Tax Rule : पुराना घर बेचने से पहले बना लिया नया मकान, फिर भी मिलेगी टैक्स छूट? ITAT का बड़ा फैसला

नई दिल्ली. आयकर की सबसे बड़ी संस्था इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल (ITAT) ने अपने एक हालिया फैसले में कहा है कि अगर करदाता ने पहले मकान बना लिया है और बाद में प्रॉपर्टी बेचकर मुनाफा कमाया तो भी उन्हें टैक्स छूट का फायदा मिलेगा. ट्रिब्यूनल ने इसके लिए समय-सीमा तय करने के साथ ही मुनाफे पर छूट दिलाने वाले इनकम टैक्स के प्रावधानों के बारे में भी बताया. दिल्ली स्थित अपीलीय न्यायाधिकरण ने यह फैसला राजधानी की एक आवासीय प्रॉपर्टी के मामले में दिया है.
दरअसल, इनकम टैक्स के नियम इतने पेचीदा हैं कि आम आदमी को हर काम के लिए बहुत सावधानी बरती पड़ती है. अब कैपिटल गेन को ही ले लीजिए. सोना-चांदी, शेयर-म्यूचुअल फंड हों या फिर प्रॉपर्टी, इनमें से किसी पर भी मुनाफा कमाते हैं तो कैपिटल गेन टैक्स बनता है. लेकिन, इनकम टैक्स कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं, जहां आपको कैपिटल गेन पर टैक्स बचाने का मौका दिया जाता है. ऐसा ही कानून प्रॉपर्टी पर भी लागू होता है कि अगर आप संपत्ति बेचकर कोई मुनाफा कमाते हैं तो कुछ खास परिस्थितियों में आपको इस मुनाफे पर टैक्स छूट मिल जाती है. लेकिन, इस छूट को पाने के लिए आपको टैक्स के इन पेचीदा नियमों की जानकारी होना जरूरी है.
क्या है न्यायाधिकरण का फैसलादिल्ली निवासी राज कुमार ने इनकम टैक्स ऑफिस के आईटीए नंबर 3396/Del/2026 के तहत एक आवासीय संपत्ति का मामला जीता है. उन्होंने पहले अपना मकान बना लिया, उसके बाद पुराना घर बेचा. मामले में इनकम टैक्स विभाग ने उन्हें नोटिस भेजकर टैक्स की मांग की थी. ट्रिब्यूनल ने सेक्शन 148 के तहत जारी इस नोटिस को रद्द करते हुए राज कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि इनकम टैक्स छूट के लिए दी गई समयसीमा के भीतर भेजे इस नोटिस का कोई औचित्य नहीं है.
क्या है पूरा मामलादिल्ली के राजौरी गार्डन निवासी राज कुमार का पश्चिम विहार में एक आवासीय फ्लैट था, जो उन्होंने 20 जुलाई, 2005 को 6.48 लाख रुपये में खरीदा था, जिसमें स्टांप ड्यूटी भी शामिल है. राज कुमार ने इस फ्लैट को 9 अक्टूबर, 2013 में 53 लाख रुपये में बेचा. चूंकि, उन्होंने इस संपत्ति को 36 महीने से ज्यादा समय तक अपने पास रखा तो इस पर लॉन्ग टर्म कैपिटन गेन लगेगा और इसी हिसाब से टैक्स की गणना होगी. कुमार ने तिलक नगर में दूसरी आवासीय संपत्ति खरीदी और इन पैसों के निवेश पर सेक्शन 54 के तहत छूट क्लेम की. आईटीएटी ने अपने आदेश में कहा है कि राज कुमार ने दूसरी संपत्ति की जमीन से लेकर निर्माण तक 47.38 लाख रुपये खर्च किए थे.
विभाग ने क्यों खारिज की छूटमामले पर विवाद तब शुरू हुआ जब कुमार ने दूसरे मकान का निर्माण पहला वाला बेचने से करीब एक साल पहले शुरू कर दिया. इनकम टैक्स विभाग के आकलन अधिकारी ने सेक्शन 54 के तहत क्लेम को खारिज कर दिया और पूरे 53 लाख रुपये पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन मानकर टैक्स लगा दिया. टैक्स अधिकारी ने इंडेक्सेशन के लाभ को भी खारिज कर दिया. कुमार ने सबसे पहले नेशनल फेसलेस अपीलीय सेंटर (NFAC) में इस फैसले को चैलेंज किया, जहां उनकी अपील खारिज हो गई. NFAC ने कहा कि सेक्शन 54 में छूट नहीं मिल सकती, क्योंकि निर्माण पुराने मकान को बेचने से पहले ही शुरू किया गया है.
ट्रिब्यूनल ने सुनाया सही फैसलाकुमार ने इस फैसले को दिल्ली स्थित टैक्स ट्रिब्यूनल में चैलेंज किया. उनके वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए सेक्शन 148 के नोटिस पर ही सवाल उठा दिया. ट्रिब्यूनल ने देखा कि कुमार को सेक्शन 148 का नोटिस 28 मई, 2021 को मिला है. इस तरह, लिमिटेशन पीरियड से 33 दिन पहले ही कुमार को नोटिस थमा दिया गया. ट्रिब्यूनल ने देखा कि मामले में 9 जुलाई, 2022 तक सरवाइविंग पीरियड था, जबकि आकलन अधिकारी ने अपना आदेश 23 जुलाई, 2022 को जारी किया था. ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि सेक्शन 147 के तहत जारी नोटिस समय सीमा से पहले ही थमा दिया गया, जिससे इसकी वैधता पर सवाल उठता है. लिहाजा कुमार को सेक्शन 54 के तहत इनकम टैक्स छूट क्लेम करने से रोका नहीं जा सकता है.



