Spine Heatlh News | Work Culture News | Working Hour News | 1 घंटा मतलब 55 मिनट… ऐसा क्यों कह रहे हैं डॉक्टर्स? ऑफिस में वर्क करने वाले जरूर जान लें

Last Updated:August 21, 2026, 22:09 IST
Health Warning: क्या आप भी ऑफिस में 8 से 10 घंटे लगातार बैठकर काम करते हैं? अगर हां, तो सावधान हो जाइए. बदलते वर्क कल्चर और गलत पॉश्चर के कारण रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. मेरठ पहुंचे वरिष्ठ स्पाइन स्पेशलिस्ट डॉ. भावुक गर्ग ने बताया कि लगातार बैठने या खड़े रहने से स्पाइन प्रॉब्लम हो सकती है. उन्होंने सलाह दी है कि हर एक घंटे में 5 मिनट का ब्रेक जरूर लें.ऑफिस या फिर कुर्सी पर लॉन्ग हावर तक काम कारने वाले ध्यान दें. (सांकेंतिक)
Spine Health Alert: बदलते दौर और एडवांस लाइफस्टाइल ने हमारी जिंदगी को भले ही आसान बना दिया हो, लेकिन हमारे ‘वर्क कल्चर’ ने हमें नई और गंभीर बीमारियों की तरफ धकेल दिया है. आज के समय में लोग ऑफिसों में 8 से 10 घंटे तक लगातार कुर्सी पर बैठकर काम कर रहे हैं, जिसका सीधा और खतरनाक असर हमारी रीढ़ की हड्डी (Spine) पर पड़ रहा है.
लगातार बैठने से होने वाली इन समस्याओं को लेकर वरिष्ठ स्पाइन स्पेशलिस्ट डॉ. भावुक गर्ग ने मेरठ में एक महत्वपूर्ण जानकारी शेयर की है. उनका कहना है कि अगर आप लगातार बैठते या खड़े रहते हैं, तो रीढ़ की हड्डी की समस्या मुंह बाए खड़ी है.
एक घंटे में 55 मिनट काम, 5 मिनट का ब्रेकडॉ. गर्ग ने बचाव का एक आसान मंत्र देते हुए कहा, ‘एक घंटे में 55 मिनट ही होते हैं, यह सोचकर काम करें. 55 मिनट काम करने के बाद 5 मिनट के लिए अपनी सीट से उठकर जरूर टहलें (मूवमेंट करें).’ उन्होंने बताया कि आइडियल पॉश्चर (सही मुद्रा) बनाए रखना बहुत जरूरी है. आजकल बच्चों में भी गलत पॉश्चर के कारण कूबड़ (Kyphosis) निकलने की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसे माता-पिता घर पर ‘मिरर टेस्ट’ (Mirror Test) के जरिए आसानी से पहचान सकते हैं.
गाना सुनते हुए हो सकता है स्पाइन ऑपरेशनमेडिकल साइंस की नई और अत्याधुनिक तकनीकों पर बात करते हुए डॉ. भावुक गर्ग ने बताया कि अब स्पाइन सर्जरी बहुत आसान और सुरक्षित हो गई है. उन्होंने ‘अवेक स्पाइन सर्जरी’ का जिक्र करते हुए बताया कि नई एनेस्थीसिया तकनीक से अब मरीज को पूरी तरह बेहोश करने की जरूरत नहीं है. मरीज सिर्फ सुन्न की हुई अवस्था में, अपने पसंदीदा गाने सुनते हुए भी स्पाइन का ऑपरेशन करवा सकता है.
डॉ. गर्ग ने कहा, ‘हमारा फोकस मिनिमली इनवेसिव (कम चीर-फाड़ वाली) और नेविगेशन-असिस्टेड तकनीकों पर है. न्यूरो नेविगेशन सूट और रोबोटिक तकनीक जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से सर्जरी में सटीकता बढ़ती है, दर्द कम होता है और मरीज बहुत जल्दी रिकवर कर जाता है.’
मेरठ में शुरू हुई ओपीडी सेवाक्षेत्र के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, मेरठ के मृत्युंजय बोन एंड जॉइंट हॉस्पिटल में ऑर्थोपेडिक्स और स्पाइन सर्जरी ओपीडी सेवाएं शुरू की गई हैं. यहां डॉ. भावुक गर्ग हर महीने के तीसरे शुक्रवार को (सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक) मरीजों को परामर्श देंगे. इस मौके पर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. शुभांकर भी मौजूद रहे.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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Meerut,Uttar Pradesh
First Published :
August 21, 2026, 22:09 IST



