गुलेल से फल तोड़ने वाली खुशी ने कोरिया में साधा गोल्ड पर निशाना, तीरंदाजी में भारत को दिलाया सोना

Last Updated:August 20, 2026, 10:59 IST
Khushi Kumawat Success Story: जोबनेर की बेटी खुशी कुमावत ने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराया है. दक्षिण कोरिया में हुई विश्व तीरंदाजी युवा आमंत्रण प्रतियोगिता-2026 में खुशी ने अंडर-21 महिला रिकर्व टीम के साथ गोल्ड मेडल जीता. फाइनल में भारतीय टीम ने मेजबान कोरिया-ए को 5-3 से हराकर खिताब अपने नाम किया. खुशी के पिता सांवर मल कुमावत के अनुसार, बेटी ने अभ्यास को कभी नहीं छोड़ा. घर पर भी वह तीरंदाजी का अभ्यास करती थी और गुलेल से पेड़ों पर लगे फलों को निशाना बनाती थी. राष्ट्रीय चयन में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली. वर्ष 2023 में वह ताइवान एशिया कप में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.
बेटियां जब अपने सपनों को लक्ष्य बना लेती हैं तो मुश्किलें भी उनके हौसले के सामने छोटी पड़ जाती है. जयपुर जिले के जोबनेर कस्बे की बेटी खुशी कुमावत ने अपनी मेहनत और जुनून से ऐसा ही इतिहास रचा है. साधारण परिवार से निकलकर भारतीय तीरंदाजी टीम में जगह बनाने वाली खुशी ने दक्षिण कोरिया की धरती पर देश का तिरंगा शान से लहराया है. विश्व तीरंदाजी युवा आमंत्रण प्रतियोगिता-2026 में खुशी ने गोल्ड मेडल जीता है.
खुशी कुमावत की कहानी इसलिए खास है, क्योंकि उनका सफर किसी बड़े शहर की आधुनिक सुविधाओं या महंगे प्रशिक्षण केंद्रों से शुरू नहीं हुआ. ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने लगातार प्रेक्टिस की. उन्होंने अपने आत्मविश्वास के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई. खुशी जयपुर ग्रामीण क्षेत्र की पहली लड़की हैं, जिन्होंने भारतीय तीरंदाजी टीम में जगह बनाई है.
दक्षिण कोरिया में आयोजित विश्व तीरंदाजी युवा आमंत्रण प्रतियोगिता-2026 में खुशी ने अंडर-21 महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में प्रंजल कोंडापावुलुरी और युक्ताश्री के साथ दमदार प्रदर्शन किया. भारतीय टीम ने रोमांचक फाइनल मुकाबले में मेजबान कोरिया-ए को उसी की धरती पर 5-3 से शिकस्त देकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. भारतीय तीरंदाजों के इस प्रदर्शन ने प्रतियोगिता में देश का गौरव बढ़ाया. फाइनल में दबाव के बावजूद टीम ने शानदार संयम दिखाया और मुकाबले में जीत दर्ज कर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया.
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खुशी ने प्रतियोगिता के क्वालीफाइंग दौर में भी अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया. भारतीय टीम ने कुल 1890 अंक हासिल कर तीसरी रैंक प्राप्त की, जबकि खुशी ने व्यक्तिगत रूप से 634 अंक जुटाकर नौवीं रैंक हासिल की. ग्रुप चरण में भारत ने कोरिया-बी को 5-3 से हराया. इसके बाद व्यक्तिगत मुकाबले में खुशी ने सिंगापुर की खिलाड़ी को 6-0 से पराजित किया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मजबूत प्रदर्शन ने यह साबित किया कि खुशी अब भारतीय तीरंदाजी में उभरती हुई प्रतिभाओं में अपनी जगह बना चुकी हैं.
खुशी की सफलता के पीछे वर्षों की कठिन मेहनत और ऐसा जुनून है, जिसने उन्हें कभी अभ्यास से दूर नहीं होने दिया. खुशी के पिता सांवर मल कुमावत बताते हैं कि बेटी ने तीरंदाजी की प्रैक्टिस कभी नहीं छोड़ी. घर पर भी उसने अभ्यास के लिए जगह बना रखी है. तीर-कमान से अभ्यास के साथ वह गुलेल से पेड़ों पर लगे फलों को निशाना बनाकर तोड़ती थी. यही निरंतर अभ्यास आज उसे भारतीय टीम तक लेकर पहुंचा है.
खुशी खुद भी मानती हैं कि उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की है. पढ़ाई के मुकाबले उन्होंने खेल को अधिक प्राथमिकता दी और अपना पूरा ध्यान तीरंदाजी में बेहतर करने पर लगाया. राष्ट्रीय चयन परीक्षण में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम में जगह बनाना उनके लिए बड़ी उपलब्धि रही. इससे पहले भी खुशी वर्ष 2023 में एशिया कप, ताइवान में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. इस अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने और मजबूत किया और अब दक्षिण कोरिया में गोल्ड मेडल उनकी मेहनत का इनाम मिला है.
First Published :
August 20, 2026, 10:59 IST



