तो किसान अपनी ओर से बिना जानकारी के दवा का इस्तेमाल न करें. कृषि विभाग या कृषि एक्सपर्ट से सलाह लेकर ही उचित दवा और उपचार का चुनाव करें. रोग की सही पहचान के बाद किया गया प्रबंधन अधिक प्रभावी रहता है. समय पर खेत की निगरानी, अतिरिक्त पानी की निकासी और रोगग्रस्त पौधों की पहचान से कपास की फसल को बारिश के मौसम में होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचाया जा सकता है.

First Published :

August 19, 2026, 06:33 IST

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