29 की उम्र में दोनों किडनियां खराब, फिर भी नहीं टूटा हौसला, कांवड़ियों की सेवा में जुटा है सुखाराम

Last Updated:August 25, 2026, 07:27 IST
Sukharam Saran Inspiring Story: नागौर के परबतसर क्षेत्र के ढाढ़ोता गांव के 29 वर्षीय सुखाराम सारण की कहानी इंसानियत और हौसले की मिसाल है. सुखाराम की दोनों किडनियां खराब हैं और करीब एक साल से उनका नियमित डायलिसिस हो रहा है. खुद गंभीर बीमारी और इलाज के बीच जिंदगी गुजार रहे सुखाराम सावन के महीने में कांवड़ियों की निशुल्क मेडिकल सेवा कर रहे हैं. कांवड़ यात्रा के दौरान लंबी दूरी तय करने वाले श्रद्धालुओं को थकान, कमजोरी, चोट और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें होती हैं. ऐसे समय में सुखाराम जरूरतमंद श्रद्धालुओं की मदद के लिए आगे आते हैं. इसके लिए वे किसी से फीस नहीं लेते. उनका इलाज मकराना के एक अस्पताल में चल रहा है और दवाइयां भी लगातार जारी हैं. इसके बावजूद वे आम लोगों को भी निशुल्क चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं. सुखाराम की जिंदगी का संदेश साफ है कि खुद मुश्किल में होने के बावजूद दूसरों के दर्द को समझना ही सच्ची सेवा है.
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नागौर. सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और कांवड़ यात्रा के लिए जाना जाता है. इस दौरान हजारों श्रद्धालु आस्था के साथ लंबी दूरी तय करते हुए शिवालयों तक पहुंचते हैं. रास्ते में किसी को चोट लगती है तो कोई थकान और कमजोरी से परेशान होता है. ऐसे वक्त में परबतसर क्षेत्र के ढाढ़ोता निवासी 29 वर्षीय सुखाराम सारण कांवड़ियों के लिए मददगार बनकर सामने आए हैं. खास बात यह है कि जिन लोगों की सेवा के लिए सुखाराम रास्ते में खड़े हैं, उनसे कहीं ज्यादा मुश्किल जिंदगी वे खुद जी रहे हैं. ये खुद जिंदगी और बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन सावन में दूसरों की तकलीफ दूर करने का बीड़ा उठा रखा है.
वे कावड़ियों के लिए निशुल्क मेडिकल सेवा दे रहे हैं. सुखाराम गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. उनकी दोनों किडनियां खराब है और करीब एक साल से उनका नियमित डायलिसिस चल रहा है. दवाइयां भी लगातार जारी है. वर्तमान में मकराना स्थित एक अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है. बीमारी के कारण उन्हें खुद नियमित इलाज और विशेष देखभाल की जरूरत रहती है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सेवा का रास्ता नहीं छोड़ा.
सावन में कांवड़ियों की नि:शुल्क मेडिकल सेवा
सावन शुरू होते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ लेकर धार्मिक स्थलों की ओर निकलते हैं. लंबी पैदल यात्रा के दौरान पैरों में दर्द, थकान, कमजोरी, चोट या दूसरी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आम है. सुखाराम ऐसे ही जरूरतमंद कांवड़ियों की मदद कर रहे हैं. वे श्रद्धालुओं को नि:शुल्क मेडिकल सेवा उपलब्ध करा रहे हैं. उनके लिए न कोई फीस है और न सेवा के बदले किसी तरह की अपेक्षा.
खुद दर्द में रहकर कावड़ियों की कर रहे हैं सेवा
सुखाराम की कहानी इसलिए भी अलग है, क्योंकि उन्होंने अपनी बीमारी को दूसरों की मदद के आड़े नहीं आने दिया. एक तरफ अस्पताल, दवाइयां और डायलिसिस उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ सावन में वे कांवड़ यात्रियों की सेवा में जुटे हैं. सुखाराम का कहना है कि अगर किसी जरूरतमंद की परेशानी कम करने का मौका मिले तो उसे छोड़ना नहीं चाहिए.
सेवा के लिए साधन नहीं, संवेदना जरूरी
सुखाराम का कहना है कि इंसान के जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर मन में दूसरों की मदद करने की भावना है तो सेवा का रास्ता निकाला जा सकता है. उनकी जिंदगी की यह कहानी समाज के लिए भी एक बड़ा संदेश है. अक्सर लोग अपनी परेशानियों को दूसरों की मदद न कर पाने का कारण मान लेते हैं, लेकिन सुखाराम ने अपनी गंभीर बीमारी के बीच भी सेवा को प्राथमिकता दी है. 29 साल की उम्र में दोनों किडनियां खराब होना और लंबे समय से डायलिसिस पर रहना किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ी चुनौती है. इसके बावजूद सुखाराम का हौसला कमजोर नहीं हुआ. सावन में कांवड़ियों की सेवा के अलावा आम लोगों को निःशुल्क चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराते हैं.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Nagaur,Rajasthan
First Published :
August 25, 2026, 07:27 IST


