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Agriculture News : पारंपरिक खेती छोड़ फलदार पौधों की ओर बढ़े किसान, थाईलैंड किस्म के पपीते से मिल रहा बेहतर मुनाफा

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पारंपरिक खेती छोड़ इधर बढ़े किसान, थाईलैंड किस्म के पपीते से तगड़ा मुनाफा

Last Updated:August 20, 2026, 15:41 IST

Thailand Breed Papaya In Udaipur : उदयपुर संभाग के किसान अब पारंपरिक खेती के बजाय पपीते की थाईलैंड किस्म उगा रहे हैं. यह किस्म कम समय में फल देती है और बाजार में इसकी अच्छी मांग है. इस किस्म के पौधे ज्यादा ऊंचे नहीं होते और इनमें फल भी अपेक्षाकृत जल्दी आने लगते हैं.

उदयपुर संभाग में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ फलदार पौधों की खेती की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं. खास तौर पर मावली और फतहनगर क्षेत्र के कई किसान पपीते की नई किस्मों की खेती कर रहे हैं. इनमें थाईलैंड किस्म का पपीता किसानों के बीच खास पसंद बन रहा है. किसानों का कहना है कि इस किस्म के पौधे ज्यादा ऊंचे नहीं होते और इनमें फल भी अपेक्षाकृत जल्दी आने लगते हैं. बाजार में पपीते की मांग पूरे साल बनी रहने से किसानों को इसकी खेती से अच्छी आमदनी की उम्मीद रहती है.

किसानों के मुताबिक खेती में लागत और मेहनत को देखते हुए ऐसी फसलों का चयन जरूरी है, जिनसे कम समय में उत्पादन मिल सके. थाईलैंड किस्म का पपीता इसी वजह से किसानों को आकर्षित कर रहा है. इसके पौधे सामान्य तौर पर छोटे आकार के रहते हैं, जिससे फल तोड़ने और पौधों की देखभाल में भी आसानी होती है. खेत में पौधों की देखरेख करना आसान होने के साथ ही किसान उत्पादन को बेहतर तरीके से संभाल पा रहे हैं.

पपीते की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है. फल के रूप में पपीते की खपत घरों के साथ-साथ होटल, रेस्टोरेंट और फलों की दुकानों पर भी होती है. ऐसे में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए ज्यादा लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता. यही वजह है कि अब कई किसान पारंपरिक फसलों के साथ पपीते की खेती को भी विकल्प के तौर पर अपना रहे हैं.

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उदयपुर के हॉर्टिकल्चर विभाग से जुड़े कैलाश ने बताया कि इन दिनों उदयपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में किसान कई तरह के फलदार पौधों की खेती में रुचि ले रहे हैं. इनमें थाईलैंड किस्म का पपीता प्रमुख रूप से सामने आया है. इस किस्म की खासियत इसका अपेक्षाकृत छोटा पौधा और बड़े आकार का फल माना जा रहा है. छोटे पौधे होने के कारण किसानों को फसल की देखभाल और फल तोड़ने में सुविधा रहती है.

विभाग की ओर से किसानों को फलदार पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके लिए नर्सरियों में अलग-अलग किस्मों के पौधे तैयार किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को अच्छी गुणवत्ता के पौधे आसानी से उपलब्ध हो सकें. किसान तैयार पौधों को सीधे अपने खेतों में रोप सकते हैं. इससे बीज से पौधा तैयार करने में लगने वाला समय और अतिरिक्त मेहनत भी कम होती है.

किसानों का कहना है कि फलदार पौधों की खेती में अगर सही किस्म का चयन किया जाए और समय पर सिंचाई, खाद तथा कीट नियंत्रण का ध्यान रखा जाए तो उत्पादन बेहतर मिल सकता है.पपीते की खेती में भी शुरुआत से ही पौधों की उचित दूरी, पानी की व्यवस्था और नियमित देखभाल जरूरी है. थाईलैंड किस्म के पपीते को लेकर किसानों में बढ़ रही रुचि को इसी बदलती खेती की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है.

First Published :

August 20, 2026, 15:41 IST

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