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10 साल की उम्र से घड़ियों की धड़कन पहचानते हैं रामनारायण, जयपुर की छोटी टेबल पर Vintage से Rolex तक को देते हैं नई जिंदगी

Last Updated:August 22, 2026, 13:08 IST

76-Year-Old Narayan Repairing Luxury Watches for 60 Years: जयपुर के जौहरी बाजार में दुकान नंबर 55 के पास एक छोटी टेबल पर बैठकर 76 वर्षीय रामनारायण शर्मा पिछले 60 वर्षों से बंद घड़ियों को सुधार रहे हैं. 1966 से काम कर रहे शर्मा जी को यह हुनर पिता से विरासत में मिला है. वे साधारण HMT से लेकर 10-12 लाख रुपये तक की लग्जरी राडो और रोलेक्स घड़ियों को महज 500-700 रुपये में रिपेयर कर देते हैं. शोरूमों के बड़े ऑफर ठुकराकर वे जयपुर चारदीवारी के प्रति अपने जुड़ाव और यादों के साथ जीवन बिता रहे हैं.

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Jaipur: गुलाबी नगरी जयपुर अपने ऐतिहासिक चारदीवारी बाजार की सुंदरता और समृद्ध विरासत के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां हर दिन हजारों देशी-विदेशी पर्यटक खरीदारी करने और बाजार की सुंदरता देखने के लिए आते हैं. ऐसे विश्वप्रसिद्ध बाजार में बड़ी-बड़ी दुकानों से लेकर सड़कों के किनारे लोगों को बेहतरीन प्रोडक्ट्स के साथ-साथ हाथ का अद्भुत हुनर भी देखने को मिल जाता है. चाहे बुनकर हों, शिल्पकार हों या फिर मैकेनिक, जयपुर के बाजारों में हुनरमंदों के हुनर की पहचान किसी से छिपी नहीं है. ऐसे ही जयपुर के प्रसिद्ध जौहरी बाजार में स्थित दुकान नंबर 55 के पास एक छोटी सी टेबल पर बैठकर समय की सुइयों को आगे बढ़ाने वाले नारायण शर्मा एक नायाब हुनरमंद हैं. वे महज 10 साल की उम्र से घड़ियों के मैकेनिक के रूप में यहां काम करते आ रहे हैं और 76 वर्ष की उम्र में भी हर दिन बंद पड़ी घड़ियों को फिर से समय के साथ जोड़ देते हैं.

लोकल-18 की टीम ने जौहरी बाजार में पहुंचकर जब नारायण शर्मा से उनके इस काम और घड़ियों को लेकर बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 1966 से यहां बैठकर घड़ियां सुधारने का काम शुरू किया था, जो आज छह दशकों बाद भी लगातार बरकरार है. घड़ियां चाहे 80-90 के दशक की पुरानी विंटेज HMT हो या फिर सेलिब्रिटीज में चर्चित लग्जरी ब्रांड्स जैसे रोलेक्स (Rolex) और राडो (Rado), वे हर कंपनी और हर प्रकार की घड़ियों को सुधारने का बेहतरीन हुनर रखते हैं. यही वजह है कि आज भी लोग वर्षों से संभालकर रखी गई अपनी बंद घड़ियां ठीक करवाने दूर-दूर से उनके पास आते हैं.

पिता से विरासत में मिला घड़ीसाजी का हुनरनारायण शर्मा ने बताया कि किसी जमाने में उनके दादा जमनादास जी जयपुर में गोल्ड और ज्वेलरी का काम करते थे. इसके बाद उनके पिता कालूराम शर्मा ने घड़ियों के बाजार में कदम रखा और वे अपने समय के बेहतरीन मैकेनिक रहे. अपने पिता से ही उन्होंने घड़ियों को सुधारने की बारीक तकनीक सीखी और आज इसी हुनर से उनकी खास पहचान बनी हुई है. वे बताते हैं कि जब लोग अपनी सालों पुरानी बंद घड़ियां किसी बड़े शोरूम में लेकर पहुंचते हैं, तो उन पर भारी खर्च बता दिया जाता है. ऐसी ही खास और कीमती घड़ियों को वे बेहद कम खर्च में रिपेयर कर देते हैं और घड़ियां फिर से अपनी सुइयों के साथ दौड़ने लगती हैं. उनके पास कोई बड़ी दुकान या शोरूम नहीं है, बस एक छोटी सी टेबल ही उनकी पूरी दुकान है, जहां सभी प्रकार की घड़ियां बंद हालत में आती हैं और कुछ ही मिनटों में चलना शुरू हो जाती हैं.

10-12 लाख की लग्जरी घड़ियां भी टेबल पर बैठकर की रिपेयरनारायण शर्मा बताते हैं कि आज भी उनके पास ऐसे लोग अपनी घड़ियां लेकर पहुंचते हैं जिनकी कीमत लाखों में होती है. लाखों रुपये कीमती घड़ियों को हाथ लगाने से हर मैकेनिक एक बार जरूर सोचता है, लेकिन उन्होंने 10 से 12 लाख रुपये तक की कीमती घड़ियों को भी अपनी इसी टेबल पर बैठकर सुधारा है. उनका कहना है कि वे सिर्फ पैसे के लिए काम नहीं करते. जयपुर के चारदीवारी बाजार से जुड़कर रहना और बचपन से लेकर 76 साल की उम्र का अनुभव का सुकून ही उन्हें आज भी यहां बांधे हुए है. वरना वे किसी बड़े शोरूम में लाख रुपये महीने की सैलरी पर भी मैकेनिक बनकर काम कर सकते थे, लेकिन वे यहां अपनी यादों के साथ जीते हैं. नारायण शर्मा महज 500 से 700 रुपये में बेहतरीन से बेहतरीन घड़ियों की सर्विस कर देते हैं. इसीलिए लोग वर्षों से उनके पास आते हैं और वे सुबह की पहली किरण से शाम की आखिरी किरण तक समय की सुइयों को चलाने का काम निष्ठा से कर रहे हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Jaipur,Jaipur,Rajasthan

First Published :

August 22, 2026, 13:08 IST

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