Compassionate Ground Father Job Transfer High Court Verdict। Jharkhand High Court order on Father Job transfer on Compassionate Ground। शादीशुदा बेटी

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शादीशुदा बेटी पिता की जगह नौकरी की हकदार… नालायक बेटों पर HC का सख्त फैसला
Last Updated:August 20, 2026, 17:20 IST
झारखंड हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि केवल शादीशुदा होना किसी बेटी की अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार को खत्म नहीं कर सकता. दिवंगत कर्मचारी की बेटी की आर्थिक निर्भरता और मां की देखरेख को आधार मानते हुए जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने कोयला खदान मैनेजमेंट (CMPFO) को 8 हफ्ते के भीतर शादीशुदा बेटी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का सख्त आदेश दिया है.कोर्ट ने सख्त आदेश सुनाया.
झारखंड हाईकोर्ट ने अनुकंपा (Compassionate Ground) के आधार पर नौकरी पाने के अधिकार को लेकर एक बेहद अहम और संवेदनशील फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर किसी बेटी की अनुकंपा नियुक्ति की याचिका को खारिज नहीं किया जा सकता, यदि यह साबित हो जाता है कि वह अपने दिवंगत पिता पर पूरी तरह से निर्भर थी. जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने कोयला खान भविष्य निधि संगठन (CMPFO) को दिवंगत कर्मचारी की शादीशुदा बेटी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का सख्त निर्देश दिया है.
क्या है पूरा मामला?धनबाद स्थित कोयला खदान में सहायक के पद पर कार्यरत अर्जुन प्रसाद की 25 नवंबर 2013 को सेवा काल के दौरान मृत्यु हो गई थी. उनके निधन के बाद उनके परिवार में उनकी बुजुर्ग पत्नी, एक बेटी और दो बेटे रह गए थे. परिजनों ने दिवंगत कर्मचारी की बेटी के लिए अनुकंपा नियुक्ति की मांग करते हुए कई बार आवेदन दिया. हालांकि, जुलाई 2017 में कोयला खदान प्रबंधन ने यह कहकर दावा खारिज कर दिया कि बेटी शादीशुदा है और नियमों के तहत वह इसके लिए योग्य नहीं है.
अदालत का दरवाजा खटखटायाप्रबंधन के इस फैसले से व्यथित होकर बेटी ने वर्ष 2023 में झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया. कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद महिला ने दोबारा नया आवेदन दिया लेकिन फरवरी 2024 में अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान कंपनी ने फिर से उसका दावा खारिज कर दिया. कंपनी का तर्क था कि चूंकि महिला शादीशुदा है, उसके पति की अपनी कमाई है और उसके दो भाई भी नौकरी में हैं, इसलिए वह अपने पिता पर पूरी तरह निर्भर नहीं मानी जा सकती. इसके बाद याचिकाकर्ता ने कंपनी के इस फैसले को पुनः अदालत में चुनौती दी.
मां ने दान की थी पति को किडनीयाचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता रत्नेश कुमार ने अदालत में दलील दी कि दिवंगत कर्मचारी की पत्नी (याचिकाकर्ता की मां) काफी वृद्ध हैं. उन्होंने अपने जीवनकाल में अपने पति को अपनी एक किडनी दान की थी, जिस कारण वह खुद शारीरिक रूप से खदानों में काम करने की स्थिति में नहीं हैं. इसी वजह से मां ने अपनी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के लिए नामित किया था. याचिकाकर्ता शादी के बाद भी अपने पिता पर निर्भर थी, क्योंकि उसके पति की आय बेहद मामूली है और वह अपनी मां की देखभाल करने के लिए तैयार है.
भाइयों ने मोड़ा मुंह, पति की सीमित आय बनी आधारमामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि दिवंगत कर्मचारी के दोनों बेटों ने अपनी बुजुर्ग मां की देखभाल करने से साफ इनकार कर दिया था और वे अलग स्वतंत्र रूप से रह रहे थे. महिला और उसकी वृद्ध मां, दोनों ही खदान से मिलने वाली नाममात्र की पेंशन राशि पर अपना गुजारा कर रही थीं. कोर्ट ने टिप्पणी की कि महज पति की मामूली आय होने का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि बेटी अपने पिता पर निर्भर नहीं थी.
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और आदेशजस्टिस दीपक रोशन ने 12 अगस्त के अपने आदेश में कहा, “याचिकाकर्ता (बेटी) अपने दिवंगत पिता के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति की पूरी हकदार है. वह अपने पिता के निधन के समय उनपर पूरी तरह से निर्भर थी. उसके पास अपना और अपनी बुजुर्ग मां का भरण-पोषण करने का कोई स्वतंत्र जरिया नहीं है.”
अदालत ने कहा कि प्रतिवादियों (कंपनी) ने तथ्यों की गलत व्याख्या की है. केवल शादीशुदा होना या पति की मामूली आय होना किसी भी स्थिति में निर्भरता के दावे को खत्म नहीं कर सकता. हाईकोर्ट ने कोयला खान भविष्य निधि संगठन को निर्देश दिया है कि वे नियमानुसार आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पत्र प्रदान करें.
About the AuthorSandeep GuptaChief Sub Editor
पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
August 20, 2026, 17:20 IST



