Japan Earthquake Today : 5.9 की तीव्रता से कांपी धरती, आधी नींद में सड़कों पर भागे लोग, खिड़की-दरवाजे से आने लगी डरावानी आवाजें

टोक्यो: आधी रात को जब दुनिया गहरी नींद में सोई थी तब अपने आप खिड़की-दरवाजे हिलने लगे, खड़खड़ाने की डरावानी आवाजों से नींद खुली. जिसके बाद सभी लोग बिस्तर से निकल सड़कों पर भागे. ये खौफनाक मंजर जापान में देखने को मिला जहां रात के 2 बजे भयानक भूकंप आया. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.9 मापी गई है. हालांकि, लोगों में खौफ इसलिए ज्यादा था, क्योंकि यहां अभी कुछ हफ्तों पहले ही इससे भी भयानक भूकंप आ चुका है. जिसमें कई बिल्डिंगें तबाह हो गई थीं और लोगों की जान भी चली गई थी.
जापान में आधी नींद में सड़कों पर भागे लोग
जापानी मौसम विज्ञान एजेंसी के मुताबिक, रविवार तड़के करीब 2 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.9 मापी गई. हालांकि, राहत की बात ये रही कि समुद्र में सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है लेकिन जिस तरह से इबारकी, टोक्यो, साइतामा और चिबा प्रांतों में अचानक जमीन डोली, उसने कुछ ही हफ्तों पहले आए विनाशकारी भूकंप के जख्मों को फिर से ताजा कर दिया है.
यह खौफनाक मंजर रविवार तड़के करीब 2 बजे का है. लोग अपने घरों में सो रहे थे कि अचानक दीवारों पर टंगे फ्रेम गिरने लगे, खिड़कियां और दरवाजे जोर-जोर से हिलने लगे. भूकंप का केंद्र दक्षिणी इबारकी प्रांत में जमीन से करीब 70 किलोमीटर की गहराई में स्थित था.
जापान के 7-पॉइंट वाले सीस्मिक स्केल पर इसकी तीव्रता ‘लोअर 5’ दर्ज की गई. ‘लोअर 5’ तीव्रता का मतलब होता है कि मकान इतने जोर से हिलते हैं कि दीवारों में दरारें आने की आशंका रहती है और बिना सहारे रखी भारी चीजें नीचे गिर जाती हैं. आधी रात को जब अलार्म बजने लगे और इमारतें झूलने लगीं, तो लोग अपनी जान बचाने के लिए अपने बच्चों और बुजुर्गों को साथ लेकर खुले मैदानों और सड़कों की ओर भागे.
कुमामोटो त्रासदी की जख्म हुए हरे
जापान के लोग अभी इस झटके से उबरने की कोशिश कर ही रहे हैं कि उनके जहन में 28 जुलाई को आई तबाही का मंजर घूमने लगा है. महज कुछ ही हफ्ते पहले जापान के दक्षिणी द्वीप क्यूशू के कुमामोटो इलाके में 7.1 की भयंकर तीव्रता का भूकंप आया था.
उस 7.1 तीव्रता वाले विनाशकारी भूकंप ने हंसते-खेलते शहर को मलबे में तब्दील कर दिया था. उस त्रासदी में कम से कम 18 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी, जिनमें एक विदेशी नागरिक भी शामिल था. इसके अलावा 62 से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हो गए थे. अधिकारियों के मुताबिक, 6 लोग तो बेहद गंभीर हालत में आईसीयू में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे. उस तबाही का खौफ अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि इस 5.9 तीव्रता के झटके ने लोगों को फिर से दहशत से भर दिया.
मॉल में गैस धमाका और दूसरी मंजिल ढहने का वो भयावह सीन
पिछले भूकंप के दौरान काशिमा शहर का प्रसिद्ध ‘इयोन मॉल’ तबाही का सबसे बड़ा गवाह बना था. 7.1 तीव्रता का झटका आते ही मॉल में भगदड़ मच गई थी, उस वक्त वहां हजारों खरीदार मौजूद थे.
मॉल प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए करीब 3,000 ग्राहकों को आनन-फानन में बाहर पार्किंग एरिया में निकाला. लेकिन तभी मॉल के एक हिस्से में भीषण गैस ब्लास्ट हो गया. ये धमाका इतना जबरदस्त था कि भूकंप के बाद पूरा इलाका दोबारा थर्रा उठा. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि धमाके का झटका भूकंप से भी ज्यादा खौफनाक महसूस हुआ था.
इस ब्लास्ट के कारण इयोन मॉल की पूरी दूसरी मंजिल ताश के पत्तों की तरह ढह गई. इयोन मॉल के प्रेसिडेंट एकियो योशिदा के मुताबिक, उस हादसे में 4 लोगों के शव मलबे से निकाले गए थे, जबकि 3 लोग लंबे समय तक लापता रहे थे.
मलबे में इंसानी जिंदगी की तलाश: सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन
उस हादसे के बाद कंक्रीट के बड़े-बड़े ढेरों और लोहे के गर्डरों के बीच जिंदगी की सांसें तलाशना रेस्क्यू टीमों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था. जापानी मीडिया द्वारा जारी फुटेज में देखा गया था कि किस तरह हेलमेट और मास्क पहने जापानी सेना के जवान और इमरजेंसी वर्कर्स भारी मलबे को हटाकर फंसे हुए लोगों को निकाल रहे थे.
मॉल की छत और दीवारों का मलबा चारों तरफ फैला हुआ था. सेना ने क्रेन और आधुनिक उपकरणों की मदद से कई दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया था. आज जब आधी रात को 5.9 की तीव्रता से दोबारा ज़मीन हिली, तो लोगों को लगा कि कहीं फिर से इयोन मॉल जैसा कोई खौफनाक हादसा न हो जाए.



